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कैनवन डिसीज क्या है?

कैनवन एक वंशानुगत स्थिति है, जो मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) को सही तरीके से सूचना भेजने और प्राप्त करने से रोकती है। यह घातक न्यूरोलॉजिकल स्थिति किसी भी जातीय समूह के बच्चों को प्रभावित कर सकती है, यह 'एशकेनाजी जूइश लोगों' में सबसे आम है। जबकि सामान्य आबादी में कैनवन बीमारी की दर बहुत कम है। हालांकि, इस बात में कितनी सच्चाई है इसे विश्वसनीयता के साथ नहीं कहा जा सकता है।

कैनवन रोग से ग्रस्त बच्चों में जन्म के समय कोई भी लक्षण दिखाई नहीं दे सकता है, लेकिन आमतौर पर इस स्थिति के लक्षण कुछ महीनों के भीतर दिखाई देने लगते हैं।

कैनवन डिसीज के संकेत और लक्षण

रोग के लक्षण बहुत भिन्न हो सकते हैं। इस स्थिति से प्रभावित बच्चों में जरूरी नहीं होता कि समान लक्षण दिखाई दें। फिलहाल, इसके सबसे आम लक्षणों में से कुछ हैं :

  • सामान्य से बड़ा सिर
  • सिर और गर्दन की गतिविधियों पर पूर्ण नियंत्रण न होना
  • विजुअल ट्रैकिंग (नेत्र संबंधी गतिविधियों को नियंत्रित करने की क्षमता) में कमी
  • मसल टोन असामान्य होना, जिसकी वजह से अकड़न हो सकती है
  • पॉस्चर असामान्य होना
  • खाने में कठिनाई
  • सोने में कठिनाई
  • दौरे पड़ना

सिर की परिधि (दायरा) अचानक से बड़ी हो सकती है, जबकि अन्य लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं। इसके अलावा कैनवन डिसीज में विकास धीरे होता है जिस वजह से आंख संबंधित समस्याएं स्पष्ट होती जाती हैं। यही कारण है कि यह रोग प्रोग्रेसिव डिसीज (समय के साथ विकसित होने वाली) है।

(और पढ़ें - आंखों की बीमारी)

कैनवन डिसीज के कारण

कैनवन रोग कई आनुवंशिक विकारों में से एक है, जिसे ल्यूकोडिस्ट्रोफीज के रूप में जाना जाता है। ये स्थितियां माइलिन शीथ (नसों के आसपास पतली कोटिंग) को प्रभावित करती हैं। माइलिन संकेतों को एक तंत्रिका से दूसरे में प्रसारित करने में मदद करता है।

इस स्थिति से प्रभावित बच्चों में एक महत्वपूर्ण एंजाइम की कमी होती है, जिसे एस्पार्टोआइसिलेस कहा जाता है। यह एक प्राकृतिक रसायन है, जो माइलिन बनाने वाली सामग्री में एन-एसिटीलासपार्टिक एसिड को तोड़ने में मदद करता है। एस्पार्टोआइसिलेस के बिना, माइलिन ठीक से नहीं बन सकता है और मस्तिष्क में तंत्रिका गतिविधि और बाकी केंद्रीय तंत्रिका तंत्र प्रभावित हो जाता है।

(और पढ़ें - केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में गड़बड़ी)

कैनवन डिसीज का निदान

भ्रूण को कैनवन बीमारी है या नहीं, यह प्रीनेटल ब्लड टेस्ट (प्रसवपूर्व रक्त परीक्षण) से पता लगाया जा सकता है।

यदि किसी महिला को कैनवन डिसीज है तो उसे प्रेगनेंसी प्लान करने से पहले जेनेटिक ​टेस्टिंग करवा लेना चाहिए।

इसके अलावा ब्लड टेस्ट के जरिये भी इस बात का पता लगाया जा सकता है कि पेट में पल रहे बच्चे को कैनवन डिसीज है अथवा नहीं।

कैनवन डिसीज का उपचार

कैनवन रोग का कोई इलाज नहीं है लेकिन प्रभावित बच्चे के लक्षणों को कुछ हद तक कम किया जा सकता है और उसके जीवन स्तर में सुधार लाया जा सकता है। प्रभावित बच्चे के लिए उपचार की योजना उसके व्यक्तिगत लक्षणों के आधार पर तैयार की जाएगी। हो सकता है कि बीमारी से ग्रस्त बच्चे को बाल रोग विशेषज्ञ की निगरानी में रहने की जरूरत हो, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि उनकी आवश्यकताओं को कैसे पूरा किया जाए।

उदाहरण के लिए, उन बच्चों के लिए फीडिंग ट्यूब मददगार हो सकती है, जिन्हें निगलने में समस्या होती है। इसके जरिए उन्हें वे सभी पोषक तत्व मिल सकते हैं जिसकी उन्हें जरूरत है।

बेहतर पॉश्चर को बढ़ावा देने के लिए फिजिकल थेरेपी और कुछ उपकरण सहायक हो सकते हैं। इसके अलावा लिथियम या अन्य दवाओं के जरिये दौरे को नियंत्रित किया जा सकता है।

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