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गतिभंग (अटैक्सिया) क्या है? 

अटैक्सिया से ग्रसित लोग अपनी इच्छा से करे जाने वाले कामों को, मांसपेशिओं पर नियंत्रण ना होने की वजह से, सही ढंग से करने में असमर्थ होते हैं जैसे की चलना या कोई वास्तु उठाना। इन सब के साथ ही अन्य समस्याएं भी दिख सकती है - जैसे गतिविधियां करने में मुश्किलें, बोलने में परेशानी, आखों की गतिविधि में समस्या या निगलने में कठिनाई का सामना।  

अगर सेरिबैलम (दिमाग का वो हिस्सा जो मांसपेशियों की गतिविधियों को नियंत्रित करता है) को नुकसान पहुँचता है तो अटैक्सिया शरीर में टिका रह सकता है। शराब ज़्यादा पीना, स्ट्रोक, ट्यूमर, सेरेब्रल पाल्सी और मल्टीप्ल स्क्लेरोसिस जैसी स्तिथियाँ भी एटैक्सिया का कारण बन सकती हैं। दोषपूर्ण जीन, जो आपमें, आपके परिवार से आया हो, एटैक्सिया का कारण बन सकता है।

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एटैक्सिया का उपचार, उसके होने के कारण पर निर्भर करता है। अडेवटिव डिवाइसेस, जैसे वॉकर, आपको अपने रोज़मर्रा के कामों को करने में मदद कर सकती हैं, जिससे आपको दूसरे पर निर्भर होने की जरूरत नहीं पड़ती है। 

(और पढ़ें - फ्रेडरिक अटैक्सिआ क्या है)

  1. गतिभंग (अटेक्सिया) के प्रकार - Types of Ataxia in Hindi
  2. गतिभंग (अटेक्सिया) के लक्षण - Ataxia Symptoms in Hindi
  3. गतिभंग (अटेक्सिया) के कारण - Ataxia Causes in Hindi
  4. गतिभंग (अटेक्सिया) का परीक्षण - Diagnosis of Ataxia in Hindi
  5. गतिभंग (अटेक्सिया) का इलाज - Ataxia Treatment in Hindi
  6. गतिभंग (अटैक्सिया) के डॉक्टर

एटैक्सिया, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (दिमाग के बीचों-बीच पाए जाने वाला एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा) के विभिन्न क्षेत्रों को नुकसान पहुँचने से होता है। डॉक्टर इसे मस्तिष्क के विशिष्ट हिस्सों हूई हानि के प्रभावों के आधार पर इसे अलग-अलग श्रेणी में बाँटते हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं:

1. सेरेबेलर एटैक्सिया

सेरेबलम आपके दिमाग का वो हिस्सा है जो संतुलन और सभी अंगो का आपस में तालमेल करवाने का मुख्य कारण होता है। यदि आपके सेरिबैलम को कोई हानि पहुँचती है तो आपको सेरिबेलर एटैक्सिया हो सकता है। कभी-कभी यह आपके रीढ़ की हड्डी को भी प्रभावित कर सकता है। यह एटैक्सिया का सबसे आम रूप है।

(और पढ़ें - रीढ़ की हड्डी में दर्द का इलाज)

2. सेंसरी एटैक्सिया

सेंसरी एटैक्सिया आपके पेरीफ़ेरल नर्वस सिस्टम या रीढ़ की हड्डी की नसों  में पहुँचे नुकसान के कारण होता है। यह मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के बाहर पाए जाने वाले तंत्रिका तंत्र का हिस्सा है। 

जब आपको सेंसरी एटैक्सिया होता है, तो आपको अपनी पैरों और टांगो में हर तरह की प्रतिक्रियाओं का कम आभास होता है जिससे आपको ये भी नहीं पता चल पाता है कि शरीर धरती को कहाँ छू रहा है। इसे प्रोप्ररियोसेप्टिव एटैक्सिया भी कहा जाता है।

(और पढ़ें - रीढ़ की हड्डी सम्बंधित योग)

3. वेस्टिबुलर एटैक्सिया 

वेस्टिबुलर एटैक्सिया आपके वेस्टिबुलर सिस्टम को प्रभावित करता है। यह सिस्टम (प्रणाली) आपके कान के अंदर वाले हिस्से और कान के भीतर जा रहे रास्ते को मिलाकर बना है, जिसमें तरल पदार्थ होता है। ये सिस्टम आपके सिर की गतिविधियों को समझकर नियंत्रण करने में मदद करता है, साथ ही आपके शरीर का संतुलन बनाए रखता है।  

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अटेक्सिया समय के साथ विकसित हो सकता है या अचानक भी हो सकता है। एटैक्सिया कई न्यूरोलॉजिकल विकारों का संकेत है।  इसमें आपको निम्न लक्षण देखने को मिल सकते हैं - 

  • सही प्रकार से संतुलन ना कर पाना 
  • संतुलित चाल का ना होना और उसके कारण चलते वक़्त ठोकरें खाना 
  • मांसपेशियों की मदद से किये जाने वालो कामों में दिक्कत का सामना करना जैसे शर्ट के बटन लगाना, खाने में या लिखने में दिक्कत महसूस करना, आदि। (और पढ़ें - मांसपेशियों में दर्द के घरेलू उपाय)
  • बोलने में समस्या 
  • आखों में अपने आप गतिविधियाँ होना (nystagmus)
  • निगलने में कठिनाई

(और पढ़ें- डिस्लेक्सिया क्या है)

डॉक्टर को कब दिखाएँ - 

​यदि आपको ऐसी स्थितियों के होने का नहीं पता है जो एटैक्सिया को जन्म दे सकती हैं जैसे मल्टीपल स्क्लेरोसिस, तो निम्न स्तिथियों को महसूस करने पर डॉक्टर को दिखाएं - 

  • संतुलन खो देना  
  • हाँथों, पैरों या बाजुओं में आपसी तालमेल ना होना 
  • चलने में कठिनाई 
  • बोलने से संबंधित समस्या (और पढ़ें - बोलने में दिक्कत का इलाज)
  • निगलने में कठिनाई 


(और पढ़ें - कलर ब्लाइंडनेस का इलाज)

 

दिमाग का वो हिस्सा जिसपर मांसपेशिओं का नियंत्रण निर्भर करता है  (सेरिबैलम), उसकी तंत्रिका कोशिकाओं के नष्ट होने से या नुकसान होने  से एटैक्सिया होता है। सेरिबैलम के दो हिस्से होते हैं जिसमें से दायाँ वाला शरीर के दाएं तरफ के हिस्से को नियंत्रित करता है और बायाँ वाला बाएं तरफ के हिस्से को नियंत्रित करता है।  

ऐसे रोग जो रीढ़ की हड्डी और पेरिफेरल नर्व्स  को नुकसान पहुँचाते हैं, वे रोग भी एटैक्सिया का कारण बन सकते हैं। एटैक्सिया के कारणों में शामिल हैं:

  • सिर की चोट
    मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी पर अगर झटके से चोट लगती है तो उससे सडन-ऑनसेट अटैक्सिआ होता है जिसे एक्यूट सेरिबेलर एटैक्सिया भी कहा जाता है। (और पढ़ें - सिर की चोट का इलाज)
     
  • स्ट्रोक 
    जब आपके मस्तिष्क के किसी हिस्से में खून पहुँचने में परेशानी होती है या गंभीर रूप से कमी आ जाती है, जिससे मस्तिष्क कोशिकाएं पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं ले पाती हैं, तब इस कारण से एटैक्सिया होता है। (और पढ़ें - स्ट्रोक का इलाज)
     
  • ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (टीआईए) 
    आपके दिमाग के हिस्से में अस्थायी रूप से खून की कमी के कारण टीआईए होता है। आम तौर पर टीआईए केवल कुछ ही मिनटों तक रहता है।  
     
  • सेरेब्रल पॉलसी - 
    यह बच्चे के दिमाग में प्रारंभिक विकास के दौरान - बच्चे के जन्म से पहले, जन्म के दौरान या जन्म के तुरंत बाद हुए विकारों का एक समूह है - जो शरीर की गतिविधियों का नियंत्रण करने वाली क्षमतााओं को प्रभावित करता है। (और पढ़े - सेरेब्रल पाल्सी क्या है)
     
  • मल्टीपल स्क्लेरोसिस (एमएस)
    एमएस एक गंभीर बीमारी है जो आपके केंद्रीय तंत्रिका प्रणाली (central nervous system) को प्रभावित करती है। (और पढ़ें- मल्टीपल स्क्लोरोसिस क्या है)
     
  • चेचक (चिकनपॉक्स)   
    चिकनपॉक्स और अन्य वायरल संक्रमणों की असामान्य जटिलता के कारण अटेक्सिआ हो सकता  है। जब संक्रमण सही होने वाला होता है, आमतौर पर ये तब देखने को मिलता है। एटैक्सिया समय के साथ ठीक हो जाता है
     
  • पैरानियोप्लास्टिक सिंड्रोम - 
    कैंसर वाले ट्यूमर (नियोप्लाज्म), आमतौर पर फेफड़ों का कैंसर, ओवरियन कैंसर, ब्रैस्ट कैंसर या लिम्फैटिक कैंसर ,के होने की वजह से कुछ दुर्लभ और डीजनरेटिव विकार उत्पन्न हो सकते हैं। कैंसर के पता लगने के महीनों या साल पहले एटैक्सिया दिखाई दे सकता है।
     
  • टयूमर - 
    मस्तिष्क में किसी तरह के ट्यूमर का होना (जिसमे कैंसर हो भी सकता है और नहीं भी) सेरिबैलम को नुकसान पहुँचाता है। (और पढ़ें - ब्रेन ट्यूमर का इलाज)
     
  • टॉक्सिक रिएक्शन - 
    एटैक्सिया कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव से भी हो सकता है। शराब और नशीली दवाओं। .................., (जैसे पतला पेंट), भी एटैक्सिया का कारण बन सकती है। (और पढ़ें - शराब के नुकसान)
     
  • विटामिन ई की कमी या विटामिन बी -12 की कमी 
    पर्याप्त विटामिन ई या विटामिन बी 12 ना मिलने से एटैक्सिया हो सकता है।

    वयस्कों में स्पोराडिक एटैक्सिया होने का कोई विशिष्ट कारण नहीं मिल पाता है। इसे स्पोराडिक डीजेनेरेटिव एटैक्सिया के रूप में जाना जाता है, जो कई रूपों में शरीर में हो सकता है , जैसे कि मल्टीपल सिस्टम अट्रोफी (multiple system atrophy), प्रोग्रेसिव डिजनरेटिव डिसऑर्डर ( progressive, degenerative disorder) आदि।(और पढ़ें - विटामिन ई की कमी से होने वाले रोग)

यदि आपको अटैक्सिया होता है, तो आपके डॉक्टर इलाज योग्य कारणों की जाँच करेंगे। शारीरिक परीक्षण और न्यूरोलॉजिकल परीक्षण करने के अलावा, आपकी याददाश्त और एकाग्रता, दृष्टि, सुनने की क्षमता, संतुलन करने की क्षमता की जांच सहित, आपके डॉक्टर कुछ लैब टेस्ट करवा सकते हैं, जिसमें निम्न शामिल हैं:

  • इमेजिंग स्टडीज (Imaging studies)
    आपके मस्तिष्क की कम्पूटराइज़्ड टोमोग्राफी (सीटी स्कैन) या मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग (एमआरआई), संभावित कारणों की पुष्टि करने में मदद कर सकती हैं। एमआरआई कभी-कभी एटैक्सिया से ग्रसित लोगों में सेरिबैलम की सुकड़न और दूसरी मस्तिष्क संरचनाओं को दिखा सकता है। (और पढ़ें - एमआरआई स्कैन क्या है)
  • लम्बर पेंचर (Lumbar puncture (spinal tap))
    रीढ़ की हड्डी और दिमाग की सुरक्षा करने वाले तरल पदार्थ के नमूने को निचली पीठ वाले हिस्से में एक सुई डालकर निकाला जाता है और उसकी जांच की जाती है। (और पढ़ें - बायोप्सी का मतलब)
     
  • जैनेटिक टैस्टिंग (Genetic testing)
    आपका डॉक्टर यह जांचने के लिए की कहीं आपको या आपके बचे को अनुवांशिक अटेक्सिया तो नहीं है, अनुवांशिक परीक्षण की जांच के लिए बोल सकता है। जीन परीक्षण कई वंशानुगत अटेक्सिया के लिए उपलब्ध  हैं, पर सभी के लिए उपलब्ध नहीं हैं।

(और पढ़ें - ब्रोंकोस्कोपी क्या है)

एटैक्सिया का विशेष रूप से कोई इलाज नहीं है। कुछ मामलों में, इसके कारणों का इलाज एटैक्सिया को दूर करता है। दूसरे कुछ मामलों में, एटैक्सिया जब चिकनपॉक्स या अन्य वायरल संक्रमण से होता है, तब यह समय के साथ अपने आप सही हो जाता है। डॉक्टर आपको अडेवटिव डिवाइसेज़ (जिनसे रोज़मर्रा के कामों को खुद से कर पाने में मदद मिलती है) का प्रयोग करने के लिए या थेरेपी लेने के लिये बोल सकते हैं , जैसे कि  -

अडेवटिव डिवाइसेज़

मल्टीपल स्क्लेरोसिस या सेरेब्रल पाल्सी जैसे कारणों से हुआ अटैक्सिया अधिकतर केसीज़ में इलाज योग्य नहीं होता है। उस स्थिति में, आपके डॉक्टर, आपको अडेवटिव डिवाइसेज़ इस्तेमाल करने को कह सकते हैं। जिसमें शामिल है:

थेरेपीज़ -

आपको कुछ थेरेपीज़ से लाभ हो सकता है, जिनमें निम्न शामिल हैं:

  • फिज़िकल थेरेपी - आपको ताकत बनाने और गतिशीलता बढ़ाने में मदद करती है। (और पढ़ें - फिजिकल थेरेपी क्या है)
  • ओक्युपेशनल थेरेपी-  दैनिक जीवन कार्यों  में आपकी मदद करती है, जैसे कि खुद ही खाना खा लेना। (और पढ़ें - थेरेपी के फायदे)
  • स्पीच थेरेपी  - बोलने और  निगलने की समस्याओं को दूर करने मदद करती है।

(और पढ़ें - स्पीच थेरेपी क्या है)

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