प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती महिला में तनाव का स्तर बच्चे के मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकता है। एक नए अध्ययन के मुताबिक, गर्भवती महिलाओं में तनाव का अलग-अलग स्तर बच्चे के दिमाग के हिस्सों में अलग-अलग बदलाव होने से जुड़ा है। स्टडी की मानें तो इससे बच्चे का भावनात्मक विकास जुड़ा हुआ है। इन विशेषज्ञों ने प्रेग्नेंसी के दौरान एंग्जाइटी से संबंधित एक हार्मोन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का विश्लेषण करने के बाद यह जानकारी दी है। इस आधार पर उन्होंने सलाह दी है कि जो गर्भवती महिलाएं गर्भकाल के दौरान तनाव या स्वस्थ महसूस नहीं करती हैं, उन्हें अपनी मिडवाइफ (दाई) या सलाहकार की मदद लेनी चाहिए। उनका कहना है कि इस सपोर्ट से प्रेग्नेंसी से जुड़े हेल्थ इशूज को अच्छे से नियंत्रित किया जा सकता है।

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यह कोई नया तथ्य नहीं है कि मेटर्नल स्ट्रेस से बच्चे का व्यावहारिक विकास और भावनाओं को रेग्युलेट करने की उसकी क्षमता प्रभावित होती है। लेकिन आमतौर पर इस तरह की बातों को प्रश्नावली से समझने की कोशिश की जाती है, जो कोई विश्वसनीय तरीका नहीं है। मेडिकल पत्रिका ईलाइफ में प्रकाशित इस नए अध्ययन में पहली बार वैज्ञानिकों ने विशेष ऑब्जेक्टिव मेजर के तहत मां में कॉर्टिसोल हार्मोन के स्तर को मांप कर यह जानने की कोशिश की है कि मेटर्नल स्ट्रेस का बच्चे के मानसिक विकास पर असर पड़ता है या नहीं। यहां बता दें कि तनाव होने पर शरीर के रेस्पॉन्स करने में कॉर्टिसोल हार्मोन एक अहम भूमिका निभाता है। इसका लेवल हाई होने का मतलब है व्यक्ति उच्च स्तर के तनाव में है। इसके अलावा भ्रूण के विकास में भी कॉर्टिसोल की भूमिका अहम मानी जाती है।

स्कॉटलैंड स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के वैज्ञानिकों ने अध्ययन कर पता लगाया है कि बच्चे के विकास के दौरान मस्तिष्क के एक हिस्से एमेग्डला के विकास का कॉर्टिसोल के स्तर से संबंध है। दिमाग का यह हिस्सा बचपन में बच्चे के भावनात्मक और सामाजिक विकास में मदद करता है। तनाव होने पर इस विकास से जुड़ी क्षमता के प्रभावित होने के कारणों का पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने 78 गर्भवती महिलाओं के बालों के सैंपल लिए, यह सुनिश्चित करने के लिए पिछले तीन महीने के दौरान उनमें कॉर्टिसोल का लेवल क्या रहा था।

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वहीं, इन महिलाओं के (अजन्मे) बच्चों की मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग यानी एमआरआई के जरिये ब्रेन स्कैनिंग की गई। खबर के मुताबिक, इस प्रक्रिया में शोधकर्ताओं को पता चला है कि गर्भवती महिलाओं के बालों में कॉर्टिसोल हार्मोन के स्तर का ज्यादा होना बच्चों के एमेग्डला में ढांचागत परिवर्तन होने से जुड़ा था। साथ ही ब्रेन कनेक्शन्स में पाए गए अंतरों में भी इसकी भूमिका थी। इस जानकारी पर डॉक्टरों का कहना है कि इससे यह बताया जा सकता है कि क्यों उच्च स्तर के तनाव से ग्रस्त रही महिलाओं के बच्चे आगे चलकर भावनात्मक रूप से परेशान रह सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि अध्ययन में बच्चों में भावना से जुड़ा आंकलन नहीं किया गया है।

वहीं, अध्ययन से जुड़े अध्ययनकर्ता और यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के शोधकर्ता जेम्स बोर्डमैन कहते हैं, 'हमारे अध्ययन के परिणाम उन महिलाओं की पहचान कर उनका सपोर्ट करने को कहते हैं, जिन्हें (स्ट्रेस के चलते) प्रेग्नेंसी के दौरान अतिरिक्त मदद की जरूरत पड़ती है। इससे बच्चों में स्वस्थ मानसिक विकास को प्रभावी रूप से बढ़ाने में मदद मिल सकती है।' वहीं, अध्ययन को आर्थिक मदद देने वाली एक अंतरराष्ट्रीय बाल संस्था देयरवर्ल्ड की प्रमुख सारा ब्राउन ने कहा, 'यह अध्ययन इस बात को रेखांकित करता है कि गर्भावस्था के समय महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना कितना जरूरी है ताकि उनकी तमाम जरूरतों को पूरा किया जा सके और उनके बच्चों का जीवन सबसे अच्छे रूप में प्रारंभ हो सके। मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए मांओं के तनाव को कम करना एक जरूरी कदम है।'

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