एलाजील सिंड्रोम - Alagille Syndrome in Hindi

Dr. Rajalakshmi VK (AIIMS)MBBS

December 23, 2020

December 23, 2020

एलाजील सिंड्रोम
एलाजील सिंड्रोम

एलाजील सिंड्रोम एक आनुवांशिक (जेनेटिक) सिंड्रोम है जो लिवर, हृदय और शरीर के अन्य भागों को प्रभावित कर सकता है। इसमें पित्त नलिकाओं में असामान्यता आ जाती है। दरअसल, सामान्य लिवर की तुलना में जब लिवर में पित्त वाहिनी कम और छोटी होती है तो लिवर संबंधी समस्याएं शुरू हो जाती हैं जिससे लिवर डैमेज (नुकसान) होता है। ये नलिकाएं पित्त (जो वसा को पचाने में मदद करती हैं) को लिवर से पित्ताशय और छोटी आंत तक ले जाती हैं।

एलाजील सिंड्रोम बीमारी में, पित्त नलिकाएं संकीर्ण यानी सिकुड़ी हुई, विकृत (सही तरीके से न बनी हुई) और संख्या में कम हो सकती हैं, जिस वजह से पित्त लिवर में ही बनने और जमा होने लगता है। ऐसा होने पर लिवर में स्कारिंग (किसी चोट या सर्जरी के बाद के निशान) होने लगती है। ये चोट के निशान (स्कार) लिवर के कार्य करने की क्षमता को बाधित करते हैं जिस वजह से लिवर रक्तप्रवाह में से अपशिष्ट पदार्थों को सही तरीके से निकाल नहीं पाता है।

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एलाजील सिंड्रोम के संकेत और लक्षण - Alagille Syndrome Sign and Symptoms in Hindi

आमतौर पर जब शिशु नवजात होता है या फिर बचपन के शुरुआती दिनों में ही एलाजील सिंड्रोम के लक्षण  दिखाई देने लगते हैं। खास बात यह है कि एक ही परिवार के लोगों के बीच भी इस बीमारी के लक्षण और गंभीरता का प्रकार अलग अलग हो सकता है, इसलिए कुछ मामलों में बीमारी के लक्षण हल्के और कुछ में गंभीर हो सकते हैं।

एलाजील सिंड्रोम में लिवर को नुकसान होने की वजह से से त्वचा का रंग और आंखों के सफेद हिस्से का रंग हल्का पीला (पीलिया) होने लगता है। इसके अलावा त्वचा में खुजली, ढीला मल त्याग करना, विकास सही से ना होना और त्वचा में कोलेस्ट्रॉल जमा हो जाने की वजह से उभार आना जैसी समस्याएं शामिल हैं।

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एलाजील सिंड्रोम शरीर के अन्य हिस्सों जैसे हृदय, मस्तिष्क, किडनी, रक्त वाहिकाओं, आंखें, चेहरे और कंकाल (स्केलटन) को भी प्रभावित कर सकता है। इस सिंड्रोम से ग्रस्त लोगों में चेहरे की बनावट में असामान्यता भी दिख सकती है जिसमें चौड़ा व बाहर की तरफ निकला हुआ माथा, अंदर धंसी हुई आंखें और छोटी नुकीली ठुड्डी शामिल है।

एलाजील सिंड्रोम का कारण - Alagille Syndrome Causes in Hindi

एलाजील सिंड्रोम के कारणों में जीन में गड़बड़ी होना शामिल है। यह जेएजी1 (JAG1) और एनओटीसीएच2 (NOTCH2) नामक जीन में गड़बड़ी या बदलाव की वजह से होता है। एलाजील सिंड्रोम से ग्रस्त करीब 88 प्रतिशत से अधिक मामलों में JAG1 जीन में गड़बड़ी की पहचान की गई है, जबकि 1 प्रतिशत से कम मामलों का कारण NOTCH2 नामक जीन में गड़बड़ी था। यह ऑटोसोमल डॉमिनेंट पैटर्न के जरिए माता-पिता से अगली पीढ़ी में ट्रांसफर होता है, जिसका मतलब है कि प्रभावित बच्चे को उसके माता या पिता में से किसी एक से जीन की खराब प्रति मिली है। यह 70 हजार शिशुओं में से किसी 1 को ही होता है।

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एलाजील सिंड्रोम का इलाज - Alagille Syndrome Treatment in Hindi

वैसे तो एलाजील सिंड्रोम का कोई ज्ञात इलाज नहीं है, लेकिन सहायक उपचार की मदद से लक्षणों का प्रबंधन किया जा सकता है।

एलाजील सिंड्रोम के बेस्ट इलाज के लिए डॉक्टरों की टीम की आवश्यक हो सकती है, जिसमें मेडिकल जेनेटिक्स के विशेषज्ञ, पाचन तंत्र और लिवर की समस्याओं के लिए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, किडनी से संबंधित समस्याओं के लिए नेफ्रोलॉजिस्ट, पोषण संबंधित परेशानियों के लिए न्यूट्रिशनिस्ट, हृदय की समस्याओं के लिए कार्डियोलॉजिस्ट, नेत्र समस्याओं के लिए ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट शामिल होते हैं।

इस सिंड्रोम के उपचार में ऐसी दवाएं शामिल होती हैं जो पित्त के फ्लो को बढ़ाती हैं और पोषण और विटामिन से संबंधित समस्याओं को कम करने के लिए सही डाइट का सेवन करना जरूरी होता है। अक्सर कोलेस्टिरमाइन, रिफैम्पिन और नाल्ट्रेक्सोन जैसे दवाएं लेने की सलाह दे जाती है। गंभीर मामलों में, लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत हो सकती है। ध्यान रहे कोई भी दवा बिना किसी डॉक्टर के सलाह के ना लें।



एलाजील सिंड्रोम के डॉक्टर

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