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भारत में पांच साल से कम उम्र के लगभग 60 प्रतिशत बच्चे पूरी तरह से इम्यूनाइज्ड या प्रतिरक्षित हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) के एक सर्वे में यह जानकारी मिली है। केंद्र सरकार के निर्देश पर एनएसओ ने जुलाई 2017 से जून 2018 के बीच यह सर्वे किया था, जिसके परिणाम अब सामने आए हैं। सर्वे के मुताबिक, देश में पांच साल से कम उम्र के 59 प्रतिशत लड़कों और 60 प्रतिशत लड़कियों को आठों नियत टीके (प्रेस्क्राइब्ड वैक्सिनेशन) - बीसीजी, ओपीवी 1, 2, 3, डीपीटी 1, 2, 3 और खसरा - लगा दिए गए हैं। खबरों के मुताबिक, ग्रामीण भारत में 58 प्रतिशत बच्चों (57 प्रतिशत लड़के और 60 प्रतिशत लड़कियां) को ये टीके लगाए गए हैं। वहीं, शहरी इलाकों में 62 प्रतिशत बच्चों (62 प्रतिशत लड़के और 61 प्रतिशत लड़कियां) को तमाम प्रेस्क्राइब्ड वैक्सीनेशन दिए गए हैं।

सर्वे से जुड़ी रिपोर्ट एनीमिया के मामलों में भी कमी के साफ संकेत दिखाती है। इसके मुताबिक, सर्वे के 71वें राउंड में एनीमिया के आठ लाख 80 हजार 700 केस थे, जो 75वें राउंड में घटकर पांच लाख 96 हजार 200 रह गए। ट्यूबरकुलोसिस यानी टीबी के मामलों में भी कमी देखी गई है। नए सर्वे के मुताबिक, प्रति एक लाख लोगों में से 38 टीबी का शिकार हो रहे हैं, जबकि पिछले सर्वे में यह संख्या प्रति एक लाख पर 76 थी।

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गौरतलब है कि मौजूदा केंद्र सरकार ने साल 2017 में मिशन इंद्रधनुष नाम से इस योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत संबंधित विभाग या कार्यालय को दो साल से कम उम्र के हर उस बच्चे और उन सभी गर्भवती महिलाओं तक पहुंचना था, जिन्हें सामान्य प्रतिरक्षण कार्यक्रम के तहत टीके नहीं लग पाए हैं। इस बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए जब सर्वे शुरू किया गया तो पता चला कि इम्यूनाइज्ड बच्चों में से अधिकतर को सरकारी अस्पतालों या क्लिनिक में टीके लगाए गए थे। 

सर्वे रिपोर्ट की मानें तो ग्रामीण भारत में 95 प्रतिशत और शहरों के 86 प्रतिशत इम्यूनाइज्ड बच्चों को सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में टीके लगाए गए। इस काम में निजी अस्पतालों का योगदान काफी कम रहा। ग्रामीण इलाकों में जहां केवल पांच प्रतिशत इम्यूनाइज्ड बच्चों को निजी अस्पतालों में प्रतिरक्षण टीके लगाए गए, वहीं शहरों में 14 प्रतिशत इम्यूनाइज्ड बच्चे प्राइवेट स्वास्थ्य केंद्रों में ले जाए गए थे। सरकार का लक्ष्य इस साल 90 प्रतिशत इम्यूनाइजेशन को कवर करना है। हालांकि जानकारों का कहना है कि कोविड-19 महामारी की वजह से इस काम में बाधा उत्पन्न हुई है, जिसके चलते प्रोग्राम काफी ज्यादा प्रभावित हुआ है।

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