साइनसोटमी एक सर्जिकल प्रोसीजर है, जिसे साइनस के रोगों का इलाज करने के लिए किया जाता है। साइनस को मेडिकल भाषा में “पैरानेजल साइनस” भी कहा जाता है, यह नाक की गुहा के पास एक थैली-नुमा संरचना (गुहा) होती है। ये गुहाएं बलगम का स्राव करती हैं, जो पतले रास्तों से होते हुए नाक के माध्यम से बाहर निकल जाता है। बलगम नाक को साफ और बैक्टीरिया मुक्त रखने में मदद करता है। हालांकि, साइनस के ऊतकों में सूजन व लालिमा (साइनसाइटिस) होना या साइनस में द्रव जमा हो जाना आदि स्थितियों में यह गुहा प्रभावित हो जाती हैं, जिससे नाक बंद होना और बुखार जैसी स्वास्थ्य समस्याएं होने लगती हैं।

साइनसोटमी को साइनस में मौजूद द्रवों को निकालने के लिए किया जा सकता है, ताकि साइनस की सूजन को कम किया जा सके। साइनसोटमी करने से पहले डॉक्टर यह सुनिश्चित करते हैं कि आपको साइनस है या नहीं, जिसके लिए कुछ डायग्नोस्टिक टेस्ट किए जाते हैं। यदि आप कुछ विशेष दवाएं लेते हैं, तो डॉक्टर साइनसोटमी सर्जरी से पहले आपको कुछ दवाएं छोड़ने की सलाह दे सकते हैं। सर्जरी शुरू करने से पहले आपको लोकल या जनरल एनेस्थीसिया दी जाती है, जिससे आपको सर्जरी के दौरान कोई दर्द या तकलीफ महसूस नहीं होती है। सर्जरी होने के एक हफ्ते बाद आपको फिर से अस्पताल बुलाया जा सकता है, जिस दौरान आपके स्वास्थ्य और सर्जरी के घावों की जांच की जाती है।

(और पढ़ें - साइनस के घरेलू उपाय)

  1. साइनस का ऑपरेशन क्या है - What is Sinusotomy in Hindi
  2. साइनस का ऑपरेशन क्यों किया जाता है - Why is Sinusotomy done in Hindi
  3. साइनस के ऑपरेशन से पहले - Before Sinusotomy in Hindi
  4. साइनस के ऑपरेशन के दौरान - During Sinusotomy in Hindi
  5. साइनस के ऑपरेशन के बाद - After Sinusotomy in Hindi
  6. साइनस का ऑपरेशन से होने वाली जटिलताएं - Complications of Sinusotomy in Hindi
  7. साइनसोटमी के डॉक्टर

साइनसोटमी किसे कहते हैं?

साइनसोटमी एक सर्जरी प्रक्रिया है, जिसकी मदद से साइनस संबंधी विभिन्न प्रकार के रोगों का इलाज किया जाता है। साइनस नाक के दोनों तरफ बनी एक थैलीनुमा संरचना (कैविटी) है, जिसके भागों को निम्न के नाम से जाना जाता है -

  • फ्रंटल साइनस - आंखों के ऊपर, आईब्रो के पास
  • मैक्सिलरी साइनस - आंखों के नीचे
  • एथोमोइडल साइनस - आंखों के बीच में
  • स्फेनोइडल साइनस - आंखों के पीछे

साइनस कैविटी का मुख्य रूप से फ्रंटल भाग म्यूकस बनाने में मदद करता है। म्यूकस को हिंदी भाषा में श्लेष्म कहा जाता है, जो एक प्रकार का बलगम होता है और नाक को अंदर से नम रखने में मदद करता है। तरल म्यूकस आमतौर पर नाक के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाता है। यह पूरी कार्य प्रणाली नाक को साफ और संक्रमण मुक्त रखने के लिए होती है। आमतौर पर साइनस की कैविटी में हवा भरी होती है। हालांकि, कुछ स्थितियों में हवा साइनस के अंदर फंस जाती है और म्यूकस के कारण बाहर नहीं आ पाती है, जिसके परिणामस्वरूप बैक्टीरिया पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, हवा अंदर फंसने से साइनस की परतों में सूजन और लालिमा होने लगती है, जिस स्थिति को साइनसाइटिस कहा जाता है। साइनसाइटिस दो प्रकार का होता है, जिनमें एक अचानक से (एक्यूट साइनोसाइटिस) और दूसरा धीरे-धीरे (क्रोनिक साइनोसाइटिस) होता है। (और पढ़ें - सूजन कम करने के तरीके)

साइनोसाइटिस का इलाज करने के लिए डॉक्टर आमतौर पर एंटीबायोटिक व नाक साफ करने वाली (डिकंजेस्टेंट) दवाएं  देते हैं। यदि किसी कारण से एंटीबायोटिक दवाओं से साइनसाइटिस ठीक नहीं हो पा रहा है या फिर स्थिति निरंतर गंभीर होती जा रही है, तो साइनसोटमी सर्जरी की जा सकती है।

इस सर्जरी के दौरान सर्जन या तो पूरी फ्रंटल साइनस फ्लोर या फिर उसके कुछ कक्षों को हटा देते हैं।

(और पढ़ें - कफ निकालने के घरेलू उपाय)

साइनसोटमी क्यों की जाती है?

यदि आपको निम्न में से कोई भी शारीरिक समस्या महसूस हो रही है, तो डॉक्टर यह सर्जरी करवाने की सलाह दे सकते हैं -

  • क्रोनिक राइनोसाइनसाइटिस - नाक की गुहा में मौजूद श्लेष्मिक परत में सूजन होना, जिस कारण से लंबे समय से लक्षण होना।
  • सेरिब्रोस्पाइनल द्रव (CSF) में रिसाव होना - मस्तिष्क और रीढ़ में पाया जाने वाला एक रंगहीन द्रव, जो इन अंगों पर दबाव पड़ने से बचाता है और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है। सीएसएफ से रिसाव होने से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।
  • एक्यूट साइनसाइटिस - श्लेष्मिक परत में अचानक से सूजन आ जाना
  • म्यूकोसील - साइनस के अंदर किसी हिस्से में सूजन होना और साथ ही द्रव भर जाना
  • ट्यूमर - साइनस में ट्यूमर होना (और पढ़ें - ट्यूमर और कैंसर में क्या अंतर है)

साइनसाइटिस में आमतौर पर निम्न लक्षण देखे जा सकते हैं -

साइनसोटमी सर्जरी किसे नहीं करवानी चाहिए?

यदि आपको निम्न में से कोई भी समस्या महसूस हो रही है, तो डॉक्टर साइनसोटमी सर्जरी करने से मना कर सकते हैं -

  • फ्रंटल साइनस मौजूद न होना या फिर उसका कुछ हिस्सा बना हुआ न होना, जिसे एप्लास्टिक फ्रंटल साइनस कहा जाता है।
  • साइनस में मौजूद हड्डी में कोई विकृति होना या हड्डी का विभाजन होना
  • हड्डी में संक्रमण होने के कारण माथे में सूजन आना, जिससे पोट्स पफी ट्यूमर भी कहा जाता है।
  • खोपड़ी में कोई हड्डी बढ़ जाना या फिर ट्यूमर हो जाना, जिसे लार्ज ओस्टियोमस के नाम से जाना जाता है। 
  • फ्रंटल साइनस की तरफ के ऊतक क्षतिग्रस्त होना
  • पहले कभी सेरिब्रोस्पाइनल द्रव का रिसाव हुआ होना

(और पढ़ें - नाक की हड्डी बढ़ने का कारण)

साइनसोटमी से पहले की तैयारी कैसे करें?

साइनसोटमी सर्जरी करवाने से पहले आपको निम्न तैयारियां करने की आवश्यकता पड़ सकती है -

  • डॉक्टर आपकी स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी लेंगे और साथ ही आपका शारीरिक परीक्षण करेंगे, जिनकी मदद से उन्हें स्वास्थ्य संबंधी काफी जानकारी प्राप्त हो जाती है। साथ ही आपको कुछ विशेष टेस्ट करवाने के लिए भी कहा जा सकता है, जैसे सीटी स्कैन, एमआरआई स्कैन, छाती का एक्स रे और इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम आदि। परीक्षण के दौरान आपको कुछ प्रकार के ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह भी दी जा सकती है।
  • यदि आपने हाल में कोई दवा खाई थी या फिर वर्तमान में भी कोई दवा का सेवन कर रहे हैं, तो उस बारे में डॉक्टर को पूरी जानकारी दें। इसके अलावा यदि आप कोई हर्बल उत्पाद, विटामिन, मिनरल या अन्य कोई सप्लीमेंट ले रहे हैं तो डॉक्टर को इस बारे में बता दें।
  • यदि आप रक्त को पतला करने वाली दवाएं लेते हैं, जैसे एस्पिरिन या आइबूप्रोफेन आदि को डॉक्टर उन्हें कुछ समय तक न लेने की सलाह दे सकते हैं। क्योंकि रक्त पतला होने पर सर्जरी के दौरान अधिक रक्तस्राव होने का खतरा रहता है।
  • सर्जरी शुरू करने से पहले डॉक्टर आपको एंटीबायोटिक व अन्य कुछ प्रकार की दवाएं दे सकते हैं।
  • यदि आपको हाल ही में संक्रमण हुआ है या अब भी संक्रमण के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर को इस बारे में बता दें। ऐसा इसलिए क्योंकि संक्रमण के मामलों में सर्जरी को कुछ दिन के लिए टाला जा सकता है।
  • आपको सर्जरी करवाने के लिए खाली पेट अस्पताल आने की सलाह दी जाती है। खाली पेट रखने के लिए आपको सर्जरी वाले दिन से रात के बाद कुछ भी न खाने की सलाह दी जा सकती है। यदि आप किसी कारण से भूखे नहीं रह सकते हैं, तो डॉक्टर को इस बारे में बता दें।
  • सर्जरी शुरू होने से एक या दो घंटे पहले आपको एक विशेष दवा दी जाती है, जिसको स्प्रे की मदद से नाक में डाला जाता है।
  • सर्जरी से तीन हफ्ते पहले ही डॉक्टर आपको धूम्रपानशराब का सेवन न करने की सलाह दे सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि सिगरेट व शराब आदि पीने से सर्जरी के बाद स्वस्थ होने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है और साथ ही अन्य स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं भी विकसित हो जाती हैं। (और पढ़ें - सिगरेट पीना कैसे छोड़े)
  • अपने साथ किसी मित्र या सगे संबंधी को लाने की सलाह दी जाती है, ताकि सर्जरी के बाद वे आपको घर ले जा सकें।
  • सर्जरी से पहले आपको एक सहमति पत्र दिया जाएगा, जिस पर हस्ताक्षर करके आप सर्जन को सर्जरी करने की अनुमति दे देते हैं।

(और पढ़ें - शराब की लत से छुटकारा कैसे पाएं)

साइनसोटमी कैसे की जाती है?

अस्पताल में भर्ती हो जाने के बाद आपको एक विशेष अस्पताल ड्रेस पहनने के लिए दी जाएगी। आपको ऑपरेशन थिएटर में ले जाकर एक टेबल पर पीठ के बल लिटा दिया जाएगा और आपकी नस में सुई लगाकर (इंट्रावेनस) दवा की बोतल शुरू कर दी जाएगी। आपको लोकल या जनरल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन दिया जाएगा। जनरल एनेस्थीसिया की मदद से आप गहरी नींद में सो जाएंगे और सर्जरी के दौरान आपको कुछ महसूस नहीं होगा। लोकल एनेस्थीसिया की मदद से शरीर के उस हिस्से को सुन्न कर दिया जाएगा, जिसकी सर्जरी की जानी है। (और पढ़ें - यूरेटेरोस्कोपी कैसे होता है)

साइनसोटमी सर्जरी को दो अलग-अलग तरीकों से किया जा सकता है, जिन्हें एक्सटर्नल साइनसोटमी और एंडोस्कोपिक साइनसोटमी के नाम से जाना जाता है। इन सर्जिकल प्रक्रियाओं के करने के तरीकों के बारे में नीचे बताया गया है -

एक्सटर्नल साइनसोटमी -

इसे ओपन साइनसोटमी भी कहा जा सकता है। एक्सटर्नल साइनसोटमी को करने के लिए सर्जन कई अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, जैसे ट्रेफिनेशन और फ्रंटल साइनस ऑब्लिटेरेशन।

ट्रेफिनेशन प्रोसीजर को निम्न तरीके से किया जाता है -

  • सर्जन आपकी भौं (आइब्रो) के ऊपर एक चीरा लगाएंगे.
  • इसके बाद विशेष उपकरणों की मदद से साइनस गुहा तक पहुंच कर उसमें छिद्र बनाया जाएगा और जमा हुए द्रव को निकाल दिया जाएगा।
  • इसके बाद छिद्र में से एक ट्यूब लगा दी जाती है, ताकि बचे हुए द्रव को सर्जरी के बाद निकाला जा सके।
  • ट्यूब लगने के बाद चीरे वाले स्थान को टांके लगाकर बंद कर दिया जाता है और ट्यूब को भी टांकों की मदद से स्थिर बना दिया जाता है। हालांकि, जब आपकी नाक के माध्यम से ही पर्याप्त रूप से साइनस के द्रव निकलने लग जाएं, तो ट्यूब को निकाल दिया जाता है।

फ्रंटल साइनस ऑब्लिटेरेशन प्रोसीजर को निम्न तरीके से किया जाता है -

  • इसमें सर्जन सिर के सामने वाले हिस्से में एक चीरा लगाते हैं, जिसे कोरोनल चीरा कहा जाता है।
  • इसके बाद विशेष नुकिले उपकरणों की मदद से साइनस तक पहुंचा जाता है और साइनस के प्रभावित ऊतकों को काटकर निकाल दिया जाता है।
  • सर्जन नाक के माध्यम से ही साइनस में फंसे हुए द्रव को निकाल देते हैं और फिर उसकी जगह नरम ऊतक भर देते हैं।
  • साइनस के आस-पास की हड्डी में एक विशेष तार या प्लेट लगा दी जाती है और फिर टांकों की मदद से चीरे को बंद कर दिया जाता है।

एंडोस्कोपिक साइनसोटमी -

इस प्रक्रिया में नाक के अंदरूनी हिस्से की जांच करने के लिए एंडोस्कोप नामक उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है। इस सर्जरी को करने के लिए निम्न स्टेप किए जा सकते हैं -

  • सर्जन सबसे पहले नाक के माध्यम से साइनस में एंडोस्कोप उपकरण डालते हैं
  • धीरे-धीरे करके एंडोस्कोप को क्षतिग्रस्त भाग तक पहुंचाया जाता है और फिर उस हिस्से (बढ़ी हुई हड्डी या क्षतिग्रस्त ऊतक) को काटकर हटा दिया जाता है।
  • साइनस में कैथेटर लगा दिया जाता है, ताकि साइनस में फंसने वाला द्रव समय-समय पर निकलने लगे।
  • कैथेटर की मदद से साइनस में एंटीबायोटिक दवाएं भी डाली जाती हैं, ताकि संक्रमण होने से बचाव किया जा सके
  • इस प्रक्रिया को पूरा होने में 30 से 90 मिनट का समय लगता है।
  • जब आप नाक से साइनस के द्रव निकालना शुरू कर देते हैं, तो कैथेटर को निकाल दिया जाता है।
  • सर्जरी के बाद आपको एक दिन के लिए अस्पताल में भर्ती रहना पड़ सकता है।

(और पढ़ें - एंडोस्कोपी क्या है)

साइनसोटमी के बाद की तैयारी

सर्जरी के बाद आपको घर पर निम्न तरीकों से अपनी देखभाल करने की सलाह दी जाती है -

दवाएं -

  • सर्जरी के बाद डॉक्टर कम से कम पांच दिनों के लिए आपको एंटीबायोटिक दवाएं देंगे, जो बैक्टीरियल इन्फेक्शन से बचाती हैं।
  • दर्द को कम करने के लिए भी आपको पेन-किलर दवाएं दी जा सकती हैं।
  • सर्जरी के बाद आपको 7 से 10 दिनों तक ब्लड थिनर दवाएं (जैसे एस्पिरिन) न लेने की सलाह दी जाती है।
  • डॉक्टर आपको रोजाना दो बार अपनी नाक धोने की सलाह देते हैं। डॉक्टर नाक धोने का सही तरीका भी आपको सिखा सकते हैं।

गतिविधियां -

  • सर्जरी के बाद कम से कम दस दिनों तक आपको कोई भी भारी वस्तु उठाने से मना किया जाता है।
  • साथ ही आगे की ओर झुकना, जोर लगाना या अधिक मेहनत वाली कोई शारीरिक गतिविधि करने से भी मना किया जाता है।
  • डॉक्टर आपको छींक या खांसी को रोकने की बजाय मुंह से छींकने व खांसने का सुझाव देते हैं।
  • आपको नाक में उंगली या अन्य कोई वस्तु डालने से भी मना किया जाता है।

यात्राएं -

  • आपको सर्जरी के बाद तीन से पांच दिनों तक कोई भी यात्रा करने से मना किया जाता है। हालांकि, यदि आपको आपात स्थिति में कहीं जाना है, तो डॉक्टर से इस बारे में बात कर लेनी चाहिए।

यदि आपको सर्जरी के बाद निम्न में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो डॉक्टर से इस बारे में बात कर लेनी चाहिए -

(और पढ़ें - नाक से खून आने पर क्या करें)

साइनसोटमी से क्या जोखिम होते हैं?

साइनसोटमी से कुछ जोखिम व जटिलताएं हो सकती हैं, जैसे -

(और पढ़ें - होठों की सूजन का इलाज)

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