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दवाइयों और घातक बीमारियों के इलाज के क्षेत्र में एक और नई खोज से कैंसर के मरीजों को थोड़ा आराम मिलने वाला है। कैंसर से लोगों को बचाने के लिए पहले समय रहते एक दवाई के लगभग तीन डोज दिए जाते थे। इस दवाई के बारे में लोगों को पर्याप्त जानकारी भी नहीं थी। शायद यही वजह थी कि एक डोज लेने के बाद वे बाकि के डोज लेना भूल जाते थे।

एचपीवी (ह्यूमन पेपिलोमा वायरस) टीका
एक जर्नल जेएएमए नेटवर्क ओपन में महिलाओं पर की गई इस शोध को छापा गया है। एचपीवी टीका मुख्य रूप से एचपीवी यानि ह्यूमन पेपिलोमा वायरस से होने वाले कैंसर से बचाव करता है। बाहरी कुछ देशों में यह वायरस हर चार में से एक व्यक्ति में पाया जाता है।

बड़ी संख्या में किशोर और युवा भी इस वायरस की चपेट में आ जाते हैं। एचपीवी के अधिकतर वायरस के ना तो कोई लक्षण दिखाई देते हैं और ना ही किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होती हैं। एचपीवी से होने वाले 10 में से 9 प्रकार के संक्रमण दो साल के अंदर स्वतः ही ठीक हो जाते हैं। कुछ संक्रमण लंबे समय तक रहते हैं और यह कैंसर व अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बनते हैं।

इस वायरस से होने वाला संक्रमण कैंसर का कारण न बने, इसलिए कम आयु में ही बच्चों को एचपीवी वैक्सीन दी जाती है।

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टीके के डोज और लोगों तक इनकी पहुंच
इस टीके का फैलाव विश्व में 10 प्रतिशत ही हो पाया है। इस टीके को कम संसाधनों वाले अविकसित देशों तक पहुंचाना मुश्किल है। किशोर लड़के और लड़कियों को समय रहते इसकी डोज देनी चाहिए। कई किशोरों को डोज तो दे दी जाती है पर वो इसकी सीरीज पूरी नहीं कर पाते हैं। इस टीके को दो या तीन डोज में लिया जाना चाहिए।

सिंगल डोज का क्लीनिकल ट्राएल
अगर क्लीनिकल ट्राएल के दौरान इस टीके के एक डोज को सफल घोषित कर दिया गया तो निश्चिंत होकर लोग इसका इस्तेमाल कर पाएंगे। इससे कैंसर की दवाइयों और इलाज पर पड़ने वाले प्रेशर को कम किया जा सकेगा। अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के अनुसार दुनिया में पाए जाने वाले 34,800 नए कैंसर सीधे एचपीवी वायरस से जुड़े हैं।

किस तरह की बीमारियां होती हैं इस वायरस से
ये वायरस 90 प्रतिशत से ज्यादा गुदा कैंसर और 60 प्रतिशत से ज्यादा पेनिस कैंसर और 70 प्रतिशत मुंह के कैंसर का कारण होते हैं।

(और पढ़ें - कैंसर के लक्षण, कारण, इलाज, दवा, उपचार)

इस पर की गई रिसर्च
बच्चों, किशोरों और युवाओं को 9 से 26 आयु के बीच एचपीवी वैक्सीन लेने की आवश्यकता होती है।

एचपीवी टीके की आयु सीमा के बारे में आगे विस्तार से जानें -

9 से 14 वर्ष के बच्चे और किशोरों के लिए

  • 13 साल से कम व अधिक आयु के बच्चों और किशोरों को एचपीवी वैक्सीन की दो खुराक लेने की आवश्यकता होती है। अपनी पहली खुराक को लेने के बाद 6 से 12 महीनों के अंतराल में बच्चों व किशोरों को दूसरी खुराक लेनी चाहिए। सामान्यतः 13 साल से कम आयु के बच्चों को 11 से 12 साल के बीच में पहली खुराक दी जाती है, जबकि कुछ मामलों में 9 साल की आयु से भी एचपीवी वैक्सीन को शुरू किया जा सकता है। 

15 और 26 साल के किशोरों और युवाओं के लिए

  • अगर 15 साल से पहले किसी बच्चे या बच्ची को एचपीवी वैक्सीन नहीं दी गई है, तो उसको 26 साल का होने तक यह वैक्सीन दी जा सकती है। इस आयु सीमा वाले बच्चों को एचपीवी वैक्सीन की तीन खुराक दी जाती है। पहली खुराक के बाद दूसरी खुराक एक से दो महीनों के बाद दी जाती है, जबकि तीसरी खुराक पहली खुराक के 6 महीनों बाद दी जाती है।
  • महिलाओं को अधिकतम 26 और पुरुषों को 21 साल की आयु तक एचपीवी वैक्सीन दी जा सकती है।
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