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9 सितंबर 2001 नि:संदेह अमेरिका के इतिहास का सबसे काला दिन है। जब वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पैंटागन से टकराकर तीन हवाई जहाजों ने अमेरिका लहूलुहान कर दिया था। अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन द्वारा मचाई गई उस तबाही के बुरे नतीजे आज भी लोगों को भुगतने पड़ रहे हैं। उस समय यहां जीवन को वापस पटरी पर आने में महीनों लग गए थे।

नागासाकी और हिरोशिमा के बारे में तो सभी जानते ही हैं। वहीं 1984 की भोपाल गैस त्रासदी आज भी लोगों के जहन में अपना खौफ कायम किए हुए है। इन त्रासदियों के बाद से फैली भयंकर बीमारियों से आज भी लोग जूझ रहे हैं।

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अमेरिकी शोधकर्ताओं ने अभी अपनी एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट के अनुसार जो भी कर्मचारी 9/11 हमले के बाद लोगों के बचाव कार्य में जुटे थे। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में उस समय बचाव दल में होना उनके लिए खतरनाक साबित हुआ है। उन लोगों में कैंसर के बहुत से मामले देखे गए। गुजरते वर्षों के साथ उन्हें ल्युकेमिया, थाइरॉयड और प्रोस्टेट कैंसर हो गया।

साइट की सफाई और बचाव कार्य
वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के बाद 50,000 कर्मचारी सुरक्षा एवं बचाव कार्य में जुटे हुए थे। उस समय सभी धूल के गुबार और टूट रहे टावर से आ रहे धूल कणों के सीधे संपर्क में थे। पूरी साइट जून 2002 में जाकर साफ हुई। माउंट सिनाइ अस्पताल इकाह्न के स्कूल ऑफ मेडिसन की एक शोधकर्ता का कहना है कि साइट पर मौजूद टॉक्सिन की वजह से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ा और साथ ही कैंसर के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई।

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कर्मचारियों में पाए गए कैंसर
माउंट सिनाइ के एन्वायरमेंटल मेडिसिन और पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट में प्रोफेसर सुसैन टिटेल्बाम कहती हैं कि कैंसर जैसी बीमारी के लक्षण मरीजों में देरी से दिखाई देते हैं। हो सकता है कि बहुत सालों की स्टडी के बाद वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से जुड़े ये कैंसर के मामले और बढ़ जाएं।

इस स्टडी में कानून व्यवस्था स्थापित करने वाले कर्मचारियों, निर्माण कार्यों में जुड़े लोग और टेलिकम्युनिकेशन कर्मचारियों में कैंसर के मामलों की जांच की गई। इन लोगों में कैंसर के मामलों में बहुत बड़े पैमाने पर वृद्धि देखी गई। थायरॉयड कैंसर के मामलों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है।

कर्मचारियों में ल्यूकेमिया के कारण
कर्मचारियों को ल्यूकेमिया कार्सिनोजन्स जैसे बैन्जीन फ्यूल और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की साइट पर मौजूद हानिकारक तत्वों के संपर्क में आने से हुआ है। इसके अलावा लंबे समय तक इन तत्वों से किसी भी तरह का संपर्क और कम संपर्क के बावजूद लोगों में ल्यूकेमिया के मामले देखे गए। इसके अलावा कैंसर निम्न कारणों पर निर्भर करता है - इंसान का लिंग, उम्र और हादसे के समय क्या वो धुम्रपान करते थे।

इस स्टडी के लिए शोधकर्ताओं ने सितंबर 11, 2001 के बाद 2002 से लेकर 2013 के बीच न्यूयॉर्क, न्यूजर्सी, कनेक्टीकट, पेनसिल्वेनिया, फ्लोरिडा और नॉर्थ कैरोलिना के कैंसर रजिस्ट्री डाटा से राहत और बचाव कार्य करने वाले 28,729 लोगों में कैंसर के मामलों की जांच की थी।

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