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अम्लरक्तता (एसिडोसिस) - Acidosis in Hindi

कई बार आवाज़ आने में कुछ क्षण का विलम्ब हो सकता है!
अम्लरक्तता
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जब शरीर के तरल पदार्थों में एसिड की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है, तो इसे एसिडोसिस के रूप में जाना जाता है। एसिडोसिस या अम्लरक्तता की समस्या तब होती है जब किडनी और फेफड़े शरीर के पीएच स्तर को संतुलित नहीं रख पाते हैं। शरीर में कई ऐसी प्रक्रियाएं होती हैं जिसमें एसिड का उत्पादन होता हैं। जब पीएच के स्तर में मामूली रूप से अंतर होता है तो फेफड़े और किडनी इस स्थिति का प्रबंधन कर लेते हैं, लेकिन यदि इन अंगों से जुड़ी समस्या हो जाए, शरीर में अतिरिक्त एसिड जमा होने लगता है।

खून की अम्लता का निर्धारण इसके पीएच स्तर को मापकर किया जाता है। कम पीएच का मतलब है कि खून अधिक अम्लीय (एसिडिक) है, जबकि पीएच ज्यादा होने का मतलब आपका खून क्षारीय है। खून का पीएच लगभग 7.4 के आसपास होना चाहिए। अमेरिकन एसोसिएशन फॉर क्लिनिकल केमिस्ट्री (AACC) के अनुसार, एसिडोसिस में  पीएच स्तर 7.35 या इससे कम होता है जबकि क्षारीयता की पहचान 7.45 या इससे अधिक पीएच स्तर से होती है। इन अंकों में भले ही बेहद कम अंतर हो लेकिन पीएच के स्तर में थोड़ा भी अंसतुलन गंभीर स्थिति का कारण हो सकता है। एसिडोसिस के कारण कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं और यह जानलेवा भी हो सकता है।

आसान शब्दों में समझें तो अम्लरक्तता या एसिडोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के तरल पदार्थों में एसिड बहुत अधिक हो जाता है। यह ऐल्कलोसिस (जिसमें शरीर के तरल पदार्थों में बहुत अधिक क्षार होता है) के विपरीत होता है।

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एसिडोसिस के लक्षण - Acidosis Symptoms in Hindi

रेस्पिरेटरी एसिडोसिस और मेटाबॉलिक एसिडोसिस दोनों के कई मिलते जुलते लक्षण हो सकते हैं। हालांकि, एसिडोसिस के लक्षण इसके कारण के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं।

रेस्पिरेटरी एसिडोसिस
रेस्पिरेटरी एसिडोसिस के कुछ सामान्य लक्षणों में शामिल है-

मेटाबॉलिक एसिडोसिस
मेटाबॉलिक एसिडोसिस के कुछ सामान्य लक्षणों में शामिल है-

एसिडोसिस का कारण - Acidosis Causes in Hindi

किडनी और फेफड़े शरीर में एसिड और क्षार नामक रसायनों के संतुलन को बनाए रखते हैं। एसिडोसिस तब होता है जब एसिड ज्यादा बनता है या जब बाइकार्बोनेट (जो कि एक क्षार है) कम हो जाता है। एसिडोसिस को दो भागों में बांटा गया है- रेस्पिरेटरी यानी श्वसन संबंधी या मेटाबॉलिक एसिडोसिस।

शरीर में जब कार्बन डाइऑक्साइड (एक एसिड) की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है तो ऐसे में रेस्पिरेटरी एसिडोसिस विकसित होता है। इस प्रकार का एसिडोसिस आमतौर पर तब होता है जब शरीर पर्याप्त कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर (सांस के माध्यम से) नहीं निकाल पाता है। रेस्पिरेटरी एसिडोसिस के कारणों में शामिल है-

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अम्लरक्तता के जोखिम कारक - Acidosis Risk Factor in Hindi

एसिडोसिस के जोखिम कारकों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं-

अम्लरक्तता का निदान - Acidosis Diagnosis in Hindi

ध्यान रखिए अगर अम्लरक्तता या एसिडोसिस बीमारी का जल्द से जल्द निदान हो जाए और इसका इलाज तुरंत शुरू हो जाए तो रिकवरी में तेजी आ सकती है।

एसिडोसिस के निदान के लिए डॉक्टर कई सारे ब्लड टेस्ट करवाते हैं। आर्टेरियल ब्लड गैस टेस्ट टेस्ट के माध्यम से इस बात का पता चल सकता है कि खून में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर कितना है। यह खून में पीएच स्तर की भी जानकारी देता है। इसके अलावा बेसिक मेटाबॉलिक पैनल टेस्ट की मदद से किडनी के कामकाज और पीएच संतुलन की जांच की जा सकती है। साथ ही यह कैल्शियम, प्रोटीन, ब्लड शुगर और इलेक्ट्रोलाइट स्तर को भी मापता है।

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यदि रेस्पिरेटरी एसिडोसिस का पता चला है, तो डॉक्टर आपके फेफड़ों के स्वास्थ्य की जांच कर सकते हैं। इसके लिए वे छाती का एक्स-रे या पल्मोनरी ​फंक्शनिंग टेस्ट कर सकते हैं।

यदि मेटाबॉलिक एसिडोसिस का संदेह है, तो डॉक्टर पेशाब के नमूने की जांच (यूरिन टेस्ट) कर सकते हैं। एसिडोसिस के कारण को निर्धारित करने के लिए कुछ और टेस्ट की भी आवश्यकता हो सकती है-

  • छाती का एक्स-रे
  • पेट का सीटी स्कैन
  • यूरिन की जांच
  • यूरिन पीएच

एसिडोसिस का इलाज - Acidosis Treatment in Hindi

एसिडोसिस का उपचार इसके प्रकार और कारण पर निर्भर करता है-

(1) मेटाबोलिक एसिडोसिस- बाइकार्बोनेट क्षारीय गुण वाला है जो एसिड के विपरित होता है लेकिन खून में एसिड को संतुलित करने में मदद कर सकता है। शोध में पाया गया है कि सोडियम बाइकार्बोनेट या सोडियम साइट्रेट की गोलियां किडनी डिजीज को बिगड़ने से रोकने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, किसी भी पीड़ित को इस प्रकार का इलाज शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

(2) रेस्पिरेटरी एसिडोसिस- रेस्पिरेटरी एसिडोसिस का इलाज करने के लिए, अंतर्निहित कारण का इलाज करना जरूरी है। हालांकि उपचार इसके कारण के आधार पर अलग-अलग होगा, लेकिन यह सांस संंबंधी परेशानियों को दूर करने पर फोकस करता है। इस स्थिति में ब्रोंकोडाइलेटर्स दी जा सकती है जो कि एक ऐसी दवा है, जो वायुमार्ग या श्वसनली को चौड़ा करने और मांसपेशियों को आराम देने में मदद करती है ताकि सांस लेना आसान हो जाए।

(3) आहार से जुड़ा एसिडोसिस- नैशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार, पशु आधारित प्रोटीन की जगह प्लांट आधारित प्रोटीन बढ़े हुए एसिड लेवल को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा रोजाना खूब फल और सब्जियां खाना भी फायदेमंद है। शोध से पता चला है कि फल और सब्जियों के अधिक सेवन से शरीर में क्षार का स्तर बढ़ सकता है।



अम्लरक्तता (एसिडोसिस) के डॉक्टर

Dr. Abhay Singh Dr. Abhay Singh गैस्ट्रोएंटरोलॉजी
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