पीठ दर्द एक आम स्वास्थ्य समस्या है, जो ज्यादातर लोग अपने जीवन के विभिन्न चरणों में अनुभव करते हैं. अनुचित मुद्रा, शारीरिक गतिविधि की कमी और अधिक वजन होने से यह समस्या बढ़ सकती है. धीरे-धीरे यह समस्या गंभीर रूप में परिवर्तित हो सकती है.

आयुर्वेद में पीठ दर्द की समस्या को दूर करने के लिए कई तरह के उपचार दिए जाते हैं. इन उपचारों में कटी बस्ती आयुर्वेदिक थेरेपीज सबसे प्रभावी उपचारों में से एक है. यह थेरेपी विशेष रूप से पीठ दर्द की परेशानी को दूर करने के लिए दी जाती है. कटी बस्ती पंचकर्म चिकित्सा का एक हिस्सा है, जो शरीर को शुद्ध करने के साथ-साथ फिर से जीवंत करता है.

इतना ही नहीं, कटी बस्ती थेरेपी के जरिए वात दोष को दूर करने की कोशिश की जाती है, जिसके लिए गर्म तेल का इस्तेमाल किया जाता है. इसे लंबोसैकरल थेरेपी का नाम दिया गया है. इसके जरिए पीठ में सूजन, जकड़न और दर्द का इलाज करने में मदद मिलती है.

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इस लेख में कटी बस्ती का अर्थ, कारण, प्रक्रिया, फायदे, नुकसान, सावधानियां व कीमत के बारे में विस्तार से जानेंगे-

  1. क्या है कटी बस्ती थेरेपी?
  2. कटी बस्ती की प्रक्रिया
  3. कटी बस्ती के लाभ
  4. कटी बस्ती से होने वाले नुकसान
  5. कटी बस्ती में सावधानी
  6. कटी बस्ती की कीमत
  7. सारांश
कटी बस्ती के डॉक्टर

कटि का अर्थ है "पीठ का निचला हिस्सा" और वस्ति का अर्थ है "प्रतिधारण". कटी बस्ती पीठ के क्षेत्र में सूजन, जकड़न और दर्द का इलाज करने में मदद करने के लिए दी जाती है.

यह थेरेपी शरीर को शुद्ध और फिर से जीवंत करने में आपकी मदद कर सकती है. यह वात दोष को शांत करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपी है. वस्ति एक रिंग के आकार के रूप को कहा जाता है, जिसे अनाज से बनाया होता है. इस प्रक्रिया में वस्ति को प्रभावित क्षेत्र पर रखा जाता है और फिर उसमें गर्म औषधीय तेल डाला जाता है.

त्वचा धीरे-धीरे तेल को सोख लेती है और 30 से 40 मिनट के बाद रिंग को हटा दिया जाता है और बचे हुए तेल से प्रभावित हिस्से की मालिश की जाती है. इस आयुर्वेदिक थेरेपी से न सिर्फ आपको दर्द से राहत मिलती है, बल्कि सख्त मांसपेशियां में भी रक्त का संचार बेहतर तरीके से होता है. वस्ति विभिन्न प्रकार की होती है. जैसे -

  • कटी बस्ती (पीठ का निचला हिस्सा)
  • ग्रीवा वस्ति (गर्दन का क्षेत्र)
  • जानू वस्ति (घुटना)
  • मेरुदंडा वस्ति (रीढ़ का क्षेत्र)
  • नाभि वस्ति (नाभि क्षेत्र) 
  • उरो वस्ति (छाती क्षेत्र)

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आयुर्वेद के अनुसार कटी बस्ती को करने की प्रक्रिया निम्न प्रकार से है-

  • कटी बस्ती प्रक्रिया में सबसे पहले काले चने के आटे को अच्छे से गाढ़ा गूंथ लिया जाता है.
  • इसके बाद रोगी को पेट के बल लेटने के लिए कहा जाता है. फिर चने के आटे से पीठ के चारों ओर एक घेरा बना दिया जाता है.
  • अब इस रिंग में औषधि युक्त गर्म तेल धीरे-धीरे डाला जाता है. जड़ी-बूटियों से भरपूर तेल को तेजी से नहीं डाला जाता है, वरना इससे घेरा ढह सकता है.
  • इस थेरेपी से तेल में मौजूद औषधीय गुण शरीर के टिशूज तक पहुंच जाते हैं, जिससे आपकी समस्या को दूर हो सकती है.

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कटी वस्ति का उपयोग करने से निम्न प्रकार के स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं-

  • कटि वस्ति थेरेपी के दौरान उपयोग किए जाने वाले हर्बल तेल मांसपेशियों को गहराई से पोषण और मजबूती देने में मदद करते हैं.
  • इस थेरेपी से जोड़ों को लचीलापन और दर्द दूर हो सकता है. ऐसे में अगर आपको जोड़ों में किसी तरह की समस्या है, तो आप इस थेरेपी को ले सकते हैं. 
  • यह थेरेपी लंबर स्पॉन्डिलाइटिस, इंटरवर्टेब्रल डिस्क प्रोलैप्स, लूम्बेगो या लोबर पीठ दर्द जैसी समस्याओं को दूर करने में प्रभावी हो सकती है. 
  • कटी बस्ती आयुर्वेदिक थेरेपी वात दोष को शांत करने में मदद करती है, जिससे इंटरवर्टेब्रल जोड़ों की समस्याओं से सहायक मांसपेशियों को आराम मिलता है.
  • यह थेरेपी लेने से ब्लड सर्कुलेशन में भी सुधार हो सकता है. इसके अलावा, कटि वस्ति रीढ़ को मजबूत करने और पीठ दर्द को रोकने के लिए भी प्रभावी उपचार साबित हो सकती है.

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कटी बस्ती एक बेहद प्रभावकारी थेरेपी है, जो आपकी रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने में असरदार हो सकती है. साथ ही यह पीठ दर्द से राहत दिलाने में भी मदद करती है. इतना ही नहीं, इस थेरेपी की मदद से पीठ की मांसपेशियों को आराम मिलता है.

आमतौर पर कटि वस्ति थेरेपी के साइड-इफेक्ट नहीं देखे गए हैं, लेकिन कुछ अपवाद मामलों में कटी बस्ती लेने से बुखार, सूजन, अधिक पसीना आना और नसों में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लेकिन इस तरह की समस्या हर व्यक्ति को हो यह जरूरी नहीं है. बस ध्यान रखें कि आयुर्वेद एक्सपर्ट की सलाह पर ही इस थेरेपी को लें. वहीं, किसी अच्छे चिकित्सक से ही कटि वस्ति थेरेपी लें, ताकि किसी तरह की परेशानी न हो.

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कटी बस्ती उपचार कराने से पहले निम्न बातों पर ध्यान देना जरूरी है-

  • कटी बस्ती एक व्यापक और सुरक्षित आयुर्वेदिक थेरेपी है, जिसमें पूरी तरह सावधानी बरतने के लिए एक अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक द्वारा करवाना चाहिए.
  • ध्यान रखें कि थेरेपी के दौरान तेल ज्यादा गर्म न हो. अगर तेल ज्यादा गर्म रहता है, तो इससे त्वचा जलने की आशंका हो सकती है.
  • रिसाव से बचने के लिए आटे को अच्छी तरह से चिपकाएं. वहीं, थेरेपी लेने के दौरान ज्यादा हिलने-डुलने से बचना चाहिए.

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चिकित्सा केंद्र और जगह के अनुसार कटी बस्ती थेरेपी की कीमत अलग-अलग होती है. एक अनुमान के अनुसार, अगर आप किसी सरकारी चिकित्सा केंद्र पर यह थेरेपी लेते हैं, तो आपको लगभग 300 रुपये के आसपास देना होगा. वहीं, अगर आप किसी निजी क्लिनिक या हेल्थ सेंटर्स पर इस थेरेपी को ले रहे हैं, तो यहां आपको 800 -1500 रुपये के बीच देना पड़ सकता है.

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कटी बस्ती को अक्सर पुराने पीठ दर्द, गठिया, जोड़ों की जकड़न और यहां तक कि मांसपेशियों में दर्द जैसी स्थिति में इस्तेमाल की जाने वाली सबसे सुरक्षित और प्रभावकारी आयुर्वेदिक थेरेपी माना जाता है. नियमित समय तक पूर्ण रूप से कटी बस्ती थेरेपी लेने से आपको पीठ दर्द की समस्या से राहत मिल सकती है. हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि आप इस थेरेपी को एक अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक द्वारा ले रहे हैं. यदि आपको पहले से कोई रोग या स्वास्थ्य समस्या है, तो एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

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