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बच्चों के सिर में दर्द होना एक आम समस्या है। सामान्यतः बच्चों के सिर में दर्द कोई गंभीर समस्या नहीं होती है। व्यस्कों की तुलना में बच्चों को माइग्रेन और तनाव से संबंधित सिरदर्द के साथ साथ अन्य प्रकार के सिर दर्द भी अलग होता है​​। कुछ बच्चों का सिर दर्द लंबे समय तक चलता है। सिर दर्द होने पर छोटे बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं और रोने लगते हैं। इसके साथ ही बच्चे को सोने में परेशानी होना भी उसके सिर में दर्द की ओर संकेत करता है। सिर दर्द के कारण बच्चों को पढ़ने के साथ ही कई अन्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।

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बच्चों की इस समस्या को ध्यान में रखते हुए आपको इस लेख में “बच्चों के सिर दर्द” के बारे में बताया गया है। साथ ही आपको बच्चों के सिर दर्द के लक्षण, बच्चों के सिर दर्द के कारण, बच्चों का सिर दर्द से बचाव और बच्चों के सिर दर्द का इलाज, दवा व उपचार के बारे में भी विस्तार से बताया गया है। 

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  1. बच्चों के सिर दर्द के प्रकार - Baccho ke sir dard ke prakar
  2. बच्चों का सिर दर्द से बचाव - Bacho ka sar dard se bachav
  3. बच्चों के सिर दर्द के लक्षण - Baccho ke sir dard ke lakshan
  4. बच्चों के सिर दर्द का कारण - Baccho ke sar dard ka karan
  5. बच्चों के सिर दर्द का इलाज - Baccho ke sar dard ka ilaj
  6. बच्चों के सिर दर्द का घरेलू उपाय - Baccho ke sir dard ka gharelu upay

बच्चों में होने वाला सिर दर्द सामान्यतः चार प्रकार में विभाजित किया जाता है। सभी प्रकार के सिर दर्द के कारण अलग-अलग होते हैं, इसी वजह से इनका इलाज भी अलग-अलग तरीके से किया जाता है। बच्चे के सिर दर्द के सही प्रकार पता लगने से उसका इलाज करने में भी आसानी होती है। आगे आपको बच्चों के सिर दर्द के प्रकार को विस्तार से बताया गया है।  

  •  माइग्रेन:
    तनाव और नींद की कमी के कारण बच्चे को माइग्रेन होने की संभावना बढ़ जाती है। बच्चों में होने वाले माइग्रेन के सबसे आम प्रकार पैरोक्जिमल वर्टिगो (paroxysmal vertigo) और साईकिलिक वोमेटिंग (cyclic vomiting) होता हैं। इसमें पैरोंक्जिमल वर्टिगों की समस्या वर्टिगो से संबंध रखती है, इसमें बच्चे को अचानक सब कुछ घूमता हुआ महसूस होता है और कुछ ही मिनटों के बाद वह ठीक हो जाता है। 
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  • तनाव से जुड़ा सिर दर्द (tension type headache):
    इस प्रकार का सिरदर्द अधिकतर बच्चों को होता है। आमतौर पर बच्चे को किसी प्रकार की भावनात्मक परेशानी या शारीरिक तनाव के कारण इस तरह का सिरदर्द होता है। ऐसे में तनाव के कारण की पहचान और उपचार करने से आपके बच्चे को आराम पहुंचाया जा सकता है। 
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  • क्लस्टर (cluster) सिर दर्द:
    इस तरह का सिर दर्द सामान्यतः दस साल से अधिक आयु के बच्चों में देखा जाता है। इस प्रकार के सिर दर्द की शुरुआत में बच्चे को थोड़े थोड़े समय के बाद सिर दर्द होने लगता है, जो आमतौर आंखों के पीछे होता है और यह सिर दर्द एक सप्ताह से एक महीने के तक जारी रह सकता है। 
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  • क्रोनिक (chronic) रोजाना सिर दर्द:
    इस प्रकार के सिर दर्द को सीडीएच (Chronic daily headache: CDH) कहा जाता है। जब बच्चे को माईग्रेन या टेंशन टाइप सिरदर्द महीने में 15 दिनों से ज्यादा होता है, तो इसको सीडीएच कहते हैं। सीडीएच की समस्या कई कारण से होती है, जिसमें किसी प्रकार की दवाओं का लंबे समय तक सेवन करने, संक्रमण और सिर पर हल्की चोट आदि को शामिल किया जाता है।    

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बच्चों को पर्याप्त आराम देने के साथ ही आप निम्नलिखित उपायों को अपनाकर बच्चे का सिर दर्द से बचाव कर सकते हैं।

  • बच्चे के सिर दर्द को बढ़ाने वाले कारक जैसे तेज संगीत, चमकदार रोशनी, अचानक मुड़ना या घूम जाना, जीवनशैली में बदलाव, शारीरिक व भावनात्मक तनाव से बच्चे को दूर रखें।
  • बच्चे को पूरी नींद लेने दें, क्योंकि पर्याप्त नींद न लेना भी बच्चों के सिर दर्द का कारण होता है। (और पढ़ें - अच्छी नींद के उपाय​)
  • कुछ मामलों में ठंडी सिकाई भी तनाव से होने वाले सिर दर्द को कम करने में मदद करती है। (और पढ़ें - सिकाई करने के फायदे)
  • अगर आपके बच्चे को माइग्रेन हो तो उसके आसपास शांति बनाएं रखें। (और पढ़ें - दिमाग को शांत करने का उपाय)
  • डर, तनाव और घबराहट भावनात्मक कारण की वजह से भी बच्चे को सिर दर्द होने लगता है। ऐसे में आप बच्चे को गहरी सांस संबंधी एक्सरसाइज और ध्यान करने के लिए कहें या सिखाएं। (और पढ़ें - एक्सरसाइज करने का सही टाइम​)
  • कई बार पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने के कारण भी बच्चों को सिर दर्द होने लगता है। ऐसे में आप बच्चे को आवश्यकतानुसार पानी पिलाएं।    

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सिर दर्द के प्रकार के आधार पर बच्चों में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। इसमें दर्द की तीव्रता, समय अवधि, शुरुआत और बच्चे के रोजाना कामों पर पड़ने वाले प्रभाव में अंतर हो सकता है। माईग्रेन सिर दर्द में बच्चे को निम्नलिखित लक्षण महसूस है।

तनाव से जुड़े सिर दर्द में होने वाले लक्षण

  • सिर और गर्दन के पिछले हिस्से में दर्द महसूस होना, (और पढ़ें - गर्दन में दर्द का इलाज)
  • सिर के दोनों तरफ हल्का दर्द होना, कुछ मामलों में यह दर्द थोड़ा बढ़ सकता है।
  • बच्चे के सोने की आदत में बदलाव आना। (और पढ़ें - स्लीप एप्निया का इलाज)

बच्चों के सिर दर्द के निम्नलिखित लक्षण किसी अन्य गंभीर समस्या की ओर संकेत करते हैं।

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बच्चो के सिर दर्द का कारण कई तरह के कारक होते हैं। इनमें निम्नलिखित को शामिल किया जाता है।

  • रोग व संक्रमण:
    सामान्य रोग जैसे सर्दी जुकाम, फ्लू व साइनस का संक्रमण आदि कुछ ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से बच्चे को बार बार सिर दर्द होता है। गंभीर संक्रमण जैसे मेनिनजाइटिस और इन्सेफेलाइटिस की वजह से भी सिर दर्द होने लगता है। 
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  • सिर पर चोट:
    सिर पर चोट या नील होने के कारण भी बच्चों को सिर दर्द होने लगता है। हालांकि सिर की अधिकतर चोट हल्की होती हैं, लेकिन यदि आपका बच्चा सिर के बल तेजी से गिरा है या उसका सिर किसी चीज से तेजी से टकराया है तो ऐसे में डॉक्टर से जांच अवश्य कराएं। इसके अलावा सिर पर चोट लगने के बाद बच्चे को दर्द गंभीर होता जा रहा हो तो भी आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। 
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  • भावनात्मक कारक: 
    साथियों, शिक्षकों और माता-पिता के कारण किसी प्रकार का तनाव और चिंता भी बच्चे को सिर दर्द होने में अहम भूमिका निभाता है। तनाव से ग्रस्त बच्चे में अकसर सिर दर्द की समस्या होती है। इसके अलावा दुखी और अकेलापन महसूस करने से भी बच्चों में सिर दर्द होने लगता है। 
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  • आनुवंशिक कारण:
    कई मामलों में माइग्रेन की समस्या पीढ़ी दर पीढ़ी चलती है।
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  • विशेष तरह के खाद्य पदार्थ और पेय: 
    कई तरह के डिब्बे बंद खाने में नाइट्रेट की मात्रा पाई जाती है, यह तत्व भी बच्चों में सिर दर्द की समस्या को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होता है। इसके अलावा सोडा, चॉकलेट, कॉफी और चाय में मौजूद कैफीन के अतिरिक्त सेवन भी सिर दर्द का मुख्य कारण होता है। 
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  • मस्तिष्क में समस्या होना: 
    दुर्लभ मामलों में ब्रेन ट्यूमर, फोड़ा या मस्तिष्क में होने वाले रक्तस्त्राव की वजह से मस्तिष्क पर दबाव पड़ता है, जिसके कारण लंबे समय तक गंभीर सिर दर्द होता है। इस तरह के मामलों में अन्य तरह के लक्षण महसूस होते हैं, जैसे दिखाई देने में समस्या, सिर चकराना और शरीर के अंगों के साथ तालमेल बैठाने में मुश्किल होना, आदि।

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बच्चे के सिर दर्द को ठीक करने के लिए घरेलू उपायों व दवाएं दोनों ही विकल्प मौजूद है। अगर बच्चा बड़ा हो तो उसको सिर दर्द के इलाज में थेरेपी भी दी जा सकती है।

सिर दर्द में दी जानें वाली दवाएं

  • दर्द निवारक सामान्य दवाएं: एसिटामिनोफेन और आईब्रुफेन कुछ दवाओं का इस्तेमाल सिर दर्द के लिए किया जाता है। इन दवाओं को सिर दर्द के प्राथमिक लक्षण दिखाई देने पर बच्चों को दिया जा सकता है। लेकिन एस्प्रिन व अन्य दवाओं बच्चों को देते समय सावधानी बरतें। एस्प्रिन दवा दो साल से अधिक आयु के बच्चों को दी जाती है। इसके अलावा चिकनपॉक्स व फ्लू होने पर बच्चों को किसी भी तरह की दवा देने से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लेनी चाहिए।
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  • डॉक्टर की सलाह पर दी जाने वाली दवाएं: ट्रिपटैन्स (Triptans) डॉक्टर के द्वारा सलाह के बाद दी जानें वाली दवा से माईग्रेन का इलाज किया जाता है। यह 6 साल से अधिक आयु के बच्चे के लिए काफी प्रभावी साबित होती है। (और पढ़ें - बच्चों के दांत निकलने की उम्र)

बच्चे को किसी भी तरह की दवा देने से पहले डॉक्टरी सलाह लेना बेहद जरूरी होता है। इंटरनेट या किसी अन्य स्त्रोत से प्राप्त अधूरी जानकारी के आधार पर बच्चे को दवा देने के परिणाम घातक हो सकते हैं। 

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बच्चों के सिर दर्द को आप कुछ घरेलू उपाय की मदद से भी कम कर सकते हैं। इसके लिए आपनाए जाने वाले कुछ उपायों को आगे विस्तार से बताया जा रहा है।

  • पिपरमिंट ऑयल:
    पिपरमिंट का तेल नसों को आराम पहुंचाने का काम करता है। जिससे बच्चे का तनाव कम होता है और उसको सिर दर्द में आराम मिलता है। इस तेल में मौजूद मेंथोल मांसपेशियों को आराम देकर दर्द को कम करने में सहायक होता है। (और पढ़ें - मांसपेशियों में दर्द के घरेलू उपाय)
     
  • दालचीनी: दालचीनी भी मांसपेसियों के तनाव और दर्द को कम करने में मददगार होती है। तनाव की वजह से होने वाले सिर दर्द में आप बच्चे को गर्म दूध में चुटकी भर दालचीनी मिलाकर दें, इससे उसका सिर दर्द जल्द ही ठीक हो जाता है। (और पढ़ें - दालचीनी दूध के फायदे)
     
  • लौंग: लौंग में दर्द को कम करने वाले तत्व मौजूद होते हैं। इसके इस्तेमाल के लिए आप बच्चे के खाने में लौंग मिलाएं या उसको लौंग दिन में दो बार चबाने के लिए दें। बड़े बच्चों को एक बार में एक ही लौंग चबाने के लिए दें।   

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