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आजकल की तनावपूर्ण जिंदगी में हर व्यक्ति पर गुस्सा हावी है लेकिन यहां बच्चों ने बड़ों को भी पीछे छोड़ दिया है जिसके कारण बच्चे जिद्दी और चिड़चिड़े हो रहे हैं। बच्चों का जिद्दी होना कोई नयी बात नहीं है। आजकल अभिभावकों का बच्चों को साथ लेकर घूमने जाना खुद के पैर में कुल्हाड़ी मारने के जैसा ही है। ऐसे बच्चों को संभालना भी हर किसीके बस की बात भी नहीं है। अगर बच्चा किसी चीज के लिए जिद पर अड़ जाता है तो वो उस चीज को लेकर ही दम लेता है।

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छोटे बच्चों को हर छोटी बात को लेकर बहलाना - फुसलाना पड़ता है। यहां तक की कुछ माता - पिता बच्चों के जिद्दीपन से निपटने के लिए टोना-टोटका, झाड़-फूंक और बाबा आदि का भी सहारा लेते हैं। कुछ अभिभावकों का मानना ये भी है कि उनका बच्चा ज्यादा लाड़ - दुलार के कारण बिगड़ रहा है। तो क्या वे वाकई अपने बच्चे के जिद्दीपन का कारण जानते हैं? कई बार ऐसा भी होता है जब बच्चों को उनकी मनचाही चीज नहीं मिलती है उस समय भी वे जिद्दी हो जाते हैं। आज हम इस लेख के माध्यम से बताएंगे की बच्चों के जिद्दीपन के असल कारण क्या हैं? बच्चों के जिद्दीपन से निपटने के लिए क्या उपाय करने चाहिए?  

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  1. बच्चे जिद्दी क्यों होते हैं? - Bache ziddi kyu hote hain
  2. बच्चों का जिद्दीपन दूर करने के तरीके - Baccho ka ziddipan dur karne ke tarike

अधिकतर बच्चों में उनकी मांग पूरी न होने के कारण गुस्सा और जिद्दीपन देखने को मिलता है कई बार ऐसा भी हो सकता है कि बच्चों के पास शब्द ही न हो अपनी बात को कहने के लिए जिसके परिणामस्वरूप उसे गुस्सा आ सकता है। अगर बच्चे को भूख या प्यास लगी हो, उसे थकान महसूस हो रही हो, ऐसी स्थिति में बच्चों का स्वभाव जिद्दी होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

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निम्नलिखित तरीके से बच्चों का जिद्दीपन दूर किया जा सकता है:

  • बच्चे अक्सर अपने जिद्दीपन में फर्श पर पैर पटकने लगते हैं, तेज आवाज में चीखने चिल्लाने लगते हैं, कभी-कभी वे चीजें इधर-उधर फेंकने लगते हैं। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार अगर आपका बच्चा भी ऐसे करता है या ज्यादा गुस्सा आता है तो कुछ मिनटों के लिए आपको उस कमरे से निकल जाना चाहिए और जब बच्चा शांत हो जाए तो आप वापस आ सकते हैं। (और पढ़ें - बच्चे को चुप कराने के उपाय)
  • अभिभावकों को अपना आपा नहीं खोना चाहिए शांत रहना चाहिए क्योंकि बच्चे तो बच्चे ही होते हैं लेकिन आप तो बड़े हैं, उनके साथ प्यार से पेश आएं। (और पढ़ें - 3 साल के बच्चे का डाइट प्लान)
  • बच्चों को डांटना नहीं चाहिए, उनसे बहस न करके उन्हें प्यार से समझाएं, हो सके तो उनसे बाद में बात करें। (और पढ़ें - बच्चों में टॉन्सिल का इलाज)
  • बच्चों के साथ किसी तरह की कोई जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए ऐसा करने से उनका स्वभाव चिड़चिड़ा हो सकता है। (और पढ़ें - बच्चों में सिरदर्द का इलाज)
  • अगर कभी बच्चा ज्यादा रोए या जिद करे तो उसका ध्यान दूसरी ओर आकर्षित करना चाहिए।
  • कई बच्चे ऐसे होते हैं जिन्हें लगता है कि रोने से हर मांग पूरी होती है। बच्चे के रोने पर उनकी जिद को पूरा नहीं करना चाहिए ऐसा करना से उन्हें यही भ्रम रहेगा की रोने से सारी जिद पूरी होतीं हैं।
  • बच्चों को छोटी उम्र से अनुशासन में रहना और धैर्य रखना सिखाएं। (और पढ़ें - बच्चों को सिखाएं अच्छी आदतें)

बच्चों के लिए जितना जरूरी प्यार है, उतना ही जरूरी अनुशासन भी है। ऐसा न हो कहीं आपका बच्चा अपने जिद्दीपन की वजह से अनुशासन में रहना और बड़ों का आदर करना भूल ही जाए। बहुत जरूरी है कि बच्चों को बचपन से सारी बातें समझनी चाहिए। बच्चों की जिद पर उनकी मांग बिल्कुल भी पूरी न करें। बच्चों को प्यार से समझाएं।

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