ऐल्पर्स सिंड्रोम - Alpers syndrome in Hindi

Dr. Rajalakshmi VK (AIIMS)MBBS

December 28, 2020

December 28, 2020

ऐल्पर्स सिंड्रोम
ऐल्पर्स सिंड्रोम

ऐल्पर्स सिंड्रोम एक ऐसा न्यूरोलॉजिकल विकार है, जो धीरे-धीरे बढ़ता है। इसकी शुरुआत बचपन में होती है और कई मामलों में तो इसमें लिवर को गंभीर रूप से नुकसान भी पहुंचता है। इस सिंड्रोम से ग्रस्त लोगों में स्पास्टिसिटी, दौरे, मनोभ्रंश इत्यादि दिक्कतें आती हैं। ऐल्पर्स सिंड्रोम के ज्यादातर मामले पीओएलजी (POLG) नामक जीन में म्यूटेशन्स यानी गड़बड़ी की वजह से होते हैं। यह पुरुषों और महिलाओं को समान रूप से प्रभावित करता है। ऐसा माना जाता है कि ऐल्पर्स सिंड्रोम हर 2 लाख की आबादी में सिर्फ 1 व्यक्ति को ही होता है।

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ऐल्पर्स सिंड्रोम के संकेत और लक्षण क्या हैं? - Alpers syndrome Symptoms in Hindi

ऐल्पर्स सिंड्रोम के लक्षण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकते हैं। इसके लक्षणों में शामिल है:

  • एरिफ्लेक्सिया
  • गतिभंग (अटैक्सिया)
  • बाइलैटेरल टॉनिक क्लोनिक सीजर (दौरे)
  • कोरिओएथेटोसिस
  • कोमा

इसके अलावा ऐल्पर्स सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति में 3 अन्य विशिष्ट लक्षण भी दिखायी देते हैं:

  • बार-बार पड़ने वाले दौरे जिसमें उपचार लेने के बाद भी सुधार नहीं होता है
  • मानसिक और गतिविधि संबंधित क्षमताओं की हानि
  • लिवर रोग

ऐल्पर्स सिंड्रोम का निदान कैसे होता है? - Alpers syndrome Diagnosis in Hindi

किसी भी आनुवंशिक या दुर्लभ बीमारी का निदान करना अक्सर मुश्किल भरा हो सकता है, लेकिन डॉक्टर आमतौर पर निदान की पुष्टि के लिए किसी व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री (चिकित्सक द्वारा पिछली बीमारियों व उनके इलाज से जुड़े प्रश्न पूछना), बीमारी के लक्षण, शारीरिक जांच और लैब टेस्ट के परिणामों का आकलन करते हैं।

जैसा कि हमने पहले ही बताया है ऐल्पर्स सिंड्रोम की समस्या बचपन में शुरू होती है और 3 माह से लेकर 5 साल के बीच किसी भी उम्र में दौरे दिखने लगते हैं। इसके अलावा मोटर गतिविधियों में समन्वय की कमी, आशिंक रूप से लकवा, दौरे और मांसपेशियों का फड़कना जैसे लक्षणों से भी डॉक्टर ऐल्पर्स सिंड्रोम की पहचान कर सकते हैं।

जरूरत के अनुसार, इलेक्ट्रोएन्सेफैलोग्राफी (ईईजी) टेस्ट भी किया जा सकता है। इसके माध्यम से मस्तिष्क के विद्युत आवेगों को रिकॉर्ड किया जाता है। इसमें पतली तारों में डिस्क लगी होती हैं जिन्हें खोपड़ी पर लगाया जाता है। यह डिस्क विद्युत आवेगों की गतिविधियों को सिग्नल के रूप में कंप्यूटर को भेजती हैं और डॉक्टर को यह पता लगाने में आसानी होती है कि ब्रेन में सब कुछ सामान्य है या नहीं।

(और पढ़ें - लिवर फंक्शन टेस्ट क्या होता है)

ऐल्पर्स सिंड्रोम में अनुमानित जीवनकाल - Alpers syndrome Life Expectancy in Hindi

ऐल्पर्स सिंड्रोम वाले व्यक्तियों में रोग का निदान सटीक तरह से नहीं हो पाता है। इस बीमारी से पीड़ित लोगों की जीवन के पहले दस वर्षों में ही मृत्यु हो जाती है। चूंकि इसमें लगातार दौरे की समस्या होती है इसलिए यही मौत की मुख्य वजह बनता है। मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, और तंत्रिका से संबंधित परेशानियों की वजह से लिवर और कार्डियोरेस्पिरेटरी फेलियर भी हो सकता है।

(और पढ़ें- बच्चों में दौरे आना)

ऐल्पर्स सिंड्रोम का इलाज कैसे किया जाता है? - Alpers syndrome Treatment in Hindi

ऐल्पर्स सिंड्रोम का कोई उपचार नहीं है और ना ही इसे बढ़ने से रोका जा सकता है, हालांकि इसके कुछ लक्षणों का प्रबंधन किया जा सकता है ताकि रोगी को आराम मिल सके। ऐसी कई दवाइयां हैं जो दौरे की आवृत्ति को कम करने, मांसपेशियों में ऐंठनजोड़ों के दर्द से निपटने और संक्रमण का इलाज करने में मदद कर सकती हैं।

कुछ स्थितियों जैसे स्पास्टिसिटी में फिजिकल थेरेपी मददगार साबित हो सकती है। इसके अलावा मालिश की मदद से अक्सर तनाव को कम करने में मदद मिलती है। ठोस उपचार न होने के बावजूद सहायक उपचार के जरिये कुछ हद तक मरीज को सहज महसूस कराया जा सकता है।



ऐल्पर्स सिंड्रोम के डॉक्टर

Dr. Abhay Singh Dr. Abhay Singh गैस्ट्रोएंटरोलॉजी
1 वर्षों का अनुभव
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