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गठिया यानी आर्थराइटिस की समस्या एक या दो जोड़ों को प्रभावित करती है। जोड़ों में सूजन के कारण ये बीमारी उत्पन्न होती है। बता दें, कि इससे ज्यादातर उम्रदराज लोग ग्रसित होते हैं लेकिन गठिया के कुछ लक्षण बच्चों या वयस्कों में भी देखे जा सकते हैं। गठिया दुनिया में सबसे आम मस्कुलोस्केलेटल (मांसपेशियों या हड्डियों में दर्द) स्थिति है, लेकिन यह पूरी तरह से सच नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह जान लें कि आर्थराइटिस एक नहीं बल्कि कई बीमारियों का समूह है।
 
100 बीमारियों का एक समूह है गठिया 
 
गठिया की तरह ही रूमेटाइड आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून डिजीज है जिसमें जोड़ों में अत्यधिक यूरिक एसिड बनने लगता है, हालांकि इसके कारण व लक्षण एवं इलाज में भिन्नता हो सकती है। यूएसए की आर्थराइटिस फाउंडेशन के अनुसार, गठिया वास्तव में कम से कम 100 बीमारियों का एक समूह है जिसमें जोड़ों को हिलाने में दिक्कत होती है और जोड़ों में दर्द के साथ ही सूजन भी रहती है।

विकलांग हो रहे हैं लोग 

जानकर हैरानी होगी, लेकिन विश्व स्तर पर कुल विकलांगों में से 19.2 प्रतिशत लोग केवल मस्कुलोस्केलेटल विकारों की वजह से विकलांग हुए हैं। बायो-मेड (एक ओपन-एक्सेस जर्नल) में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, कम और मध्यम-आय वाले देशों में करीब 90 प्रतिशत लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं।   
 
भारत में गठिया के मरीजों की संख्या 

भारत में आर्थराइटिस से पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा प्रभावित होती हैं। ओडिशा में 2019 के किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि इस स्थिति के बारे में गलत या अपूर्ण जानकारी के कारण रूमेटाइड आर्थराइटिस से ग्रस्त महिलाएं दवा का सेवन और उचित देखभाल नहीं करती हैं। 

काम को करता है प्रभावित  

चूंकि गठिया सभी उम्र के लोगों को प्रभावित करता है इसलिए ऑफिस जाने वाले लोगों के काम पर भी इस स्थिति का प्रभाव पड़ता है। यूके में 2005 के एक अध्ययन में पाया गया कि रूमेटाइड आर्थराइटिस से ग्रस्त करीब 66% लोग गठिया के दर्द और सूजन की वजह से साल में औसतन 39 दिन छुट्टी पर थे। यह शोध ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस जर्नल, ऑक्यूपेशन मेडिसिन में प्रकाशित हुआ था। अगस्त 2019 में ऑस्ट्रेलिया में हुए एक अध्ययन में ये बात सामने आई कि 25 से 64 वर्ष के लोगों की करियर ग्रोथ पर गठिया का बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

 
अगर किसी मामले में गठिया को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है तो इस स्थिति में इसमें होने वाले दर्द और सूजन को नियंत्रित किया जा सकता है लेकिन इससे पहले कि रोगी उपचार के किसी नए तरीके को अपनाएं, उन्हें यह जानना जरूरी है कि वे किस प्रकार के गठिया की दिक्कतों से जूझ रहे हैं। फिलहाल गठिया के कुछ प्रकार निम्नलिखित बताएं जा रहे हैं:
 
ऑस्टियोआर्थराइटिस

ये (ऑस्टियोआर्थराइटिस) सबसे साधारण आर्थराइटिस है, इसमें जोड़ों में मौजूद तरल पदार्थ कम होने लगता है। आमतौर पर, यह उम्र बढ़ने के साथ होता है। इसमें जोड़ों में कठोरता आ जाती है और दर्द रहता है।

रूमेटाइड आर्थराइटिस 

रूमेटाइड आर्थराइटिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) शरीर की कोशिकाओं को नष्ट करने लगती है और ऐसा होने से दर्द व सूजन जैसी दिक्क्त हो सकती है। यह जोड़ों के दर्द और सूजन के साथ पूरे शरीर को प्रभावित करता है। इसके लक्षणों में बुखार, थकान, वजन कम होना, सुबह जागने के करीबन एक घंटे बाद तक भी जोड़ों में जकड़न महसूस करना शामिल हैं।

सोरियाटिक आर्थराइटिस 

रूमेटाइड आर्थराइटिस की ही तरह, सोरियाटिक आर्थराइटिस भी एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसे जोड़ों की सूजन से पहचाना जा सकता है। सोरियाटिक गठिया का दर्द शरीर के एक तरफ होता है। इससे 30 से 55 वर्ष की उम्र तक के लोग प्रभावित होते हैं और यह पुरुषों व महिलाओं दोनों को हो सकता है।

गाउट

गाउट (अचानक जोड़ों में दर्द होना) मुख्य रूप से हाइपरयूरिसीमिया (यूरिक एसिड का बढ़ना) के कारण होता है। यू.एस. के रोग नियंत्रण केंद्र के अनुसार, गाउट एक समय पर एक ही जोड़ को प्रभावित करता है। आमतौर पर यह सबसे पहले पैर की अंगुली को नुकसान पहुंचाता है।
इसके अधिकांश मामले युवा वयस्कों (30 वर्ष से कम उम्र) में देखे जा सकते हैं। 
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