बैलर-गेरोल्ड सिंड्रोम - Baller Gerold Syndrome in Hindi

Dr. Nadheer K M (AIIMS)MBBS

December 16, 2020

December 16, 2020

बैलर-गेरोल्ड सिंड्रोम
बैलर-गेरोल्ड सिंड्रोम

बैलर-गेरोल्डसिंड्रोम (बीजीएस) एक दुर्लभ स्थिति है, जो मुख्य रूप से खोपड़ी और लिंब्स (शरीर का बड़ा हिस्सा जैसे हाथ पैर) के विकास को प्रभावित करती है। बैलर-गेरोल्ड सिंड्रोम में खोपड़ी की कुछ हड्डियों में प्रीमैच्योर फ्यूजन (दो हड्डियों का आपस में जुड़ना) हो जाता है। इस स्थिति को क्रेनिओसिनोस्टोसिस नाम से जाना जाता है, जो कि एक जन्मजात स्थिति है, जिसमें खोपड़ी के सूचर समय से पहले बंद हो जाते हैं। इसके अलावा हाथों और भुजाओं में हड्डियों का विकास सही से ना होना भी इसकी एक पहचान है।

बैलर-गेरोल्ड सिंड्रोम के लक्षण क्या हैं? - Baller-Gerold Syndrome Symptoms in Hindi

बैलर-गेरोल्ड सिंड्रोम के लक्षणों में निम्न शामिल हैं :

  • प्रीमैच्योर फ्यूजन, जिसमें सिर का आकार असामान्य, माथा बाहर की ओर निकला हुआ और आंखें उभरी हुई दिखाई दे सकती हैं।
  • हाथ व भुजाओं का विकास सही से ना होना
  • फैली हुई आंखें या आंखों के बीच की जगह ज्यादा होना
  • छोटा मुंह
  • नाक का सही से विकास ना होना

पीड़ित को त्वचा संबंधित परेशानियां भी हो सकती हैं, जिसमें कहीं-कहीं पर त्वचा का रंग चले जाना, स्किन ब्रेकडाउन (त्वचा में रक्त का प्रवाह सीमित हो जाना) होना शामिल हैं। बीजीएस से पीड़ित लोगों को विकास में देरी हो सकती है और ऐसे लोगों में कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

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बैलर-गेरोल्ड सिंड्रोम का कारण क्या है? - Baller-Gerold Syndrome Causes in Hindi

आमतौर परआरईसीक्यूएल4 नामक जीन में गड़बड़ी या बदलाव बैलर-गेरोल्ड सिंड्रोम का कारण होता है। यह एक ऑटोसोमल रिसेसिव पैटर्न के जरिये मिलने वाला सिंड्रोम है। ऑटोसोमल रिसेसिव का मतलब है कि आपको अपने माता-पिता दोनों से जीन की खराब प्रति मिली हो।

आरईसीक्यूएल4 जीन आरईसीक्यू हेलीकेसेज (एक तरह का प्रोटीन) बनाने के लिए निर्देश देता है। हेलीकेसेज ऐसे एंजाइम होते हैं जो डीएनए से जुड़ते हैं। डीएनए की स्थिरता को बनाए रखने में आरईसीक्यूएल4 जीन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बैलर-गेरोल्ड सिंड्रोम का निदान कैसे किया जाता है? - Baller-Gerold Syndrome ka Diagnosis in Hindi

बैलर-गेरोल्ड सिंड्रोम का निदान एक नैदानिक परीक्षण, प्रभावित व्यक्ति के लक्षणों और जेनेटिक टेस्टिंग के द्वारा किया जाता है। बीजीएस का निदान गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड और प्रसवपूर्व परीक्षण (प्रीनेटल टेस्टिंग) द्वारा किया जा सकता है। इसके ​अलावा जेनेटिक टेस्टिंग रजिस्ट्री (जीटीआर) इस स्थिति के लिए आनुवंशिक परीक्षणों की जानकारी प्रदान करने में मदद कर सकती है।

बैलर-गेरोल्ड सिंड्रोम का इलाज कैसे किया जाता है? - Baller-Gerold Syndrome ka Treatment in Hindi

बैलर-गेरोल्ड सिंड्रोम का इलाज लक्षणों का प्रबंधन करना है। बैलर-गेरोल्ड सिंड्रोम के उपचार में क्रानियोसिनोस्टोसिस के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा कई मामलों में हाथ को पहुंचे नुकसान को ठीक करने के लिए भी अतिरिक्त सर्जरी का सुझाव दिया जाता है।

रोथमंड-थॉमसन सिंड्रोम और रैपिडिलीनो (RAPADILINO) सिंड्रोम के लक्षण बैलर-गेरोल्ड सिंड्रोम के लक्षणों के साथ ओवरलैप कर सकते हैं। बता दें, यह दोनों ही बीमारियां आरईसीक्यूएल4 नामक जीन में गड़बड़ी की वजह से ही होती हैं।

विशेषज्ञ जो बैलर-गेरोल्ड सिंड्रोम से ग्रस्त किसी व्यक्ति की देखभाल में शामिल हो सकते हैं, उनमें शामिल हैं :

  • क्रैनियोफेशियल सर्जन
  • न्यूरोसर्जन
  • फिजिकल थेरेपिस्ट
  • ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट
  • त्वचा विशेषज्ञ

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बैलर-गेरोल्ड सिंड्रोम के डॉक्टर

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