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मेडिकल क्षेत्र में आए दिन नई खोजों के बावजूद कई बीमारियां आज भी लाइलाज हैं। कैंसर उन बीमारियों में से एक है। इसकी चपेट में आने वाले व्यक्ति का बच पाना मुश्किल होता है। वयस्क हो या बच्चा, किसी को भी कैंसर हो सकता है। जानकार बताते हैं कि बच्चों और किशोरों में कैंसर के मामले बढ़े हैं। एक अनुमान के मुताबिक, दुनिया में 19 साल तक की उम्र के लाखों बच्चे कैंसर की बीमारी से पीड़ित हैं। ज्यादा आश्चर्य की बात यह है कि इनमें से केवल 20 प्रतिशत बच्चे जीवित बच पाते हैं, जबकि बाकी 80 प्रतिशत बच्चों की किशोरावस्था तक आते-आते मौत हो जाती है। बीते शनिवार को अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस के मौके पर यह चौकाने वाले आंकड़े सामने आए।

मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों में कैंसर होना आश्चर्यजनक नहीं है, लेकिन समस्या यह है कि मध्यम वर्ग या गरीब तबके से होने के कारण ज्यादातर बच्चों को सही और समय पर इलाज नहीं मिल पाता। भारत जैसे देशों में, जहां प्रतिव्यक्ति आय विकसित देशों की तुलना में काफी कम है, अमूमन ऐसी स्थिति है। हालांकि चिकित्सा के क्षेत्र से जुड़े कुछ लोग कोशिश में जुटे हैं कि ऐसे बच्चों को लंबे समय तक जीने और स्वस्थ जीवन देने में उनकी मदद की जा सके।

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डब्ल्यूएचओ की मुहिम
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से जुड़ी संस्था 'ग्लोबल चाइल्डहुड कैंसर' ने बच्चों को कैंसर से बचाने के लिए पहल करते हुए एक लक्ष्य निर्धारित किया। इसके तहत आगामी 10 सालों में यानी साल 2030 तक कैंसर पीड़ित बच्चों के जीवित रहने की दर 20 प्रतिशत से बढ़ा कर 60 प्रतिशत तक लानी है। भारत में मेडिकल क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित लक्ष्य को पाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई है।

मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ की यह पहल कई मायनों में महत्वपूर्ण है। वे बताते हैं कि अगर बच्चों में कैंसर के लक्षण शुरुआत में पता चल जाएं तो उन्हें बचाया जा सकता है। भारत में ऐसे केस दुर्लभ हैं। इस विषय पर बात करते हुए काउंसिल फॉर हेल्थकेयर एंड फार्मा के अध्यक्ष डॉक्टर गुरप्रीत संधू कहते हैं, 'जन्म से 18 साल की उम्र तक के बच्चों में कैंसर होना एक बड़ी समस्या बनती जा रहा है। विडंबना यह है कि अगर इसे शुरुआती दौर में पहचान लिया जाए, तो कई बच्चों की जानें बच जातीं। दुर्भाग्य से हमारे देश में कैंसर से डील करने के लिए योग्य सिस्टम नहीं है।'

कैंसर कैसे होता है?
इन्सानी शरीर कई तरह की कोशिकाओं से बना होता है। ये कोशिकाएं शरीर की जरूरतों के हिसाब से नियंत्रित और विभाजित होती रहती हैं। लेकिन कई बार कोशिकाएं जरूरत के बिना ही बढ़ती रहती हैं। आमतौर पर ऐसा किसी असामान्य कोशिका की वजह से होता है। इस असामन्य विकास को कैंसर कहते हैं, जिसमें कोशिकाएं अपना नियंत्रण खो देती हैं। ऐसी कोशिकाओं का समूह आसपास के ऊतकों यानी टिशुओं पर आक्रमण कर शरीर के दूसरे हिस्सों में पहुंचता है और रक्त के माध्यम से शरीर के बाकी हिस्सों में फैल जाता है। बढ़ते-बढ़ते ये कैंसर कोशिकाएं एक समूह का रूप ले लेती हैं जिसे ट्यूमर कहते हैं। यह ट्यूमर आसपास के ऊतकों पर हमला कर उन्हें नष्ट कर देता है। बता दें कि ट्यूमर कैंसरयुक्त हो भी सकते हैं और नहीं भी। यहां बता दें कि बच्चों को होने वाले कैंसर, वयस्कों में होने वाले कैंसर से थोड़े दुलर्भ हो होते हैं, जैसे-

ल्यूकेमिया- कैंसर का यह प्रकार बच्चों के रक्त और अस्थि मज्जा (बोन मैरो) को संक्रमित करता है और यह बच्चों में एक आम प्रकार का कैंसर माना जाता है।

न्यूरोब्लास्टोमा- इस प्रकार का कैंसर नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों में देखा जाता है। यह तंत्रिका कोशिकाओं के न्यूरल क्रिस्ट सेल से जुड़ा है। न्यूरोब्लास्टोमा बच्चे के पेट से शुरू होता है और यह सूजन और बुखार का कारण बनता है।

मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी का ट्यूमर- बच्चों में यह दूसरा सबसे आम प्रकार का कैंसर माना जाता है। बच्चों में होने वाले कैंसर के चार मामलों में से एक इसी प्रकार से संबंधित होता है। हालांकि, रीढ़ की हड्डी का कैंसर, बच्चों में मस्तिष्क के कैंसर की तुलना में कम होता है।

लिम्फोमाइसमें कैंसर लिम्फ ग्रंथि और अन्य लिम्फ ऊतकों जैसे टॉन्सिल से शुरू होता है। रीढ़ की हड्डी और अन्य अंग भी लिम्फोमा से प्रभावित होते हैं। बच्चों में कैंसर के दस में से एक मामला लिम्फोमा का पाया जाता है।

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बच्चों में कैंसर के शुरूआती लक्षण
शुरूआती चरण में जब कैंसर बच्चे के शरीर को प्रभावित करता है तो उसके कई तरह के लक्षण हो सकते हैं। उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं-

  • बच्चे का वजन लगातार कम होना
  • उल्टी के साथ बच्चे को सिरदर्द होना
  • हड्डियों, जोड़ों, कमर और पैर में लगातार दर्द और सूजन
  • पेट, गर्दन, सीने, पेल्विक और बगल में चर्बी या गांठ होना
  • शरीर पर अधिक नील पड़ना, रक्तस्त्राव और चकत्ते होना
  • बच्चे की आंख की पुतली के पीछे सफेद रंग का धब्बा होना
  • लगातार थकान और कमजोरी महसूस करना
  • देखने में परेशानी होना
  • बच्चे को दौरे पड़ना
  • पेशाब में खून आना

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यह कुछ लक्षण हैं जो बच्चों में कैंसर के संकेत देते हैं। हालांकि अधिकांश मामलों में बच्चों में कैंसर पता नहीं चल सका है। बताते चलें कि बच्चों को होने वाले कैंसर के सभी मामलों में करीब पांच प्रतिशत कैंसर के मामले जीन्स में हुए आनुवंशिक बदलावों के कारण होते हैं।

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