myUpchar प्लस+ सदस्य बनें और करें पूरे परिवार के स्वास्थ्य खर्च पर भारी बचत,केवल Rs 99 में -

मां की जिंदगी में उसके बच्‍चे से ज्‍यादा अहम और कुछ नहीं होता। शिशु के जन्‍म के बाद उसके बारे में ऐसी कई बातें हैं जो मां को जाननी और समझनी होती हैं। प्रसव के बाद जितनी थकान आपको महसूस होती है उतना ही शिशु भी गर्भ से निकलने के बाद थका हुआ महसूस करता है।

जन्‍म के पहले दिन शिशु को आगे के विकास के लिए भी तैयार होना होता है। इसलिए उसे बहुत आराम करने की जरूरत होती है और इसी वजह से वो जन्‍म के पहले 24 घंटों में ज्‍यादा नींद लेता है ताकि आगे के लिए वो खुद को तैयार रख सके।

अक्‍सर नई माओं के मन में ये ख्‍याल आता है कि शिशु को कितनी नींद लेनी चाहिए और जन्‍म के पहले दिन शिशु का सामान्‍य स्‍लीपिंग पैटर्न क्‍या होता है। आइए जानते हैं इसके बारे में।

  1. नवजात शिशु को कितनी नींद लेनी चाहिए - Bache ko kitna sona chahiye
  2. शिशु की नींद के साथ तालमेल - Bache ke sleeping pattern ke anusar kaise chale
  3. शिशु का स्‍लीपिंग पैटर्न - Bache ka sleeping pattern
  4. नवजात शिशु को कहां सोना चाहिए - Bache ko kaise sulaye
  5. मां के लिए सलाह - Advise for new mother

जन्‍म के पहले दिन शिशु लगभग आधे से ज्‍यादा समय तक यानी 16 से 18 घंटे तक सोता है। हालांकि, वो इस दौरान बीच-बीच में जागता भी है। शिशु दिन और रात में थोड़े-थोड़े समय के अंतराल में 2 से 3 घंटे के लिए सोता है। जन्‍म के पहले 24 घंटों में शिशु का काम बस सोना और दूध पीना होता है और इसलिए सोने के दौरान जब भी उसे भूख लगती है तो वो नींद से उठकर रोने लगता है।

नई माओं के लिए शिशु के स्‍लीपिंग पैटर्न (सोने का समय) के साथ तालमेल बिठाना थोड़ा मुश्किल होता है। यहां तक कि बच्‍चे के जन्‍म के बाद मां को नींद की कमी होना सबसे सामान्‍य समस्‍याओं में से एक है।

रात में शिशु कई बार जागता है और ऐसे में उसे अपनी मां की जरूरत होती है। मां को भी रात के समय बार-बार शिशु को दूध पिलाने के लिए उठना पड़ता है। डिलीवरी के बाद शिशु की देखभाल के साथ मां के शरीर को भी आराम की जरूरत होती है।

थकान और नींद के साथ आप अपने शिशु की देखभाल नहीं कर सकती हैं इसलिए जितना हो सकता है और जब भी हो सके अपनी नींद पूरी कर लें। शिशु के सोने पर आप भी सो जाएं। इससे आपको भी बीच-बीच में आराम मिलता रहेगा।

घर के अन्‍य कामों का बोझ खुद पर न लें। शिशु के जन्‍म के बाद मेहमानों का आना सामान्‍य बात है लेकिन ये सब मां और शिशु को बहुत थका देता है। नवजात शिशु को आराम करने दें। अगर आपको ज्‍यादा थकान महसूस हो रही है और आप सोना चाहती हैं कि तो अपने परिवार में से किसी सदस्‍य को शिशु को संभालने के लिए कहें।

(और पढ़ें - नवजात शिशु को कितना सोना चाहिए)

फिलाडेल्फिया के चिल्‍ड्रन हॉस्‍पीटल के अनुसार वयस्‍कों की तरह ही बच्‍चों का भी स्‍लीपिंग साइकिल (सोने और जागने का समय) होता है। उनमें रैपिड आई मूवमेंट (इस दौरान आंखें तेजी से चारों ओर घूमती हैं) और नॉन रैपिड आई मूवमेंट चरण भी होता है।

अगर शिशु नींद के दौरान तेज सांसे लेता है तो घबराने की जरूरत नहीं है। आमतौर पर नवजात शिशुओं के सांस लेने का पैटर्न अनियमित होता है। तेज या नॉर्मल तरीके से सांस लेने के बीच शिशु हल्‍का सा ब्रेक भी ले सकता है।

इसके अलावा शिशु अपने नथुनों से सांस लेते हैं और नींद के दौरान सूं सूं की आवाज आती है। ऐसा इसलिए होता है क्‍योंकि जन्‍म के बाद नए वातावरण और सांस लेने की प्रक्रिया में शिशु के वायु मार्ग का इससे पहले इस्‍तेमाल नहीं हुआ होता है।

अगर आपको लग रहा है कि आपके शिशु को कफ या जुकाम हो गया है तो ऐसा बिलकुल नहीं है। यदि शिशु का शरीर गर्म या ठंडा लग रहा है, सांस लेने पर सीटी की आवाज आ रही है या सांस लेने में दिक्‍कत या बहुत ज्‍यादा रो रहा है तो तुरंत डॉक्‍टर को दिखाएं।

शिशु गर्भ में नौ महीने रहता है। जन्‍म के बाद बाहर आने पर उसे गर्भ की गरमाई और सुर‍क्षा याद आती है। शिशु को सुलाने के लिए आपको कोई विशेष जगह देखने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि वो कहीं भी सो सकता है लेकिन उसे मां की गोद में सबसे अच्‍छा महसूस होता है। शिशु को किसी पतली चादर में लपेटकर अपने सीने से लगाकर सुलाएं।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिशियन (एएपी) ने बताया है कि नवजात शिशु को कम से कम एक साल तक पालने में पीठ के बल सुलाना चाहिए। इससे अचानक गला घुटने या दम घुटने के कारण आकस्मिक नवजात शिशु सिंड्रोम को रोकने में मदद मिलेगी। अपने शिशु को कभी अकेला न छोड़ें।

शिशु के कमरे का तापमान न तो ज्‍यादा गर्म होना चाहिए और न ही ज्‍यादा ठंडा। शिशु के लिए कमरे का तापमान 16 डिग्री सेल्सियस से 20 डिग्री सेल्सियस तक ठीक रहता है।

(और पढ़ें - नवजात शिशु को बुखार होने के कारण)

जन्‍म के पहले दिन शिशु को बहुत नींद आती है और पहले 24 घंटों में वो सिर्फ दूध पीने के लिए जागता है। इसकी वजह से मां का स्‍लीपिंग पैटर्न खराब हो सकता है इसलिए शिशु के सोने पर मां को भी झपकी ले लेनी चाहिए। अगर आपको थकान महसूस हो रही है या नींद आ रही है तो आप परिवार में से किसी सदस्‍य को कुछ समय के लिए शिशु को संभालने के लिए कह सकते हैं।

जब आप सो रही हों तो अपने शिशु को अपने आसपास ही सुलाएं। शिशु को हमेशा पीठ के बल ही सुलाना चाहिए।

और पढ़ें ...

References

  1. U.S. Department of Health & Human Services. Newborn care and safety. USA; [internet]
  2. Better health channel. Department of Health and Human Services [internet]. State government of Victoria; Sleep and your baby
  3. Department of Health. Sleep 0 – 3 months. Government of Western Australia; [internet]
  4. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Bedtime habits for infants and children
  5. U.S. Department of Health & Human Services. Keep Your Baby Safe During Sleep. USA; [internet]
ऐप पर पढ़ें