शीतकारी प्राणायाम करने का तरीका और फायदे – Sheetkari Pranayama (Hissing Breath) steps and benefits in Hindi

by Editorial Team


Posted on August 25, 2017 कई बार आवाज़ आने में कुछ क्षण का विलम्ब हो सकता है!


शीतकारी प्राणायाम करने का तरीका और फायदे – Sheetkari Pranayama (Hissing Breath) steps and benefits in Hindi

शीतकारी प्राणायाम आपके तन और मन को ठंडक पहुँचाता है। इसका प्रभाव शीतली प्राणायाम के काफ़ी सामान्य होता है, किंतु दोनो प्राणायाम अलग हैं और अपनी ज़रूरत अनुसार किए जाने चाहिए। शीतली प्राणायाम की तरह ही शीतकारी प्राणायाम के बारे में प्राचीन पाठ "हठ योग प्रदीपिका" में लिखा गया है।

  1. शीतकारी प्राणायाम के फायदे – Benefits of Sheetkari Pranayama (Hissing Breath)
  2. शीतकारी प्राणायाम करने से पहले यह आसन करें – Preparatory poses for Sheetkari Pranayama (Hissing Breath)
  3. शीतकारी प्राणायाम करने का तरीका – Steps to do Sheetkari Pranayama (Hissing Breath)
  4. शीतकारी प्राणायाम का वीडियो – Video in Hindi on how to do Sheetkari Pranayama (Hissing Breath)
  5. शीतकारी प्राणायाम करने में क्या सावधानी बरती जाए – Precautions to take when doing Sheetkari Pranayama (Hissing Breath)
  6. शीतकारी प्राणायाम करने के बाद आसन – Follow up poses for Sheetkari Pranayama (Hissing Breath)

शीतकारी प्राणायाम के फायदे – Benefits of Sheetkari Pranayama (Hissing Breath)

शीतकारी प्राणायाम के लाभ इस प्रकार हैं:

  1. यह तन और मन को शीतल कर देता है।
  2. शीतकारी प्राणायाम मस्तिष्क के उन केंद्रों को प्रभावित करता है जो शारीरिक तापमान को केंद्रित करते हैं।
  3. यह सारे शरीर में प्राण-प्रवाह को आसान बनाता है।
  4. शीतकारी प्राणायाम सारे शरीर की मांसपेशियों को आराम पहुँचाता है।
  5. यह प्राणायाम दिमाग़ और संपूर्ण शरीर को शांत करता है, इसलिए अगर इसे सोने से पहले करें तो यह सुखद नींद पाने में मदद करता है।
  6. शीतकारी प्राणायाम करने से प्यास और भूख पर काबू बढ़ता है।
  7. इसका नियमित अभ्यास रक्तचाप को कम कर सकता है।
  8. दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखता है शीतकारी प्राणायाम।

शीतकारी प्राणायाम करने से पहले यह आसन करें – Preparatory poses for Sheetkari Pranayama (Hissing Breath)

शीतकारी प्राणायाम शरीर को ठंडक पहुँचाता है। इसलिए इसे आसन और किसी भी अन्य प्राणायाम अभ्यास के बाद कना चाहिए।

शीतकारी प्राणायाम करने का तरीका – Steps to do Sheetkari Pranayama (Hissing Breath)

शीतकारी प्राणायाम करने का तरीका इस प्रकार है:

  1. किसी भी सुविधाजनक ध्यान करने की मुद्रा में बैठें। आँखें बंद करें और सारे शरीर को रिलेक्स करें। हाथों को चिन या ज्ञान मुद्रा में घुटनों पर रख सकते हैं।
  2. दांतों को हल्के से जोड़ें, पर होंठ अलग रखें ताकि अगर कोई सामने खड़ा हो तो उसे आपके दाँत दिखाई दें।
  3. जीभ को फ्लैट रख सकते हैं या मोड़ कर मूह के उपरी हिस्से पर टिका कर रख सकता है।
  4. दांतों के माध्यम से धीमे से और गहराई से साँस लें।
  5. जब साँस अंदर ले लें, तो मुंह को बंद कर लें। जीभ को वैसे ही रखें जैसे शुरू में थी।
  6. एक नियंत्रित तरीके से नाक से धीरे-धीरे साँस छोड़ें।
  7. यह एक चक्र है। 9 चक्र करें।

शीतकारी प्राणायाम का वीडियो – Video in Hindi on how to do Sheetkari Pranayama (Hissing Breath)

शीतकारी प्राणायाम करने की विधि आप इस वीडियो में बाबा रामदेव से सीख सकते हैं:

शीतकारी प्राणायाम करने में क्या सावधानी बरती जाए – Precautions to take when doing Sheetkari Pranayama (Hissing Breath)

  1. यदि आपके संवेदनशील दाँत हों, दाँत कम हों या दाँत ना हों तो शीतकारी प्राणायाम के बजाय शीतली प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए।
  2. निम्न रक्तचाप या कोई भी साँस से संबंधित बीमारी हो तो शीतकारी प्राणायाम का अभ्यास ना करें।
  3. अगर आपको हृदय रोग हो, तो इस प्राणायाम के अभ्यास में साँस ना रोकें।
  4. अगर आपको पुरानी कब्ज की शिकायत हो तो शीतकारी प्राणायाम ना करें।
  5. सामान्य रूप से, इस प्राणायाम को सर्दियों में या ठंडे वातावरण में ना करें।

शीतकारी प्राणायाम करने के बाद आसन – Follow up poses for Sheetkari Pranayama (Hissing Breath)

शीतकारी प्राणायाम करने के बाद आप शवासन करें।

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