प्रेगनेंसी के बाद बॉडी को वापस शेप में लाने के लिए क्या करें?

by Priyanka Chopra


Posted on May 27, 2017 कई बार आवाज़ आने में कुछ क्षण का विलम्ब हो सकता है!


प्रेगनेंसी के बाद बॉडी को वापस शेप में लाने के लिए क्या करें?

जब लोग आपको बताते हैं कि मां बनने के बाद चीजें एक जैसी नहीं होती हैं, तो उनका मतलब केवल आपके जीवन में आने वाले बदलाव से ही नहीं होता है बल्कि उन शारीरिक परिवर्तनों से भी होता है जो मातृत्व का एक हिस्सा हैं।

माँ बनना बहुत ही सुखद अनुभव होता है लेकिन अक्सर माँ बनने के बाद हमें एहसास होता है की हमारा शरीर पहले के जैसा नहीं रहा है। कुछ महिलाओं को लगता है कि वो पहले की तरह अपने शरीर को शेप में नहीं ला सकती हैं लेकिन ये सच नहीं है।  यहाँ गर्भावस्था के बाद शरीर में हुए शारीरिक परिवर्तनों से निपटने के लिए कुछ एक्सरसाइज बताई गई हैं जिनसे आप अपनी बॉडी को पहले जैसी शेप में ला सकती है –

  1. डिलीवरी के बाद वजन बढ़ना – Weight Gain After Delivery in Hindi
  2. गर्भावस्था के बाद लिगामेंट्स का कमजोर होना – Loose Ligaments after Pregnancy in Hindi
  3. डिलीवरी के बाद यूरिन कंट्रोल न कर पाना – Lack of Bladder Control after Pregnancy in Hindi
  4. प्रेगनेंसी के बाद पेट के आकार में वृद्धि होना – Belly Size Increase after Pregnancy in Hindi
  5. प्रसव के बाद स्तनों का लटकना – Sagging Breasts After Pregnancy in Hindi

1. डिलीवरी के बाद वजन बढ़ना – Weight Gain After Delivery in Hindi

अपने बच्चे के आगमन के साथ, आप अपने मातृत्व प्रयासों में इतनी व्यस्त हो सकते हैं कि आपको पहले जैसे आकार में वापस आना एक सपने की तरह लग सकता है। कई आयुर्वेदिक डॉक्टरों के अनुसार, प्राकृतिक प्रसव के 2-3 महीने और सीजेरियन सेक्शन के 4 महीने बाद व्यायाम करना सबसे अच्छा होता है।
व्यायाम और अन्य वजन कम करने की गतिविधियों में जल्दी करने से स्तनपान के उत्पादन में कमी
और कमजोर लिगमेंट , कम प्रतिरक्षा और कमजोर स्नायुबंधन (लिगमेंट) के कारण गर्भाशय के विस्तार की संभावना बढ़ जाती है 40 की उम्र के बाद।

समाधान  प्रसव के 3-4 महीने बाद, आप अपने चिकित्सक की सलाह के आधार पर वाकिंग और केगेल एक्सरसाइज की तरह कम तीव्रता वाले व्यायाम से शुरू कर सकते हैं। इन एक्सरसाइज से आपकी रिकवरी में तेजी आएगी और साथ ही आपके गर्भावस्था की वजह से बढ़े हुये वजन कम करने के लिए काम आएगा। एक पूर्ण विकसित व्यायाम शुरू करने से पहले महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपने शरीर की सुनें; एक हैवी एक्सरसाइज की प्लानिंग करने से पहले यह देखे की आप पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं या नहीं। हालांकि वापिस पहले जैसे आकार में आना महत्वपूर्ण है लेकिन यह भी महत्वपूर्ण है कि आप अपने शरीर का ख्याल रखें। (और पढ़ें – कैसे प्रेग्नेन्सी के बाद अपना वजन घटा रही हैं करीना कपूर खान)

2. गर्भावस्था के बाद लिगामेंट्स का कमजोर होना – Loose Ligaments after Pregnancy in Hindi

यहा एक कारण है कि क्यों डॉक्टर गर्भावस्था के दौरान और बाद में महिलाओं को उनके मूवमेंट्स को लेकर सावधान रहने के लिए कहते हैं। गर्भावस्था के दौरान आराम हार्मोन की गतिविधि बढ़ जाती है और प्रसव के कुछ हफ्तों के बाद भी जारी रहती है। यह हार्मोन श्रोणि (पेल्विस) की मांसपेशियों को चौड़ा करने और स्नायुबंधन को कमजोर करने के लिए जिम्मेदार होते हैं जिससे बच्चे के जन्म के समय सहायता मिलती है।

समाधान – अत्यधिक स्ट्रेचिंग या इंटेंस कार्डियो वर्कआउट्स का अभ्यास करना इस समस्या को खराब कर सकता है। अपने गर्भावस्था और प्रसवोत्तर अवधि के दौरान स्ट्रेंग्थेनिंग एक्सरसाइज का अभ्यास करना इस समस्या से राहत पाने का सबसे अच्छा उपाय है। आप अपने कूल्हों और श्रोणि के जोड़ों को स्थिर करने के लिए स्टेबिलाइजेशन बेल्ट की मदद भी ले सकते हैं। यदि आप पेट की मांसपेशियों को अलग-अलग अनुभव करते हैं तो नियमित पेल्विक फ्लोर व्यायाम, जेंटल स्ट्रेचेस और डीप स्टमक मसल्स एक्सरसाइज के अभ्यास से आपको मदद मिलेगी। आपको गर्भावस्था के बाद भी एक अच्छा पोस्चर बनाए रखना चाहिए।

3. डिलीवरी के बाद यूरिन कंट्रोल न कर पाना – Lack of Bladder Control after Pregnancy in Hindi

आश्चर्यचकित न हों यदि प्रसव के बाद भी कुछ हफ्तों तक आपको बार बार पेशाब जान का अनुभव होता है खशकर तब, जब आप हँस, कसरत या छींक रहे होते हैं। गर्भावस्था के दौरान पैल्विक फ्लोर मसल्स पर शिशु के वजन के साथ-साथ आराम हार्मोन और प्रोजेस्टेरोन की गतिविधि इसका मुख्य कारण है। आमतौर इस कंडीशन को ठीक होने में कुछ हफ्तों से लेकर एक वर्ष तक का समय लग जाता है।

समाधान – पैल्विक फ्लोर मसल्स एक्सरसाइज के अभ्यास से आपको मूत्राशय, योनि और पीठ के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद मिलेगी। ये अभ्यास रिसाव (असंयम) की घटनाओं को कम करने में मदद करते हैं और गर्भाशय (प्रोलाप्ज) के शिथिलता को कम करते हैं। (और पढ़ें – गर्भाधान का प्रारंभिक लक्षण है बार बार पेशाब जाना)

4. प्रेगनेंसी के बाद पेट के आकार में वृद्धि होना – Belly Size Increase after Pregnancy in Hindi

पेट आपके शरीर का वह हिस्सा है जो गर्भावस्था से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। जब एक बार आपका फ्लैट और तना हुआ पेट खराब हो जाता है तो गर्भावस्था के दौरान और बाद के कुछ महीनों तक ऐसा ही रह सकता है। गर्भाशय को अपने मूल आकार में आने के लिए छह सप्ताह लगते हैं जो आपके पेट के आकार को कम करने में मदद कर सकते हैं।

समाधान – गहरी साँस लेने वाली पेट की एक्सरसाइज का अभ्यास करें जो आपके पेट की मांसपेशियों को टोन रखने में मदद करेगी। डिलीवरी के 3-4 महीने के बाद एब्डोमिनल क्रंच का विकल्प चुनें। इसे डिलीवरी के पहले 3 महीनों के भीतर करने से बचें, क्योंकि इससे पेट की मांसपेशियों के बीच की गैप बढ़ सकता है। (और पढ़ें – प्रेगनेंसी के बाद पेट कम करने का अचूक उपाय)

5. प्रसव के बाद स्तनों का लटकना – Sagging Breasts After Pregnancy in Hindi

हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण स्तनपान कराते समय आपको एक अन्य सामान्य शरीर परिवर्तन का अनुभव हो सकता है जो स्तनों के विस्तार और शिथिलता को बढ़ाता है।

समाधान – पुश-अप, चेस्ट प्रेस और चेस्ट फ्लाइज जैसे व्यायाम स्तनों के चारों ओर की मांसपेशियों को टोन करने में मदद करते हैं और उन्हें लिफ्ट करते हैं। लेकिन इन एक्सरसाइज की कोशिश करने से पहले अपने डॉक्टर से जांच लें। (और पढ़ें – स्तनों को कसने का उपाय है यह चमत्कारी लोशन)

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