वैज्ञानिकों ने प्रोटीन की मदद से अस्थमा के इलाज के लिए एक नया और कारगर तरीका खोजने का दावा किया है। दरअसल, एक रिसर्च के तहत शोधकर्ताओं को पता चला है कि एक अलग प्रकार के प्रोटीन का सेवन करने से अस्थमा का इलाज बेहतर किया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक, इस प्रोटीन का नाम कैस्पेज-11 है जो अस्थमा से लड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र से जुड़ी पत्रिका ‘नेचर कम्युनिकेशन’ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, आयरलैंड के 'ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन' के शोधकर्ताओं ने यह रिसर्च किया है। अध्ययन के तहत शोधकर्ताओं ने पाया कि शरीर में पाए जाने वाले कुछ विशेष बैक्टीरिया में पाए जाने वाले घटक 'एलपीएस' के आपस में जुड़ने पर कैस्पेज-11 प्रोटीन सक्रिय होता है। यह प्रोटीन अस्थमा के दौरान फेफड़े में होने वाली सूजन और जलन के प्रभाव को कम करता है।

(और पढ़ें-  जानें अस्थमा के इलाज में कैसे कारगर साबित हो सकती है जूस थेरेपी)

क्या कहते हैं शोधकर्ता?
रिसर्च के प्रमुख शोधकर्ता ज्बिगनियु जैसलोना का कहना है कि जो कोशिकाएं हमारी शरीर में ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकती हैं, कैस्पेज-11 उन उनको खत्म करने में सहायक साबित हो सकता है। जैसलोना ने यह भी बताया कि कैस्पेज-11 प्रोटीन अस्थमा के जरिये फेफड़े में होने वाली सूजन को फैलने से रोक सकता है। उन्होंने कहा कि अस्थमा के दौरान फेफड़े में होने वाली सूजन की वजह से ही व्यक्ति को सांस लेने दिक्कत आती है और यह प्रोटीन इस समस्या पर सबसे पहले असर करता है। जैसलोना की मानें तो चूंकि अस्थमा में सामान्य लक्षणों का पता चल जाता है, इसलिए अस्थमा को रोका जा सकता है। लेकिन अस्थमा के गंभीर चरण में पहुंचने पर इसका इलाज बहुत मुश्किल हो जाता है।

(और पढ़ें- अस्थमा का अटैक, जानें क्या है प्राथमिक उपचार)

क्या है अस्थमा?
अस्थमा सांस संबंधी रोग है। इसमें मरीज को सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है। अस्थमा में सांस की नलियों में सूजन आ जाती है। इसके कारण श्वसनमार्ग संकुचित हो जाता है या सिकुड़ जाता है। श्वसनमार्ग के सिकुड़ जाने की स्थिति में सांस लेने में कमी महसूस होती है। ऐसे में सांस लेते समय आवाज आती है। इसके अलावा सीने में जकड़न और खांसी आदि समस्याएं होने लगती हैं।

अस्थमा के लक्षण
अस्थमा के चलते मरीज में दो प्रकार के लक्षण दिखते हैं। पहला बाहरी और दूसरा आंतरिक अस्थमा। बाहरी अस्थमा बाहरी एलर्जी के प्रति एक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया है, जो कि किसी जानवर और धूल जैसे बाहरी एलर्जिक चीजों के कारण होती है। वहीं, इसकी तुलना में आंतरिक अस्थमा कुछ रासायनिक तत्वों के (जाने-अनजाने) सेवन की वजह से होता है। जैसे कि सिगरेट का धुआं, पेंट वेपर्स आदि। इसके अलावा अस्थमा के कुछ अन्य लक्षण निम्नलिखित हैं-

  • बलगम वाली या बिना बलगम के सूखी खांसी होना
  • सीने में जकड़न जैसा महसूस होना
  • सांस फूलना या सांस लेने में कठिनाई महसूस होना
  • सांस लेते या बोलते समय एक घरघराहट जैसी आवाज आना
  • रात में या सुबह के समय स्थिति और गंभीर हो जाना
  • ठंडी हवा में सांस लेने से स्थिति और गंभीर हो जाना
  • जोर-जोर से सांस लेना, जिस कारण से थकान महसूस होना
  • हालत ज्यादा गंभीर होने पर कई बार उल्टी महसूस होना

(और पढ़ें- कैसे जानें कि पड़ने वाला है अस्थमा का अटैक)

और पढ़ें ...
cross
डॉक्टर से अपना सवाल पूछें और 10 मिनट में जवाब पाएँ