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कैंसर का नाम सुनते ही रूह कांप उठती है। स्वस्थ कोशिकाओं में किसी गड़बड़ी के रूप में कैंसर की शुरुआत होती है और फिर यह तेजी से ऊतकों में फैलने लगता है। दुनिया में मृत्यु दर का दूसरा सबसे बड़ा कारण कैंसर है। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार, वर्ष 2018 में कैंसर से अनुमानित 9.6 मिलियन (96 लाख) लोगों की मृत्यु हुई थी।

कैंसर इसलिए भी ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसका आसानी से पता नहीं चल पाता है और इस बीमारी के दोबारा होने का खतरा भी 7 से 100 फीसदी तक रहता है। समय पर कैंसर के इलाज और इसके जोखिम कारकों में कमी लाकर विभिन्न प्रकार के कैंसर से होने वाली मृत्यु की दर को कम किया जा सकता है। कैंसर का कोई सफल इलाज अब तक नहीं मिल पाया है।

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जैविक प्रणाली से जुड़ा है कैंसर 

अमरिका के विकास और पुनर्योजी जीव विज्ञान विभाग में एक प्रोफेसर और सेंटर फॉर पर्सनलाइज्ड कैंसर थेरेप्यूटिक्स के निदेशक-डॉ. रॉस एल. कागेन ने अपने पेपर 'रीथिंकिंग कैंसर: करंट चैलेंजेज एंड ऑपोर्चुनिटी इन कैंसर रिसर्च’ में इस रोग से जुड़ी वर्तमान समस्याओं के बारे में विस्तार से बताया है। उन्होंने लिखा कि "कैंसर शरीर की जैविक प्रणाली से जुड़ा होता है जो कि शरीर की क्रियाओं को सामान्य रूप से काम करने में मुश्किलें पैदा करता है। कैंसर का इलाज करने के लिए कई और शोध किए जाने की जरूरत है। यदि इसका कोई सफल इलाज मिल जाए तो उसकी मदद से चिकित्सक दुनियाभर में लाखों लोगों की जान बचा पाएंगें। 

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इसी संदर्भ में आईआईटी मद्रास के शोधकर्ताओं ने जीव विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान का एक साथ अध्ययन किया, ताकि भविष्य में कैंसर के उपचार के लिए कोई रास्ता निकाला जा सके। 

क्या कहती है रिसर्च

आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर डॉ. रमा शंकर वर्मा के नेतृत्व में शोधकर्ताओं के एक दल ने माइक्रोग्रैविटी (शून्य गुरुत्वाकर्षण) के वातावरण में कोलोरेक्टल कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ाकर कैंसर स्टेम कोशिकाओं को अलग करने में कामयाबी हासिल की है। 

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कैंसर स्टेम सेल (सीएससी) एक विशिष्ट प्रकार की कैंसर कोशिकाएं होती हैं जो ट्यूमर में मौजूद कुल कोशिकाओं में 1 फीसदी से भी कम होती हैं। कैंसर स्टेम कोशिकाएं बिलकुल नॉर्मल स्टेम की तरह होती हैं या यूं कहें कि कैंसर स्टेम कोशिकाएं किसी एक कोशिका से भी अपने आप को दोबारा विकसित करने की क्षमता रखती हैं। ये खुद बढ़ने की क्षमता रखती हैं और किसी स्वस्थ हिस्से में प्रवेश करने पर ये अपने आप ही ट्यूमर बनाने लगती हैं।

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स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में ‘कैंसर स्टेम सेल अनुसंधान’ और ‘लुडविग सेंटर’ ने कैंसर स्टेम कोशिकाओं की वजह से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों के बारे में बताया है। उनका कहना है कि कैंसर स्टेम कोशिकाओं को हटाए बिना कैंसर का सफल इलाज करना मुमकिन नहीं है।

अब तक कैंसर के उपचार और इसकी पहचान के लिए विशेष रूप से पशुओं पर अध्ययन किये जाते थे लेकिन इस बार कैंसर स्टेम कोशिकाओं पर रिसर्च की गई है।

अंतरिक्ष में स्टेम कोशिकाओं को दोबारा बनाने के लिए नासा द्वारा माइक्रोग्रैविटी का उपयोग किया जा चुका है। हालांकि नासा ने यह प्रयोग इसलिए किया था ताकि अंतरिक्ष यात्रियों के मांसपेशियों में होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। इस प्रक्रिया में लो ग्रैविटी वाली स्थितियों में सामान्य ऊत्तकों की कोशिकाओं को स्टेम कोशिकाओं में बदलने में मदद मिलती है। यही प्रभाव कैंसर कोशिकाओं से कैंसर स्टेम कोशिकाओं पर भी पड़ता है।

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यह निश्चित रूप से कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि और इस बीमारी को खत्म करने के लिए आसान एवं किफायती तरीका साबित हो सकता है जिससे आसानी से कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने की प्रक्रिया को रोका जा सकता है।

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