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डिलिवरी के बाद बच्चे को अपना दूध पिलाना यानी ब्रेस्टफीडिंग या स्तनपान सिर्फ नवजात शिशु के लिए ही नहीं बल्कि मां के लिए भी कई तरह से फायदेमंद है। ब्रेस्ट मिल्क के जरिए नवजात शिशु को अपनी मां से पोषक तत्व, तरल पदार्थ, रोगों के खिलाफ एंटीबॉडी, एन्जाइम्स आदि सभी जरूरी चीजें मिलती है। बच्चे के साथ ही मां के लिए भी ब्रेस्टफीडिंग करवाना कई तरह से फायदेमंद है। 

1-7 अगस्त के बीच वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक
अध्ययनों की मानें तो जो महिलाएं 12 महीने तक बच्चे को स्तनपान कराती हैं उनमें ब्रेस्ट कैंसर और ओवरी कैंसर होने का खतरा 28 प्रतिशत तक कम होता है। स्तनपान करवाने से पोस्टपार्टम डिप्रेशन का खतरा भी कम होता है और गर्भाशय को उसके सामान्य आकार में वापस आने में भी मदद मिलती है। इसलिए कुल मिलाकर देखें तो ब्रेस्टफीडिंग पूरी तरह से हेल्दी प्रैक्टिस है। मां और बच्चे दोनों के लिए ब्रेस्टफीडिंग किस तरह से और कितना फायदेमंद है इसके महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करने के मकसद से ही हर साल 1 से 7 अगस्त के बीच दुनियाभर में वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक मनाया जाता है। 

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ब्रेस्टफीडिंग, प्रसव के बाद वजन घटाने में मददगार
बच्चे को अपना दूध पिलाना मांओं के लिए कितना फायदेमंद है ये तो हमने आपको बता दिया लेकिन क्या आप जानती हैं कि ब्रेस्टफीडिंग करवाने से नई मांओं को डिलिवरी के बाद तेजी से वजन घटाने में भी मदद मिलती है। आपको यकीन नहीं होगा कि लेकिन बहुत सी महिलाएं तो ब्रेस्टफीडिंग को एक महत्वपूर्ण लाभ की तरह देखती हैं। वैसे तो पोस्टपार्टम यानी प्रसव के बाद वजन घटाने में कितना समय लगेगा यह हर महिला के लिए अलग-अलग होता है, लेकिन बच्चे को अपना दूध पिलाने वाली कई मांओं की मानें तो ब्रेस्टफीडिंग ने उन्हें प्रेगनेंसी से पहले वाले फिगर को तेजी से हासिल करने में मदद की। 

(और पढ़ें : बच्चे को अपना दूध पिलाने का सही तरीका क्या है)

ब्रेस्टमिल्क बनाने की प्रक्रिया में रोजाना 500-700 कैलोरी बर्न होती है
हालांकि यह बात याद रखें कि प्रेगनेंसी से दौरान आपका वजन रातों रात नहीं बढ़ गया था इसलिए वह अचानक से रातों रात गायब भी नहीं होगा। वैसे तो ब्रेस्टफीडिंग करवाने के दौरान ब्रेस्टमिल्क का उत्पादन करने की प्रक्रिया में रोजाना आपकी 500 से 700 कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है। लेकिन इसकी वजह से प्रसव के बाद का वजन घटाने में यह प्रक्रिया हमेशा योगदान नहीं कर सकती।

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गर्भावस्था से पहले का वजन, आहार, शारीरिक गतिविधि का स्तर आदि ऐसे कई फैक्टर्स हैं जो बच्चे की डिलिवरी के बाद वजन घटाने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। औसतन देखें तो शुरुआती कुछ महीनों में बच्चे को सिर्फ अपना दूध पिलाने वाली मांओं का हर महीने आधा से 1 किलो वजन कम होता है लेकिन लंबे समय तक बच्चे को दूध पिलाने वाली मांओं का ज्यादा वजन कम होता है उन महिलाओं की तुलना में जो बच्चे को दूध नहीं पिलाती हैं। 

स्तनपान के दौरान फैट सेल्स का उपयोग होता है
दरअसल, जब कोई महिला शिशु को स्तनपान करवाती है तो वह गर्भावस्था के दौरान शरीर में जमा करके रखी गई वसा कोशिकाएं (फैट सेल्स) का उपयोग करती है- अपने आहार से मिलने वाली कैलोरी के साथ- अपने दूध उत्पादन को उत्तेजित करने के लिए और अपने बच्चे का पेट भरने के लिए। स्तनपान के दौरान उस स्थिति में भी वजन कम हो सकता है जब आप अपनी ऊर्जा और दूध के उत्पादन को बनाए रखने के लिए एक दिन में अतिरिक्त 300 से 500 कैलोरी खाने की सिफारिशों का पालन करती हैं।

(और पढ़ें : स्तनपान के दौरान हो रहे दर्द और सूजन का अनोखा उपाय)

6 महीने के बाद वजन घटने की प्रक्रिया हो जाती है धीमी
हालांकि, प्रसव के तुरंत बाद करीब 15 पाउंड यानी 6.8 किलोग्राम के तत्काल वेट लॉस के बाद, वजन घटने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। बच्चे के जन्म के बाद पहले छह महीनों में हर महीने करीब 1 से 2 पाउंड यानी 500 ग्राम से 1 किलोग्राम तक वजन कम होता है और इस पॉइंट के बाद तो वजन घटने की प्रक्रिया और भी धीमी हो जाती है। गर्भावस्था के दौरान बढ़े हुए वजन को कम करने में अक्सर छह से नौ महीने का समय लगता है। 

वजन घटाने के लिए हेल्दी विकल्पों को चुनें
अगर आप चाहती हैं कि ब्रेस्टफीडिंग के दौरान आपका वजन तेजी से घटे तो इसके लिए आपको स्वस्थ विकल्पों का चुनाव करने की जरूरत है:

  • ढेर सारे वरायटी वाले साबुत अनाज का सेवन करें
  • फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर फल और सब्जियां, लीन प्रोटीन और हेल्दी फैट का सेवन करें 
  • दिनभर में कम से कम 8 कप पानी और तरल पदार्थ भी पीते रहें ताकि शरीर में पानी की कमी न हो
  • अतिरिक्त चीनी और सैचुरेटेड फैट जैसे- सॉफ्ट ड्रिंक, डेजर्ट, फ्राइड फूड, चीज, होल मिल्क और फैटी मीट से मिलने वाली कैलोरीज का सीमित मात्रा में सेवन करें।
  • इसके अलावा ब्रेस्टफीडिंग के साथ ही मध्यम श्रेणी की शारीरिक गतिविधि भी आपकी मदद कर सकती है। हालांकि सीरियस एक्सरसाइज रूटीन शुरू करने से पहले प्रसव के बाद कम से कम 6 से 8 हफ्ते का इंतजार करें। (और पढ़ें- डिलिवरी के बाद करें कौन सी एक्सरसाइज)
  • प्रेगनेंसी के बाद पर्याप्त और अच्छी नींद भी बेहद जरूरी है। नींद लेने से मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं, ब्लड प्रेशर नॉर्मल होता है, ग्रोथ हार्मोन भी रिलीज होता है।
  • अगर शिशु को स्तनपान कराने के छह महीने के बाद, आप अधिक वजन कम करना चाहती हैं, तो आप अपने कैलोरी के सेवन को सावधानीपूर्वक कम कर सकती हैं क्योंकि अब आपका शिशु, अधिक ठोस पदार्थ खाना शुरू कर चुका है, लेकिन आप उसे स्तनपान कराना जारी रखें।

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