किडनी हमारे शरीर में फिल्टर की तरह कार्य करती है, जो खून से विषाक्त पदार्थों और बचे हुए पानी को छानकर पेशाब के द्वारा शरीर से बाहर निकालती है। हमारा शरीर सही तरीके से कार्य करे, इसके लिए किडनी हमारे शरीर में नमक और खनिज जैसे कैल्शियम, फॉस्फोरस, सोडियम और पोटैशियम आदि का संतुलन भी बनाए रखती है। इसके अलावा किडनी, लाल रक्त कोशिकाएं बनाने में, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में और हड्डियों को स्वस्थ रखने में भी मदद करती है।
 
किडनी डिजीज के अलग-अलग चरण
क्रोनिक किडनी डिजीज के मुख्यतः 5 चरण होते हैं। इन चरणों का निर्धारण आपके किडनी के कार्य की अवस्था और ग्लोमरुलेर फिल्ट्रेशन रेट (किडनी के मूत्र छानने की दर) के अनुसार किया जाता है। आपका उपचार, डाइट, पानी का सेवन आदि आपके किडनी के स्टेज पर निर्भर करता है-
  • स्टेज 1- 90  या उससे अधिक ग्लोमरुलेर फिल्ट्रेशन रेट
  • स्टेज 2- 60-98 ग्लोमरुलेर फिल्ट्रेशन रेट
  • स्टेज 3ए-  45-59 ग्लोमरुलेर फिल्ट्रेशन रेट
  • स्टेज 3बी- 30-44 ग्लोमरुलेर फिल्ट्रेशन रेट
  • स्टेज 4- 15-29 ग्लोमरुलेर फिल्ट्रेशन रेट 
  • स्टेज 5- 15 से कम ग्लोमरुलेर फिल्ट्रेशन रेट 

(और पढ़ें - किडनी स्वस्थ रखने के 5 सीक्रेट)

जब किडनी सही प्रकार से कार्य नहीं कर पाती, तब हमारा शरीर विषाक्त पदार्थों को पूरी तरह से शरीर से बाहर नहीं निकाल पाता है और यह विषाक्त पदार्थ खून में जमा होने लगते हैं और शरीर के कार्यों पर नकारात्मक तरीके से प्रभाव डालते हैं। इस स्थिति में अपनी डाइट में कुछ बदलाव करके क्रोनिक किडनी डिजीज (किडनी फेल होना) की समस्या के दौरान बीमारी को नियंत्रित रख सकते हैं। लिहाजा इस बीमारी में मरीज को क्या खाना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए, इस बारे में हम आपको इस आर्टिकल में बता रहे हैं।

(और पढ़ें - किडनी फेल होने के कारण)

  1. किडनी फेल होने पर क्या न खाएं - Foods to Avoid during Chronic Kidney Disease in Hindi
  2. किडनी फेल होने पर क्या खाएं - Foods to Eat during Chronic Kidney Disease in Hindi
  3. डाइट से जुड़े अन्य जरूरी टिप्स - Chronic Kidney Disease Diet Tips in Hindi
  4. क्रोनिक किडनी डिजीज डाइट चार्ट - Chronic Kidney Disease Diet Chart in Hindi
  5. किडनी फेल होने पर क्या खाना चाहिए के डॉक्टर

क्रोनिक किडनी डिजीज यानी किडनी फेल होने की बीमारी के दौरान डाइट में कुछ खनिज तत्वों की मात्रा को नियंत्रित करना बेहद जरूरी होता है। कौन से हैं वे खनिज इस विषय में हम आपको यहां विस्तार से बता रहे हैं-

क्रोनिक किडनी डिजीज में सोडियम का कम सेवन करें - Eat less Sodium during Chronic Kidney Disease in Hindi

रोजाना की डाइट में नमक और सोडियम की मात्रा नियंत्रित रखें। समय के साथ-साथ, इस समस्या के दौरान हमारी किडनी सोडियम और पानी के संतुलन को ठीक नहीं रख पाती, जिस कारण एडिमा (शरीर के किसी हिस्से में द्रव एकत्रित होने के कारण सूजन) जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। कम सोडियम वाली डाइट आपके ब्लड प्रेशर को ठीक रखने के साथ-साथ, शरीर में पानी के संग्रहण को भी कम करने में मदद करते हैं। इस पर नियंत्रण के लिए, घर का बना ताजा और हेल्दी भोजन खाएं।

(और पढ़ें - ज्यादा नमक खाने का कारण)

रेस्तरां में बने भोजन और प्रोसेस्ड व पैक्ड फूड में प्रिजर्वेटिव्स के कारण सोडियम की मात्रा काफी ज्यादा होती है, इसलिए इसके प्रयोग से बचें। जब भी पैकेट वाली कोई वस्तु खरीदें, उसका न्यूट्रिशन लेबल जरूर पढ़ें और 5% से कम सोडियम युक्त वस्तु ही खरीदें। खाने में ऊपर से नमक के उपयोग की जगह काली मिर्च, ऑरिगैनो, सरसों आदि का इस्तेमाल करें। इसके अलावा भी कुछ तरीके हैं जिससे आप सोडियम के प्रयोग को कम कर सकते हैं-

  • खाने में ऊपर से नमक ना लें, सॉल्ट सीजनिंग का प्रयोग ना करें।
  • चिप्स, नमकीन, बिस्किट, फ्रेंच फ्राई, पिज्जा, बर्गर, बेकरी प्रोडक्ट्स से परहेज करें।
  • केचअप, सॉस, जैम, जेली, अजीनोमोटो युक्त भोजन आदि से परहेज करें।
  • पैकेट वाले जूस, ब्रेकफास्ट सीरियल, रेडी टू ईट भोजन जैसे की उपमा, नूडल, पास्ता आदि भी न खाएं।

(और पढ़ें - जंक फूड के नुकसान)

किडनी फेल होने पर पोटैशियम कम खाएं - Eat less Potassium during Chronic Kidney Disease in Hindi

सही मात्रा में लिया गया पोटैशियम तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियों को सही तरीके से कार्य करने में मदद करता है। क्रोनिक किडनी डिजीज के दौरान ज्यादा मात्रा में पोटैशियम, आपके खून में जमा होने लगता है और हृदय सम्बन्धी समस्याओं का कारण बनता है। इस दौरान डॉक्टर आपको पोटैशियम बाइंडर की दवाएं दे सकते हैं, जिससे आपके शरीर में इकट्ठा पोटैशियम बाहर निकल सके। लेकिन इसके साथ ही आप अपनी डाइट में भी पोटैशियम वाली वस्तुओं की मात्रा कम करके इसको नियंत्रित कर सकते हैं। इसके लिए इन चीजों से परहेज करें -

(और पढ़ें - नींबू पानी पीने के फायदे)

क्रोनिक किडनी डिजीज में फॉस्फोरस से परहेज करें - Avoid Phosphorus-rich Food during Chronic Kidney Disease in Hindi

फॉस्फोरस एक ऐसा मिनरल है जो हमारी हड्डियों को मजबूत बनाता है, साथ ही शरीर के अन्य भागों को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है। लेकिन जब क्रोनिक किडनी डिजीज हो जाती है यानी किडनी फेल हो जाती है तो इस दौरान, किडनी शरीर में उपलब्ध एक्स्ट्रा फॉस्फोरस को रक्त से अलग नहीं कर पाती और ये स्थिति हमारी रक्तवाहिकाओं, आंख और दिल को काफी हद तक नुकसान पहुंचा सकती है। इसके लिए मीट, बीन्स, नट्स, साबूत अनाज, गहरे रंग के सॉफ्ट ड्रिंक्स जैसे कि कोक, पेप्सी, पैकेट वाले खाद्य पदार्थ आदि में फॉस्फोरस की मात्रा काफी ज्यादा होती है, अतः इनका उपयोग कम से कम करें।

(और पढ़ें - हड्डियों को मजबूत करने के लिए क्या खाएं)

किडनी फेल के दौरान कितना पानी पिएं - Water Intake during Chronic Kidney Disease in Hindi

इस बीमारी के दौरान पानी का सेवन, अलग-अलग स्टेज के अनुसार करना जरूरी होता है क्योंकि इस दौरान शरीर में पानी की अधिकता हो जाए तो शरीर में पानी के संग्रहण की स्थिति उत्पन्न हो जाती है जो शरीर के अन्य कार्यों के लिए खतरनाक स्थिति पैदा कर देता है। ऐसी परिस्थिति में पानी के सेवन का निर्धारण टोटल यूरिन आउटपुट (एस्टिमेटेड ग्लोमरुलेर फिल्ट्रेशन रेट) को ध्यान में रखकर किया जाता है। पानी की कैटिगरी में चाय, कॉफी, जूस व अन्य तरल पदार्थों को भी रखा जाता है। चूंकि आपके कुल पानी के सेवन की मात्रा आपके किडनी के रिपोर्ट (किडनी प्रोफाइल टेस्ट, माइक्रो एल्ब्यूमिन, यूरिन क्रिएटिनिन रेसियो), उम्र, वजन आदि के द्वारा ज्ञात किया जा सकता है, इसको जानने के लिए अपने नेफ्रोलॉजिस्ट या नूट्रिशनिस्ट से बात कर सकते हैं।

(और पढ़ें - किडनी को खराब करने वाली आदतें)

क्रोनिक किडनी डिजीज में सही मात्रा में प्रोटीन का सेवन करें - Eat Right Amount of Protein during Chronic Kidney Disease in Hindi

जब शरीर में यूरिया का संग्रहण हो जाता है (किडनी के अस्वस्थ होने के कारण ये स्थिति आती है),  शरीर में कई समस्याएं आने लगती हैं। कुछ प्रोटीन स्रोतों से यूरिया एवं अन्य विषाक्त पदार्थ की मात्रा शरीर में कम बनती है। इन्हें हाई बायोलॉजिकल वैल्यू प्रोटीन कहा जाता है। हाई बायोलॉजिकल वैल्यू प्रोटीन जानवरों द्वारा प्राप्त प्रोटीन स्रोतों को कहा जाता है। इन स्त्रोतों में दूध, मीट, चिकन, अंडा, मछली आदि आते हैं। ऐसी स्थिति में ज्यादातर लोग प्रोटीन लेना या तो बंद कर देते हैं या प्रोटीन की मात्रा काफी कम कर देते हैं, जो शरीर के अन्य कार्यों को भी बाधित कर देता है। क्रोनिक किडनी डिजीज के चरण के अनुसार, इस प्रकार प्रोटीन का सेवन करें-
  • जब आप डायलिसिस की स्थिति में ना हों (स्टेज 2-4) - कम प्रोटीन का सेवन- 0.8 ग्राम प्रति किलोग्राम (शरीर के वजन के अनुसार)
  • जब डायलिसिस पर हों (स्टेज 5) - 1.2-1.3 ग्राम प्रति किलोग्राम (शरीर के वजन के अनुसार)

    (और पढ़ें - ब्लड यूरिया बढ़ने का कारण)

क्रोनिक किडनी डिजीज में सही फैट खाएं - Right Fat Intake during Chronic Kidney Disease in Hindi

हर व्यक्ति को अपने वसा के उपयोग के प्रति सजग रहना चाहिए, क्योंकि खराब किस्म के या ज्यादा मात्रा में वसा, आपके शरीर की रक्त धमनियों को अवरुद्ध कर सकते हैं, जिससे हृदय रोग हो सकता है। क्रोनिक किडनी डिजीज के दौरान हार्ट अटैक और स्ट्रोक की समस्या ज्यादा देखी जाती है। ऐसे में डाइट में हेल्दी वसा का चुनाव आवश्यक है। सैचुरेटेड फैट और ट्रांस फैटी एसिड रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ा सकते हैं और रक्तवाहिकाओं को जाम कर सकते हैं। सैचुरेटेड फैट कुछ जानवरों से मिले खाद्य पदार्थों में ज्यादा होते हैं जैसे की लाल मांस, मक्खन, मलाई युक्त दूध आदि, इसके अलावा पैकेट वाले स्नैक्स आदि में भी इसकी अधिकता होती है। इसका प्रयोग कम से कम करें। रोजाना की डाइट में हेल्दी वसा का उपयोग करें, इसके लिए पौधों द्वारा उपलब्ध वसा का उपयोग कर सकते हैं जैसे कि जैतून का तेल, सूरजमुखी का तेल, कैनोला तेल आदि। इनके अलावा बादाम एवं अखरोट का भी सेवन कर सकते हैं।

(और पढ़ें - हृदय रोग से बचने के उपाय)

किडनी फेल होने पर कौन से फल खाएं - Fruits for Chronic Kidney Disease in Hindi

ज्यादातर लोग अपने एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन की आवश्यकता को फलों से ही पूरा कर पाते हैं। लेकिन इस समस्या के दौरान कुछ फलों के सेवन के परहेज के लिए कहा जाता है, ऐसे में अपने आवश्यक पोषक तत्वों को कुछ फलों का सेवन करके पूरा कर सकते हैं। ऐसे में अपनी डाइट में अंगूर, चेरी, सेब, आलूबुखारा, पपीता, ब्लूबेरी, नाशपाती का सेवन कर सकते हैं।

(और पढ़ें - सेब के सिरके के फायदे)

किडनी फेल होने पर कौन सी सब्जियां खाएं - Vegetables for Chronic Kidney Disease in Hindi

सब्जियां विटामिन, मिनरल, फाइबर एवं एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्त्रोत होती हैं जो कि शरीर को भली भांति कार्य करने में मदद करती हैं। लेकिन क्रोनिक किडनी डिजीज के दौरान, इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा को नियंत्रित करने के कारण, कुछ सब्जियों से परहेज की सलाह दी जाती है। ऐसे में कुछ सब्जियां आप बेफिक्र होकर खा सकते हैं जैसे कि फूलगोभी, बैंगन, शलजम, गाजर, भुट्टा, शिमला मिर्च, सिंघाड़ा आदि।

(और पढ़ें - गाजर के जूस के फायदे)

  • अपने लक्षणों को नियंत्रित रखें- यदि आप मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग से ग्रसित हैं, तो इन पर नियंत्रण करके अपनी किडनी की स्थिति को बिगड़ने से बचा सकते हैं। इस कारण अपनी रक्त शर्करा की नियमित जांच करें, यदि दवाओं को रिवाइज़ कराने की आवश्यकता है तो डॉक्टर से संपर्क करें। उसी प्रकार अपने ब्लड प्रेशर की भी जांच करते रहें एवं दवाओं और दिनचर्या के द्वारा नियंत्रित रखने की कोशिश करें। आप अपने पर्सनल लक्ष्य को डॉक्टर से विचार-विमर्श करके ध्यान में रखें और उसी के अनुसार, अपने पैरामीटर को डाइट, दवाओं एवं दिनचर्या के द्वारा नियंत्रित रखें। 
  • हर्बल दवाओं का सेवन ना करें- हर्बल दवाएं क्रोनिक किडनी डिजीज के दौरान सुरक्षित नहीं होतीं। इनका लम्बे समय तक प्रयोग आपकी किडनी की स्थिति को और भी बिगाड़ सकता है। इसी कारण यदि आप कोई दवा नियमित तौर पर लेना चाहते हैं तो किसी भी हर्बल दवा या सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले डॉक्टर से अवश्य परामर्श कर लें।

(और पढ़ें - डायबिटीज डाइट)

  • सुबह खाली पेट- चाय (1 कप) + भूना चना (1 मुट्ठी)
  • सुबह का नाश्ता- वेजिटेबल पोहा (1 छोटा प्लेट) + कम वसा युक्त दूध (1 कप)
  • मध्य आहार- पपीता (1 छोटी कटोरी)
  • दोपहर  का खाना- रोटी (2) + दही (1 कटोरी ) + लौकी की सब्जी (1 कटोरी)
  • शाम की चाय- चाय (1 कप ) + ग्रिल्ड पनीर (4-5 छोटे छोटे टुकड़े)/ उबला अंडा (1) 
  • रात का खाना- रोटी (2) + पनीर की सब्जी (1 कटोरी ) + गोभी की सब्जी (1 कटोरी)
  • सोते समय- बिना मलाई वाला दूध/कम वसा युक्त दूध (1 कप)

(और पढ़ें - पोहा बनाने की विधि)

Dt. Rajni Sharma

Dt. Rajni Sharma

आहार विशेषज्ञ
6 वर्षों का अनुभव

Dt. Ayushi Shah

Dt. Ayushi Shah

आहार विशेषज्ञ
2 वर्षों का अनुभव

Dr. Yogita Johar

Dr. Yogita Johar

आहार विशेषज्ञ
1 वर्षों का अनुभव

Dt. Miksha Arora

Dt. Miksha Arora

आहार विशेषज्ञ
2 वर्षों का अनुभव

और पढ़ें ...

संदर्भ

  1. Akchurin Oleh M. Chronic kidney disease and dietary measures to improve outcomes. Pediatr Clin North Am. 2019 Feb; 66(1): 247–267. PMID: 30454747.
  2. Rysz Jacek, Franczyk Beata, Ciałkowska-Rysz Aleksandra, Gluba-Brzózka Anna. The Effect of Diet on the Survival of Patients with Chronic Kidney Disease. Nutrients. 2017 May; 9(5): 495. PMID: 28505087.
  3. Ko Gang Jee, Obi Yoshitsugu, Tortoricci Amanda R., Kalantar-Zadeh Kamyar. Dietary Protein Intake and Chronic Kidney Disease. Curr Opin Clin Nutr Metab Care. 2017 Jan; 20(1): 77–85. PMID: 27801685.
  4. Clase Catherine M., Smyth Andrew. Chronic kidney disease: diet. BMJ Clin Evid. 2015; 2015: 2004. PMID: 26121377.
  5. Clegg Deborah J., Headley Samuel A., Germain Michael J. Impact of Dietary Potassium Restrictions in CKD on Clinical Outcomes: Benefits of a Plant-Based Diet. Kidney Med. 2020 Jul-Aug; 2(4): 476–487. PMID: 32775988.
  6. Natale Patrizia, Palmer Suetonia C, Ruospo Marinella, Saglimbene Valeria M, Strippoli Giovanni Fm. Potassium binders for chronic hyperkalaemia in people with chronic kidney disease. Cochrane Database Syst Rev. 2020 Jun 26;6(6):CD013165. PMID: 32588430.
  7. Carlo Garofalo et al. Dietary Salt Restriction in Chronic Kidney Disease: A Meta-Analysis of Randomized Clinical Trials. Nutrients. 2018 Jun; 10(6): 732. PMID: 29882800.
  8. National Kidney Foundation. [Internet]. New York, US. 6 Tips To Be “Water Wise” for Healthy Kidneys.
ऐप पर पढ़ें