myUpchar प्लस+ सदस्य बनें और करें पूरे परिवार के स्वास्थ्य खर्च पर भारी बचत,केवल Rs 99 में -

जब आपका नवजात शिशु घर आता है तो उसकी देख-रेख व पालन पोषण के लिए माता और पिता दोनों ही काफी उत्साहित होते हैं। बच्चे को नहलाना, उसे खिलाना, कपड़े पहनाना आदि छोटे-छोटे कार्यों को लेकर भी मन में उत्साह रहता है और यह सब करने में आनंद भी खूब आता है। लेकिन इन सब में जो चीज अच्छी नहीं लगती है वह है नींद का खराब होना। 

शिशु का ठीक तरह से ख्याल रखने के लिए नए माता-पिता का अच्छी नींद लेना बहुत जरूरी होता है लेकिन ऐसा खासतौर पर पहले महीने में कर पाना काफी मुश्किल होता है। नींद पूरी न हो पाने और जिम्मेदारियां बढ़ने की वजह से कई माता-पिता में पोस्टपार्टम डिप्रेशन का खतरा रहता है।

इस स्थिति से बचने के लिए आपको शिशु की जरूरतों और नींद से जुड़ी आदतों को समझने की जरूरत है। इससे आप खुद भी पर्याप्त नींद ले पाएंगें और अपने बच्चे की जरूरतों को भी पूरा कर पाएंगें।

(और पढ़ें - 6 महीने के बच्चे को क्या खिलाना चाहिए)

  1. शिशु को एक ही समय पर सुलाने की कोशिश करें - Bache ke Sleeping Pattern ko samjhe
  2. शिशु के ठीक से न सो पाने पर मिलते हैं ये संकेत - Bache ki nind me problem aane par milne vale signs
  3. नींद आने पर बच्चा ये संकेत देता है - Nind aane par Bache ye signs de sakta hai
  4. पहली बार माता-पिता बनने पर टिप्स - New Parents ke liye Tips
  5. बेहतर नींद पाने के लिए सलाह - Bache aur khud ko kaise dein achi nind
  6. नवजात शिशु के साथ घर पर कैसे लें पूरी नींद के डॉक्टर

नवजात शिशु के आने के बाद आपको कम नींद लेने और इससे पड़ने वाले प्रभावों के लिए खुद को तैयार कर लेना चाहिए।

आमतौर पर नवजात शिशु पूरे दिन में से 16 से 17 घंटे सोते हैं, लेकिन इसमें वे थोड़ी-थोड़ी देर के लिए ही सोते हैं। जैसे-जैसे शिशु बड़ा होता है उसके सोने का समय कम हो जाता है लेकिन अब वह रात में ज्यादा सोने लगता है और उसकी नींद के पैटर्न में स्थिरता आने लगती है।

नवजात शिशु की नींद से जुड़ी कुछ बातों के बारे में आपको पता होना चाहिए :

  • नवजात शिशु 
    आमतौर पर, नवजात शिशु दिन और रात को मिलाकर 16 से 17 घंटे तक सोता है लेकिन इस दौरान वो केवल एक से दो घंटे की अवधि के लिए सोता है।
     
  • तीन महीने का होने पर
    तीन महीने या शिशु के छह से आठ किलो वजन के होने पर वह रात को छह से आठ घंटे की नींद लेता है।
     
  • छह महीने का होने पर
    अधिकतर शिशु छह महीने का होने तक रात को सोना सीख लेते हैं। जब तक ऐसा नहीं होता तब तक आपको शिशु के अनुसार ही नींद लेनी पड़ेगी।

(और पढ़ें - बच्चे पेट के बल क्यों सोते हैं)

अगर आप सोच रही हैं कि 6 महीने का होने पर आपका शिशु रात में सोना सीख लेगा तो ऐसा नहीं है। कुछ शिशुओं को 6 महीने के बाद भी नींद से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं। अब ऐसे में अगर आपका बच्चा ठीक से नहीं सो पाएगा तो आप भी पूरी नींद नहीं ले पाएंगे।

नींद से जुड़ी अधिकतर समस्याएं शिशु के मां से अलग होने के डर की वजह से होती हैं। अगर आप अपने शिशु को अपने से अलग सुलाती हैं तो भी उसे नींद आने में दिक्कत होती है। आपका शिशु इस अलगाव को समझ नहीं पाता है जिससे उसकी नींद में रुकावट पैदा होती है।

सोते समय सेपरेशन एंग्जायटी (अलग होने की चिंता) के निम्न संकेतों पर जरूर ध्यान दें :

  • यदि शिशु 2-3 रातों से ठीक से सो रहा है और अब वो अचानक एक से ज्यादा बार रात को उठकर रोने लगा है
  • आपके कमरे से बाहर निकलने पर शिशु का रोना शुरू कर देना और गोद में उठाते ही चुप हो जाना
  • आपके या आपके पार्टनर के बिना सो न पाना 
  • रात को सोते समय दूर जाने के डर से शिशु का माता या पिता में से किसी एक से लिपट जाना 

किसी बीमारी की वजह से भी शिशु को नींद से जुड़ी कोई समस्या हो सकती है। अगर आपको शिशु की नींद को लेकर कोई असामान्य बदलाव महसूस हो रहा है तो पीडियाट्रिशियन (बाल रोग विशेषज्ञ) से जल्द संपर्क करें।

(और पढ़ें - छोटे बच्चे रात में क्यों रोते हैं)

जब शिशु को नींद आती है तो वो कुछ तरह के संकेत देता है जैसे कि :

  • आंखें मलना 
  • उबासी लेना 
  • रोना
  • जब आप बात करें तो इधर-उधर देखना

सभी बच्चों को अपने आप सोना नहीं आता है और न ही वो अपना सोने व जागने का पैटर्न बना सकते हैं। बच्चे को अपनी नींद का पैटर्न बनाने में मदद करने के लिए आप निम्न टिप्स अपना सकती हैं :

  • बच्चे के सोने का एक समय जल्द से जल्द निश्चित कर लें।
  • आप शिशु को दूध पिलाते हुए या कमर पर सहलाते हुए सुला सकती हैं।
  • बच्चे को गोद में सुलाने की गलती न करें क्योंकि इससे बच्चे की आप पर निर्भरता बढ़ जाती है। ऐसे में बच्चे को सोने के लिए आपकी गोद की आदत पड़ सकती है।  
  • अपने बच्चे के साथ खेलें, उसे दुलार दें और दिन के समय उसके साथ समय बिताएं। इससे बच्चे को रात के समय आपसे दूर रहने में मदद मिलेगी। इससे आपके दूर होने पर भी बच्चे को सेपरेशन एंग्जाइटी नहीं होगी।
  • सोने से थोड़ी देर पहले बच्चे के साथ न खेलें, इससे बच्चे के सोने के समय में बदलाव आ सकता है और उसका रूटीन भी प्रभावित होगा। 
  • यदि बच्चे को अब एक ही समय पर भूख लगती है (ब्रेस्टफीडिंग पैटर्न) तो आप उसे सोने के लिए चुसनी (पैसिफायर) भी दे सकते हैं।

अगर आप मां बनने के बाद चैन से सोना चाहती हैं तो इसके लिए बहुत है कि आपका बच्चा रोज पर्याप्त नींद लेना सीख जाए। इसके लिए आप नीचे बताए गए टिप्स की मदद ले सकती हैं : 

  • बच्चे के सोने पर आप भी सो जाएं। घर या ऑफिस का काम करने में इस समय को बर्बाद न करें। बच्चे के साथ आप भी आराम कर लें। शुरू में आपको ये सब थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन धीरे-धीरे आपको इसकी आदत हो जाएगी।
  • अगर घर पर कोई मेहमान आता है तो उसकी मेहमाननवाजी में न लगें बल्कि उन्हें कुछ समय शिशु के साथ खेलने के लिए कहें। इस दौरान आप झपकी ले सकती हैं लेकिन बच्चे के पास न सोएं।
  • घर और बाहर के कामों को अपने पति या पार्टनर के साथ बांट लें। 
  • हर बार बच्चे के रोने पर तुरंत उसके पास न जाएं बल्कि उसे खुद चुप होने दें। हालांकि, अगर वो भूख, गीलेपन या फिर दर्द की वजह से रो रहा है तो उसके पास जरूर जाएं। बच्चा सेपरेशन एंग्जायटी की वजह से भी रो सकता है। इसमें आपको बच्चे को ज्यादा दुलार नहीं देना चाहिए क्योंकि इससे वो आपको पास बुलाने के लिए बार-बार ऐसा करेगा।

(और पढ़ें - बच्चे को दूध कैसे पिलाना चाहिए)

आपकी बेहतर नींद बच्चे की नींद पर निर्भर करती है। अपने और अपने बच्चे के लिए बेड टाइम रूटीन बना लीजिये और उस पर टिके रहने की कोशिश करें।

इसके लिए आप नीचे बताए गए टिप्स अपना सकती हैं -

  • कमरे में मंद रौशनी रखें, बच्चे को लोरी या किताब पढ़कर सुनाएं।
  • बच्चे को अपनी गोद में न सुलाएं। ऐसा करने से बच्चा सोने के लिए आपके ऊपर निर्भर हो जाएगा। 
  • सोने से पहले उत्साहित करने वाला कोई काम न करें क्योंकि ज्यादा थकान होने पर बच्चे को ठीक तरह से नींद नहीं आ पाती है। 
  • उन संकेतों का पता लगाने की कोशिश करें जिनसे लग रहा हो कि बच्चा सोने वाला है जैसे कि आंखें मलना, इधर-उधर देखना, उबासी लेना।
  • सेपरेशन एंग्जायटी के संकेतों पर ध्यान दें। दिन में शिशु को सीने से लगाकर खिला सकते हैं ताकि रात को यदि आप उसे दूर सुलाएं तो वह न रोये। 
  • दिन के समय में बच्चे के साथ खूब खेलें और उसे खूब दुलार दें ताकि रात के समय उसे आपसे दूर जाने का डर न रहे।
  • रात में थोड़ी-थोड़ी देर में कभी आप तो कभी आपका पार्टनर बच्चे को देखता रहे। इससे आप दोनों ही आराम से सो पाएंगें। 
  • यदि सोते समय बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो या किसी बीमारी के संकेत दिखाई दें तो डॉक्टर से मिलें।
  • बच्चे की तरफ पीठ कर के न सोएं।

इन सभी बातों को ध्यान में रख कर आप अपने शिशु और खुद को बेहतर नींद दे पाएंगीं। ये आप दोनों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है।

Dr. Yeeshu Singh Sudan

Dr. Yeeshu Singh Sudan

पीडियाट्रिक

Dr. Veena Raghunathan

Dr. Veena Raghunathan

पीडियाट्रिक

Dr. Sunit Chandra Singhi

Dr. Sunit Chandra Singhi

पीडियाट्रिक

और पढ़ें ...
ऐप पर पढ़ें