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बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते हैं वैसे वैसे माता पिता की जिम्मदारियां भी बढ़ने लगती हैं। बचपन में बच्चों को कई तरह की बीमारियां होने का खतरा रहता है। आठ से बाहर वर्ष की आयु वर्ग के अधिकतर बच्चों को रात के समय पैरों की पिड़लियों और घुटनों में दर्द होने की समस्या होती है। इस दर्द को चिकित्सीय भाषा में ग्रोइंग पेन (growing pain) के नाम से जाना जाता है। ग्रोईंग पेन में बच्चों के दोनों पैरों में ऐंठन और पैरों की मांसपेशियों में दर्द महसूस होता है। कई बार यह दर्द बच्चों के रात में जागने की भी वजह बनता है।

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बच्चों के पैरों में दर्द तीन से चार साल की उम्र में शुरू होता है, यही समस्या बच्चे को 8 से 12 वर्ष की आयु में दोबारा अनुभव होती है। इस लेख में बच्चों के पैर दर्द के बारे में बताया गया है। साथ ही आपको बच्चों के पैर दर्द के लक्षण, बच्चों के पैर दर्द के कारण, बच्चों का पैर दर्द से बचाव और बच्चों के पैर दर्द का इलाज आदि विषयों के बारे में विस्तार से बताने का प्रयास किया गया है। 

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  1. बच्चों के पैर दर्द के लक्षण - Baccho ke pair dard ke lakshan
  2. बच्चों के पैर दर्द के कारण - Baccho ke pair dard ke karan
  3. बच्चों के पैर दर्द का परीक्षण - Baccho ke pair dard ka parikshan
  4. बच्चों के पैर दर्द का इलाज - Baccho ke pair dard ka ilaj
  5. बच्चों के पैर दर्द का घरेलू उपचार - Baccho ke pair dard ka gharelu upchar

बच्चों का पैर दर्द, हर बच्चे को अलग-अलग तरह से महसूस हो सकता है। कुछ बच्चों को इस समस्या में तेज दर्द होता है, जबकि कई बच्चों को किसी भी तरह का दर्द अनुभव नहीं होता है। अधिकतर बच्चों को रोजाना पैर दर्द की समस्या नहीं होती है।

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बच्चों में पैर का दर्द आता-जाता रहता है। बच्चे को ये परेशानी एक माह या एक साल तक भी हो सकती है। बच्चों के पैर दर्द के कुछ सामान्य लक्षणों को आगे विस्तार से बताया गया है।

  • बच्चों को दोनों पैर की पिड़लियों, जांघों, घुटनों के पीछे और पिड़लियों के आगे दर्द महसूस होता है। (और पढ़ें - टांगों में दर्द को दूर करने के उपाय​)
  • इसमें बच्चे को दोपहर के बाद, शाम या रात के समय दर्द शुरू होता है। 
  • आपका बच्चा पैर में तेज दर्द की वजह से रात में उठ जाता है।
  • बच्चों के पैर का दर्द सामान्यतः 10 से 15 मिनट तक चलता है, कुछ मामलों में यह दर्द बच्चे को एक घंटे तक भी हो सकता है। (और पढ़ें - पैरों में जलन का इलाज)
  • बच्चों के पैर दर्द का कोई विशेष पैटर्न नहीं होता है, कुछ बच्चों को यह सप्ताह में कुछ दिन नहीं होता, जबकि कुछ बच्चों को यह दर्द रोजाना हो सकता है।
  • बच्चों के पैर में होने वाला दर्द उनकी हड्डियों और जोड़ों को प्रभावित नहीं करता, लेकिन इससे बच्चे की मांसपेशिया प्रभावित होती है।

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अध्ययन से पता चला है कि जिन बच्चों को ग्रोइंग पेन (growing pain) होता है, उनमें दर्द के प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है। इसके साथ ही इस समस्या में बच्चे को सिर दर्द और पेट दर्द होने की संभावना भी बढ़ जाती है। बच्चों के पैर में दर्द होने से उनको चलने और दौड़ने में पेरशानी नहीं होती है और इसकी वजह से ना ही बच्चा बीमारी पड़ता है। लेकिन फिर भी कुछ मामलों में दर्द होने पर आपको डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए। 

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बच्चों के पैर दर्द में डॉक्टर के पास कब जाएं

निम्नलिखित लक्षण दिखाई देने पर आपको बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।

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बच्चों के शारीरिक विकास के दौरान होने वाले पैर दर्द के मुख्य कारण को पता लगाना मुश्किल होता है। लेकिन निम्नलिखित कारणों की वजह से बच्चों को पैर में दर्द की समस्या हो सकती है।

  • जो बच्चे ज्यादा दौड़ते, कूदते और उछल कूद करते हैं उनको पैरों में दर्द की समस्या होती है। इसमें हल्का दर्द महसूस होने की वजह से बच्चे का ध्यान उस ओर तब तक नहीं जाता है, जब तक वह स्थायी रूप से न होने लगे।
  • दुनिया भर में किए गए अध्ययन से इस बात का पता चला है कि आमतौर पर जो बच्चे दिनभर खेलते रहते हैं उनके पैरों में दर्द महसूस होता है। (और पढ़ें - डाउन सिंड्रोम का इलाज)
  • बच्चों की मांसपेशियों और हड्डियों से संबंधित तंत्र कम आयु में दिन भर खेलने के दबाव को झेल नहीं पाता है।
  • बच्चों को होने वाला पैर दर्द रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम (Restless legs syndrome) से संबंधित होता है। 
  • बच्चे का गलत तरीके से खड़े होने, चलने या बैठने से सहारा प्रदान करने वाली मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिसकी वजह से दर्द शुरू हो जाता है। कुछ बच्चों के तलवे सपाट होते हैं, ऐसे बच्चों को अन्य बच्चों की अपेक्षा अधिक दर्द महसूस होता है। (और पढ़ें - बच्चों की सेहत के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज)
  • बच्चे के शारीरिक विकास या खेल में सक्रिय बच्चों के तेजी से विकास के साथ इस समस्या का किसी भी तरह से संबंध नहीं होता है। (और पढ़ें - बच्चे की उम्र के अनुसार लंबाई और वजन का चार्ट)

पैर में दर्द होने के कारण बच्चों को खेल से दूर नहीं करना चाहिए। आमतौर पर बच्चे का शारीरिक विकास पूरा होते ही इस तरह का दर्द ठीक हो जाता है। 

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आमतौर पर डॉक्टर बिना किसी टेस्ट के बच्चों के पैर में दर्द की पहचान कर लेते हैं। हालांकि कुछ मामलों में डॉक्टर अन्य समस्या की पहचान करने के लिए बच्चे का एक्स रे और ब्लड टेस्ट करने की सलाह दे सकते हैं। बच्चों के पैर में होने वाला केवल ग्रोइंग पेन ही नहीं होता, किसी अन्य कारणों की वजह से भी बच्चे के पैरों में दर्द हो सकता है। किसी अन्य कारण की वजह से बच्चे के पैरों में होने वाला दर्द में मसाज करने से आराम नहीं मिलता है, जबकि ग्रोइंन पेन में बच्चे को हल्की मसाज से ही आराम मिल जाता है। 

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बच्चों के पैर में रात के समय होने वाले दर्द व इसकी गंभीर स्थिति को ठीक करने के लिए डॉक्टर इलाज में कई तरह की प्रक्रियाओं को अपनाते हैं। इस रोग में होने वाले दर्द को कम करने के लिए डॉक्टर दर्द निवारक दवाएं जैसे आईब्रुफेन और एसिटामिनोफेन देते हैं। इस समस्या में बच्चों व किशोरों को एस्पिरिन दवा नहीं दी जाती है, क्योंकि कई अध्ययन बताते हैं कि बच्चों में एस्पिरिन का उपयोग रेये सिंड्रोम से जुड़ा हो सकता है। रेये सिंड्रोम में एक गंभीर रोग है जिसकी वजह से मस्तिष्क और लीवर में सूजन आ जाती है।

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बच्चे को आईब्रुफिन और एसिटामिनोफेन कितनी मात्रा में दी जानी चाहिए इसको जानने के लिए आप अपने डॉक्टर से बात करें। बच्चों को हल्का दर्द होने पर किसी भी तरह की दवा देने से बचें, हल्के दर्द को कम करने के लिए कई घरेलु उपायों की मदद ली जा सकती हैं।  

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बच्चों के पैरों में होने वाले दर्द के लिए किसी भी तरह के इलाज की आवश्यकता नहीं होती है। इस दौरान बच्चों के पैरों में होने वाले दर्द की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग उपायों को अपनाया जा सकता है। निम्नलिखित कुछ घरेलु उपायों को अपनाकर आप बच्चे के पैरों के दर्द को आसानी से कम कर सकते हैं।

  • प्रभावित पैर की मसाज करें:
    सामान्यतः मांसपेशियों में होने वाली ऐंठन मसाज से ठीक हो जाती है। इस दौरान पैर के प्रभावित हिस्से की मसाज या मालिश के लिए आप हल्के गर्म तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। (और पढ़ें -  पैरों की मसाज कैसे करें)
     
  • गर्म पट्टी का उपयोग करें:
    बच्चे के पैर दर्द को आराम पहुंचाने के लिए आप प्रभावित हिस्से पर गर्म पट्टी को बांधे। इससे बच्चे के पैर का दर्द कम होगा और उसको कुछ समय के बाद आराम आना शुरू हो जाएगा। (और पढ़ें - मांसपेशियों में ऐंठन के लिए घरेलू उपचार)
     
  • मांसपेशियों में खिंचाव:
    बच्चे के पैर की मांसपेशियों में सुबह के समय खिंचाव करने से रात के समय होने वाला पैर दर्द कम होता है। बच्चे के पैरों के दर्द को कम करने के लिए की जानें वाली एक्सरसाइज के बारे में आप डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं। (और पढ़ें - मांसपेशियों में खिंचाव का इलाज)
     
  • खट्टे फल और जूस:
    माता पिता को अपने बच्चे को खेलने से पहले खट्टे फल जैसे संतरे आदि, का जूस देना चाहिए। इससे बच्चे को विटामिन सी मिलता है और मांसपेशियों में होने वाला दर्द कम होने लगता है। (और पढ़ें - खट्टे फल खाने के फायदे)
     
  • बच्चे का खेलना बंद ना करें:
    बच्चे को विश्वास दिलाएं कि उसका दर्द जल्द ही ठीक हो जाएगा। साथ ही उसको खेलने, चलने और दौड़ने से मना ना करें।   

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