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ब्रेस्ट (स्तन) में दर्द को मास्टालजिया के नाम से भी जाना जाता है। इस स्थिति में महिलाओं को ए​क या दोनों स्तन में दर्द या असहज महससू होता है। हालांकि, यह युवा महिलाओं में ज्यादा आम है। इसमें होने वाला दर्द लगातार, हल्का या तेज, चुभन वाला हो सकता है। यह कई मामलों में गंभीर रूप भी ले सकता है और बगल या कांख की ओर बढ़ता है। आमतौर पर ऐसा देखा गया है कि यह मासिक धर्म से दो हफ्ते पहले शुरू होता है और मासिक धर्म के करीब आते आते यह स्थिति बदतर होने लगती है और मासिक धर्म के खत्म होने के साथ ब्रेस्ट (स्तन) में दर्द की स्थिति भी ठीक हो जाती है। ब्रेस्ट (स्तन) में दर्द के सामान्य कारणों में शामिल हैं :

होम्योपैथी में ब्रेस्ट (स्तन) में दर्द के प्रबंधन के लिए कई उपचार उपलब्ध हैं। इन उपायों में से कुछ मर्क्यूरियस सॉल्यूबिलिस, फाइटोलेका डिसेंड्रा, फॉस्फोरस, फेलन्ड्रिअम एक्वाटिकम, लेपिस अल्बस, लैक्टिकम एसिडम, क्रोटोन टिग्लियम, कोनियम मैक्यूलेटम, सेमिकिफुगा रेसमोसा, काइमाफिला अम्बेलेटा, कैलकेरिया कार्बोनिका, ब्रायोनिया एल्बा, बेलाडोना और एस्टेरियस रुबेन हैं।

  1. ब्रेस्ट (स्तन) में दर्द के लिए होम्योपैथिक दवाएं - Breast Pain ke liye homeopathic medicine
  2. होम्योपैथी के अनुसार ब्रेस्ट (स्तन) में दर्द के लिए आहार और जीवनशैली में बदलाव - Breast Pain ke liye khanpan aur jeevan shaili me badlav
  3. ब्रेस्ट (स्तन) में दर्द के लिए होम्योपैथिक दवाएं और उपचार कितने प्रभावी हैं - Breast Pain ki homeopathic medicine kitni effective hai
  4. ब्रेस्ट (स्तन) में दर्द के लिए होम्योपैथिक दवा के नुकसान और जोखिम - Breast Pain ki homeopathic medicine ke nuksan
  5. ब्रेस्ट (स्तन) में दर्द के लिए होम्योपैथिक उपचार से संबंधित टिप्स - Breast Pain ki homeopathic treatment se jude tips

मर्क्यूरियस सॉल्यूबिलिस
सामान्य नाम :
क्विकसिल्वर
लक्षण : इसका उपयोग मुख्य रूप से कमजोरी, सूजन और जलन के इलाज में किया जाता है। यह निम्नलिखित लक्षणों के प्रबंधन में भी फायदेमंद है :

  • स्तन में दर्द
  • पीरियड्स के दौरान स्तनों से दूध आना
  • पेट के निचले हिस्से में चुभन जैसा दर्द
  • योनि से अत्यधिक सफेद डिस्चार्ज होना
  • मासिक धर्म में ज्यादा डिस्चार्ज होना

यह लक्षण रात में, दाएं हिस्से के बल लेटने पर, नम और गीले मौसम में और गर्म कमरे में रहने पर बिगड़ जाते हैं।

फाइटोलेका डिसेंड्रा
सामान्य नाम :
पोक रूट
लक्षण : यह होम्योपैथिक दवा निम्नलिखित लक्षणों के प्रबंधन में प्रभावी है :

  • स्तन के ऊतकों में सूजन
  • ब्रेस्ट पेन
  • पीरियड्स के दौरान दूध से भरे स्तन
  • स्तनपान कराते समय निप्पल से शरीर के सभी हिस्सों में दर्द फैलना
  • निचली कमर में दर्द
  • पीरियड्स के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग (रक्तस्राव)
  • पीरियड्स के दौरान पेट में दर्द
  • ब्रेस्ट ट्यूमर
  • पीरियड्स के पहले और पीरियड्स के दौरान स्तनों का अतिसंवेदनशील होना

यह लक्षण मानसून के दौरान, ठंड और नम मौसम में बिगड़ जाते हैं जबकि शुष्क और गर्म जलवायु में इन लक्षणों से राहत मिलती है।

फास्फोरस
सामान्य नाम :
फॉस्फोरस
लक्षण : अचानक से चुभन जैसा दर्द और कमजोरी की स्थिति में यह उपाय कारगर है। यह निम्नलिखित इलाज में भी उपयोगी है :

  • पेट में तेज दर्द
  • स्तनों में मवाद बनना
  • स्तनों से पानी निकलना
  • स्तनों में दर्द और जलन
  • मासिक धर्म न होना
  • योनि से सफेद डिस्चार्ज
  • आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया

यह लक्षण दर्द वाले हिस्से को छूने से, शारीरिक और मानसिक थकान, मौसम के बदलाव, सीढ़ियों पर चढ़ने और दर्द वाले हिस्से के बल लेटने पर बिगड़ जाते हैं। जबकि दाहिनी तरफ लेटने, खुली हवा में रहने और सोने के बाद इन लक्षणों से राहत मिलती है।

फेलन्ड्रिअम एक्वाटिकम
सामान्य नाम :
वाटर ड्रॉपवर्ट
लक्षण : इस उपाय का उपयोग निम्नलिखित लक्षणों के उपचार में किया जा सकता है :

  • दूध नलिकाओं में दर्द होना
  • निप्पल में दर्द
  • स्तनों में दर्द, जो नर्सिंग करते समय असहनीय हो जाता है
  • चलते समय थकान

लेपिस अल्बस
सामान्य नाम :
सिलिको-फ्लोराइड ऑफ कैल्शियम
लक्षण : सीने में जलन और चुभन वाले दर्द के इलाज के लिए यह एक उपयुक्त दवा है। इसका उपयोग निम्नलिखित लक्षणों के उपचार के लिए भी किया जा सकता है जैसे :

  • स्तन में लगातार दर्द
  • छाती में ग्रंथियों का सख्त होना
  • तेज जलन दर्द के साथ फाइब्रॉएड ट्यूमर
  • अत्यधिक मात्रा में खून निकलना

लैक्टिकम एसिडम
सामान्य नाम :
लैक्टिक एसिड
लक्षण : यह स्तनों से संबंधित स्थितियों के इलाज के लिए एक प्रभावी उपाय है। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों को प्रबंधित करने में मदद कर सकता है :

  • स्तन दर्द जो हाथों की ओर बढ़ता है
  • बगल में स्थित अक्षीय ग्रंथियों में वृद्धि होना
  • मतली, विशेष रूप से एनीमिया से ग्रस्त महिलाओं में
  • पूरे शरीर में कमजोरी और कंपकपी

क्रोटोन टिग्लियम
सामान्य नाम :
क्रोटन आयल सीड
लक्षण : यह सीने में जलन का इलाज करने के लिए एक उपयोगी उपाय है। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों के उपचार में भी मदद कर सकता है :

  • स्तनपान कराते समय निप्पल से पीठ तक दर्द
  • गहरी सांस लेने में कठिनाई

यह लक्षण गर्मियों के दौरान, प्रभावित हिस्से को छूने, रात व सुबह के समय में यहां त​क कि कम मात्रा में भी भोजन या पेय लेने से खराब हो जाते हैं।

कोनियम मैक्यूलेटम
सामान्य नाम :
पॉइजन हेमलॉक
लक्षण : यह उपाय स्तन दर्द के प्रबंधन और इससे जुड़े लक्षणों में उपयोगी है। यह निम्नलिखित लक्षणों का इलाज करने में मदद कर सकता है :

  • स्तन का बढ़ना और दर्द, विशेषकर पीरियड्स के पहले और दौरान
  • अंडाशय में सूजन
  • निप्पल में चुभने जैसा दर्द
  • स्तन, जो छूने पर कठोर और उसमें दर्द होता है 
  • स्तनों का सिकुड़ना
  • जननांगों के बाहरी हिस्से के आसपास खुजली

यह लक्षण लेटने, बेड से उठने या करवट बदलने, शारीरिक और मानसिक थकान और पीरियड्स के पहले और दौरान बिगड़ जाते हैं। उपवास के दौरान, अंधेरे में और गतिविधि करने पर इनमें सुधार होता है।

ब्रेस्ट (स्तन) में दर्द के इलाज के लिए कई होम्योपैथिक उपचार प्रभावी हैं। इन उपायों के साथ, डॉक्टर आहार और जीवनशैली में बदलाव की सलाह भी देते हैं, जिससे मरीज जल्दी और अच्छे से रिकवर हो जाए। डॉक्टर औषधीय गुणों वाले कुछ खाद्य पदार्थों से बचने की भी सिफारिश कर सकते हैं क्योंकि यह दवा के असर में बाधा डाल सकते हैं, जिससे स्तन दर्द के उपचार पर असर पड़ता है।

क्या करना चाहिए

  • आहार में स्वस्थ पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करें।
  • स्वच्छ वातावरण में रहें और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें।
  • नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम करें और सक्रिय जीवन व्यतीत करें।

क्या नहीं करना चाहिए

  • तेज गंध वाले कैफीन और पेय पदार्थों से बचें।
  • तेज गंध वाले इत्र का उपयोग न करें।
  • उन खाद्य पदार्थों और पेय से बचें, जिनमें औषधीय गुण होते हैं।
  • नम और दलदली जगहों पर न रहें।
  • भोजन में मसाले, चीनी और नमक की अधिकता से बचें।
  • दुःख, क्रोध और उत्तेजना जैसी भावनाओं से बचें जो मानसिक थकान का कारण बन सकती हैं।

होम्योपैथिक उपचार प्राकृतिक उत्पादों को पतला करके तैयार किए जाते हैं। यही वजह है कि इनका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है और इन दवाइयों के चिकित्सीय गुण बने रहते हैं। ये उत्पाद बहुसंख्यक आबादी में सुरक्षित और प्रभावी माने जाते हैं। वे व्यक्ति के लक्षणों के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं, जिससे मरीज को अधिकतम लाभ मिल सके।

होम्योपैथिक उपचार स्तन में दर्द और उससे जुड़े लक्षणों का इलाज करते हैं और साथ ही साथ अंतर्निहित कारण के प्रबंधन में भी मदद करते हैं। इन दवाइयों के जरिये न सिर्फ व्यक्ति के लक्षणों को ठीक किया जाता है, बल्कि उनके समग्र स्वास्थ्य में भी सुधार किया जाता है।

एक केस स्टडी हुई, जिसमें 31 वर्षीय विवाहित महिला को शामिल किया गया था। उस महिला के स्तन में 4 से 5 महीने तक दर्द होने की जानकारी मिली थी। दबाव, दर्द व मासिक धर्म से पहले दर्द के साथ कभी-कभी जलन की समस्या भी होती थी। नैदानिक ​​परीक्षणों से दोनों स्तनों में फाइब्रोएडीनोसिस का पता चला। उनके लिए फाइटोलेका निर्धारित की गई, जिसके परिणामस्वरूप लक्षणों में धीरे-धीरे राहत मिलने लगी और 6 महीने में फाइब्रोएडिनोसिस का पूर्ण समाधान हो गया। दवा बंद होने के बाद भी लक्षण दोबारा से विकसित नहीं हुए। यह अध्ययन स्पष्ट रूप से स्तन दर्द के प्रबंधन में फाइटोलेका की प्रभावशीलता को बतलाता है।

होम्योपैथिक उपचार पशु उत्पादों, जड़ी-बूटियों और खनिजों से प्राप्त होते हैं। इन दवाओं की गुणवत्ता को भारतीय फार्माकोपिया के विनिर्देशों के अनुसार रखा जाता है। चूंकि, इन्हें इस्तेमाल करने से पहले इन्हें घुलनशील रूप दिया जाता है इसलिए किसी भी आयु वर्ग को इन दवाइयों से दुष्प्रभाव नहीं होता है। होम्योपैथी उपायों को योग्य चिकित्सक द्वारा बहुत ही कम व उचित खुराक में दिया जाता है। ये भी एक कारण है कि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। एक होम्योपैथी डॉक्टर हर बार दवा निर्धारित करने से पहले मरीज में बीमारी के लक्षणों के साथ साथ उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति की जांच भी करते हैं और स्थिति के अनुसार ही दवा निर्धारित करते हैं।

ब्रेस्ट (स्तन) में दर्द विभिन्न कारणों से हो सकता है और हमारी दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। अक्सर ब्रेस्ट (स्तन) में दर्द कई महिलाओं में चिंता और चिड़चिड़ापन का कारण बन जाता है। ब्रेस्ट (स्तन) में दर्द नवजात शिशुओं की वृद्धि को भी बाधित कर सकता है जो अपने पोषण के लिए अपनी मां के दूध पर निर्भर रहते हैं। इस प्रकार, ब्रेस्ट (स्तन) में दर्द और इससे जुड़े लक्षणों को तुरंत और प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना आवश्यक है। हालांकि, स्तन में दर्द के इलाज के लिए पारंपरिक दवाएं उपलब्ध हैं लेकिन होम्योपैथिक उपचार साइड इफेक्ट से मुक्त होते हैं और न केवल स्तन दर्द और इससे जुड़े लक्षणों बल्कि अंतर्निहित स्थिति का भी इलाज करते हैं। फिलहाल, होम्योपैथी ट्रीटमेंट हमेशा किसी योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक से परामर्श करने के बाद ही शुरू करना चाहिए।

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References

  1. National Health Service [Internet]. UK; Breast pain
  2. American Academy of Family Physicians [Internet]. Leawood (KS); Breast Pain in Women
  3. Oscar E. Boericke. Mammc. Médi-T; [lnternet]
  4. The European Committee of Homeopathy. Benefits of Homeopathy. Belgium; [internet]
  5. William Boericke. Homoeopathic Materia Medica. Kessinger Publishing: Médi-T 1999, Volume 1
  6. Wenda Brewster O’Reilly. Organon of the Medical art by Wenda Brewster O’Reilly. B jain; New Delhi
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