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परिचय

सीने में संक्रमण एक प्रकार का श्वसन संबंधी इन्फेक्शन है, जो आपकी श्वसन प्रणाली के निचले हिस्से को प्रभावित करता है। श्वसन प्रणाली के निचले हिस्से में श्वसन नली, ब्रोंकाई और फेफड़े शामिल हैं। इसका मुख्य कारण वायरल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन होता है कुछ मामलों में फंगल इन्फेक्शन के कारण भी सीने में संक्रमण हो जाता है। कुछ लोगों को सीने में संक्रमण होने का खतरा अधिक होता है, जिनमें सिगरेट पीने वाले लोग, वृद्ध व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं व मोटापे से ग्रस्त महिलाएं आदि शामिल हैं। 

छाती में संक्रमण होने से सांस लेने में दिक्कतखांसी होने लग जाती हैं। तेज बुखार, सिरदर्द, सुस्ती व भूख न लगना सीने में इन्फेक्शन के कुछ अन्य लक्षण हैं। यह रोग किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। इस स्थिति की जांच करने के लिए डॉक्टर मरीज का शारीरिक परीक्षण करते हैं और स्वास्थ्य संबंधी पिछली स्थिति का पता लगाते हैं। इसके अलावा डॉक्टर स्टेथोस्कोप उपकरण की मदद से छाती की आवाज सुन सकते हैं, ब्लड टेस्टएक्स रे कर सकते हैं। 

सीने में संक्रमण से बचाव करने के लिए पर्याप्त पानी पीना चाहिए, कम वसा व अधिक फाइबर वाले आहार खाने चाहिए इसमें खूब मात्रा में ताजे फल व सब्जियां शामिल हैं। चेस्ट में इन्फेक्शन से बचाव करने के लिए धूम्रपान व शराब छोड़ना और अच्छी स्वच्छता बनाए रखना भी आवश्यक है।

यदि आपके सीने में संक्रमण बैक्टीरिया के कारण हुआ है, तो उसका इलाज करने के लिए एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं। हालांकि यदि वायरस के कारण छाती में संक्रमण हुआ है, तो इलाज में एंटीबायोटिक दवाओं का कोई काम नहीं होता है। डॉक्टर शरीर को आराम देने, पर्याप्त मात्रा में तरल पेय पदार्थ पीने और सांस लेने के दौरान हो रहे दर्द से राहत दिलाने के लिए पेन किलर दवाएं लेने की सलाह देते हैं। 

सीने में संक्रमण से कुछ जटिलताएं भी विकसित हो सकती हैं, जिनमें फेफड़ों में घाव होना, सेप्टिसीमिया आदि शामिल हैं।

(और पढ़ें - शराब की लत के लक्षण)

  1. सीने में संक्रमण क्या है - What is Chest Infections in Hindi
  2. सीने में संक्रमण के प्रकार - Types of Chest Infections in Hindi
  3. सीने में संक्रमण के लक्षण - Chest Infections Symptoms in Hindi
  4. सीने में संक्रमण के कारण व जोखिम कारक - Chest Infections Causes & Risk Factor in Hindi
  5. सीने में संक्रमण से बचाव - Prevention of Chest Infections in Hindi
  6. सीने में संक्रमण का परीक्षण - Diagnosis of Chest Infections in Hindi
  7. सीने में संक्रमण का इलाज - Chest Infections Treatment in Hindi
  8. सीने में संक्रमण की जटिलताएं - Chest Infections Complications in Hindi
  9. सीने में संक्रमण के डॉक्टर

सीने में संक्रमण क्या है - What is Chest Infections in Hindi

सीने में संक्रमण क्या है?

चेस्ट इन्फेक्शन एक ऐसा इन्फेक्शन है, जो आपके फेफड़ों को प्रभावित करता है। यह या तो श्वसन मार्गों को (ब्रोंकाइटिस के रूप में) या फिर फेफड़ों में मौजूद छोटी-छोटी हवा की थैलियों (निमोनिया के रूप में) को प्रभावित करता है। इस स्थिति में द्रव या मवाद बनने लग जाता है और श्वसन मार्गों में सूजन आ जाती है जिससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। 

(और पढ़ें - निमोनिया से बचने का उपाय​)

सीने में संक्रमण के प्रकार - Types of Chest Infections in Hindi

चेस्ट में इन्फेक्शन के कितने प्रकार होते हैं?

फेफड़े व श्वसन मार्गों में होने वाले इन्फेक्शन को सीने का संक्रमण कहा जाता है। सीने में संक्रमण के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं:

  • ब्रोंकाइटिस
  • निमोनिया 

(और पढ़ें - ब्रोंकाइटिस के घरेलू उपाय)

सीने में संक्रमण के लक्षण - Chest Infections Symptoms in Hindi

चेस्ट में संक्रमण के लक्षण क्या हैं?

छाती में संक्रमण का मुख्य लक्षण खांसी होता है। इस दौरान आपको कमजोरीथकान महसूस होती है और साथ ही आपको निम्नलिखित में से भी कुछ लक्षण महसूस हो सकते हैं:

(और पढ़ें - कमजोरी दूर करने का उपाय)

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

निम्नलिखित स्थितियों में डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए:

  • यदि आपके शरीर का तापमान काफी बढ़ गया है (तेज बुखार) तो यह एक गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है। 
  • यदि लक्षण लगातार तीन हफ्तों से हो रहे हो। 
  • अचानक से आपकी सांसें तेज हो जाती हो या सांस फूलने की समस्या हो।  
  • जीभ व होठ नीले पड़ जाएं। 
  • दम घुटने जैसा महसूस हो। 
  • छाती में तीव्र दर्द हो और सांस लेने के दौरान दर्द और बदतर हो जाता हो। 
  • खांसी के साथ गाढ़ा बलगम आए जिसमें खून के धब्बे भी होते हो।

(और पढ़ें - खांसी के लिए घरेलू उपाय)

सीने में संक्रमण के कारण व जोखिम कारक - Chest Infections Causes & Risk Factor in Hindi

सीने में संक्रमण क्यों होता है?

छाती में इन्फेक्शन के निम्नलिखित कुछ मुख्य कारण हो सकते है: 

  • वायरस (जिसमें फ्लू वायरस शामिल है)
  • बैक्टीरिया (जिसमें न्यूमोकोकल और माइकोप्लाज्मा शामिल है)
  • टीबी भी सीने में संक्रमण का एक कारण हो सकता है, हालांकि इसके मामले काफी दुर्लभ हैं

(और पढ़ें - टीबी का देसी इलाज)

ब्रोंकाइटिस के ज्यादातर मामले वायरस के कारण होते हैं, जबकि निमोनिया के ज्यादातर मामले बैक्टीरिया के कारण होते हैं।

ये संक्रमण आमतौर पर तब फैलते हैं जब इनसे ग्रस्त कोई व्यक्ति खांसता या छींकता है। खांसने या छींकने के दौरान मुंह से द्रव की बहुत ही सूक्ष्म बूंदे निकलती हैं, जिनमें वायरस या बैक्टीरिया होते हैं। द्रव की सूक्ष्म बूंदों के माध्यम से ये रोगाणु हवा में मिल जाते हैं और सांस के माध्यम से स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में चले जाते हैं। 

सीने में संक्रमण का खतरा कब बढ़ता है?

निम्नलिखित कुछ विशेष परिस्थितियों से जुड़े लोगों में छाती का इन्फेक्शन होने का खतरा काफी बढ़ जाता है:

(और पढ़ें - अस्थमा से छुटकारा पाने के उपाय​)

सीने में संक्रमण से बचाव - Prevention of Chest Infections in Hindi

सीने में संक्रमण से बचाव कैसे किया जाता है?

कुछ उपाय हैं जिनकी मदद से सीने में संक्रमण विकसित होने से और अन्य लोगों में इसके फैलने से बचाव किया जा सकता है:

  • धूम्रपान ना करें:
    यदि आप सिगरेट पीते हैं, तो उसे छोड़ दें। ऐसा करने से सीने में संक्रमण होने से बचाव करने में काफी मदद मिल सकती है। धूम्रपान आपके फेफड़ों को क्षतिग्रस्त कर देता है और संक्रमण से बचाव करने वाली प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर बना देता है। (और पढ़ें - तंबाकू के नुकसान)
     
  • शराब ना पिएं:
    चेस्ट में इन्फेक्शन होने से बचाव करने के लिए शराब छोड़ना बहुत जरूरी है क्योंकि शराब पीने से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है जिसमें सीने में संक्रमण भी शामिल है। (और पढ़ें - शराब छुड़ाने के उपाय)
     
  • स्वस्थ भोजन खाएं:
    अच्छा व स्वस्थ खाना प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है जिससे छाती में इन्फेक्शन होने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। (और पढ़ें - स्वस्थ भोजन के फायदे)
     
  • मुंह को ढक कर रखें:
    वैसे सीने में संक्रमण फ्लू जैसे इन्फेक्शन की तरह खांसने व छींकने से नहीं फैलता है। लेकिन फिर भी खांसने व छींकने के दौरान अपने मुंह को कपड़े या टिश्यु पेपर से ढकना और नियमित रूप से हाथ धोते रहने से चेस्ट इन्फेक्शन होने की संभावनाएं काफी कम हो जाती हैं। इस्तेमाल किए गए टिश्यु पेपर को तुरंत कचरे में फेंक देना चाहिए।
     
  • टीकाकरण करवाएं:
    यदि आपके सीने में इन्फेक्शन का खतरा बढ़ गया है, तो डॉक्टर आपको फ्लू व न्यूमोकोकल इन्फेक्शन (बैक्टीरिया के कारण होने वाला निमोनिया) से बचाव करने वाले टीके लगवाने की सलाह दे सकते हैं। यह टीकाकरण करवाने से भविष्य में भी सीने में संक्रमण होने का खतरा कम हो जाता है। फ्लू और न्यूमोकोकल टीके लगवाने की सलाह आमतौर पर निम्नलिखित स्थितियों में दी जाती है:
    • शिशु व छोटे बच्चे। 
    • गर्भवती महिलाएं। 
    • 65 साल व उससे अधिक उम्र वाले लोग। 
    • लंबे समय से किसी बीमारी से ग्रस्त लोग। 
    • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग। 

(और पढ़ें - रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपाय​)

सीने में संक्रमण का परीक्षण - Diagnosis of Chest Infections in Hindi

सीने में संक्रमण का परीक्षण कैसे किया जाता है?

स्थिति का पता लगाने के लिए डॉक्टर आपका शारीरिक परीक्षण करेंगे और लक्षणों की जांच करेंगे। शारीरिक परीक्षण के दौरान डॉक्टर एक स्टेथोस्कोप नामक उपकरण का इस्तेमाल करेंगे, जिसकी मदद से सांस लेने के दौरान आपके फेफड़ों व हृदय से निकलने वाली आवाज को सुना जाता है। सीने में संक्रमण की गंभीरता व उसकी सटीक जगह का पता लगाने के लिए डॉक्टर छाती का एक्स रे कर सकते हैं। 

(और पढ़ें - टीबी टेस्ट क्या है)

इसके अलावा डॉक्टर थूक व खून का सेंपल ले सकते हैं, जिसकी जांच की जाती है और यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि सीने में संक्रमण किस कारण से हुआ है। यदि बैक्टीरिया के कारण इन्फेक्शन हुआ है, तो टेस्ट की मदद से ही डॉक्टर संक्रमण के अनुसार उचित एंटीबायोटिक दवाओं का चुनाव कर लेते हैं। 

खून का सेंपल लेकर निम्नलिखित टेस्ट किए जा सकते हैं: 

(और पढ़ें- लैब टेस्ट क्या है)

सीने में संक्रमण का इलाज - Chest Infections Treatment in Hindi

सीने में संक्रमण का इलाज कैसे करें?

सीने में संक्रमण का इलाज उसके कारण के आधार पर किया जाता है:

  • वायरस (जैसे वायरल ब्रोंकाइटिस):
    वायरल इन्फेक्शन कुछ हफ्तों के समय में अपने आप ठीक हो जाता है और एंटीबायोटिक दवाएं इसमें कुछ काम नहीं कर पाती हैं।
     
  • बैक्टीरिया (जैसे निमोनिया):
    बैक्टीरियल इन्फेक्शन का इलाज करने के लिए डॉक्टर कुछ एंटीबायोटिक दवाएं दे सकते हैं। डॉक्टर द्वारा निर्धारित किया गया दवाओं का कोर्स पूरा जरूर करें, यदि आपको कोर्स के बीच में भी ठीक महसूस होने लगा है, तो भी दवाओं को बीच में ना छोड़ें। 

(और पढ़ें - निमोनिया में क्या खाना चाहिए)

उपचार विकल्प

  • एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग सिर्फ बैक्टीरिया के कारण होने वाले सीने के संक्रमण का इलाज करने के लिए किया जाता है। इनका उपयोग वायरस से होने वाले सीने के संक्रमण का इलाज करने के लिए नहीं किया जाता है, जैसे फ्लू, वायरल ब्रोंकाइटिस आदि क्योंकि एंटीबायोटिक दवाएं वायरल इन्फेक्शन पर काम नहीं करती हैं। 
  • कुछ दवाओं की मदद से गाढ़े बलगम को पतला किया जाता है। डॉक्टर स्थिति के अनुसार आपके लिए बलगम को पतला करने वाली उचित दवाएं निर्धारित करते हैं। (और पढ़ें - बलगम की जांच कैसे होती है)
  • यदि आपको घरघराहट हो रही है जो ठीक नहीं हो रही है, तो डॉक्टर आपके वायु मार्गों को खोलने के लिए विशेष प्रकार की इनहेलर (सूंघने वाली दवा) दवाएं देते हैं।
  • ब्रोंकाइटिस से ग्रस्त ज्यादातर लोगों का इलाज घर पर ही कर दिया जाता है और वे पूरी तरह से स्वस्थ हो जाते हैं।

(और पढ़ें - दवाओं की जानकारी)

निमोनिया की गंभीरता का पता लगाना आवश्यक होता है। 

  • एंटीबायोटिक दवाओं की मदद से कुछ मरीजों में सीने में संक्रमण घर पर ही मैनेज किया जाता है। इलाज करवाने के 48 घंटों के भीतर डॉक्टर से एक बार फिर जांच करवा लेनी चाहिए, खासकर यदि आपके लक्षणों में सुधार नहीं हो रहा है तो डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए। इलाज के 6 हफ्तों बाद एक बार फिर डॉक्टर से जांच करवा लेनी चाहिए ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि आपका संक्रमण पूरी तरह ठीक हो चुका है। इस दौरान एक्स रे टेस्ट भी किया जा सकता है। 
  • जिन लोगों को गंभीर रूप से सीने में संक्रमण होता है, उनका रोग जीवन के लिए हानिकारक बन सकता है ऐसी स्थिति में उनको आईसीयू (ICU) में रखना पड़ता है। कुछ मरीजों के अन्य इलाज करने के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है, खासकर छोटे बच्चों और वृद्ध व्यक्तियों को क्योंकि इनमें गंभीर जटिलताएं विकसित होने के जोखिम अधिक होते हैं।

(और पढ़ें - अनियमित दिल की धड़कन का इलाज)

घरेलू देखभाल: 

सीने में इन्फेक्शन आमतौर पर हमेशा 1 हफ्ते के भीतर अपने आप ठीक हो जाता है। कुछ टिप्स हैं जिनकी मदद से आपको लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है: 

  • खूब मात्रा में तरल पदार्थ पिएं (और पढ़ें - गुनगुना पानी पीने के फायदे)
  • यदि आपको अस्थमा है या फिर लंबे समय से फेफड़ों संबंधी कोई समस्या है तो इनहेलर का उपयोग करें
  • जितना हो सके शरीर को आराम दें
  • भाप लें या ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें, बंद बाथरूम में गर्म पानी से नहाने के दौरान भी आप भाप ले सकते हैं
  • धूम्रपान ना करें, धूम्रपान कर रहे लोगों के संपर्क में ना रहें और वायु प्रदूषण से भी बचें (और पढ़ें - धूम्रपान छोड़ने के घरेलू उपाय)
  • यदि आपको बुखार हो गया है, तो एस्पिरिन या पेरासिटामोल दवाएं लें। बच्चों को एस्पिरिन दवाएं ना दें।

(और पढ़ें - भाप लेने का तरीका)

सीने में संक्रमण की जटिलताएं - Chest Infections Complications in Hindi

छाती में इन्फेक्शन से क्या जटिलताएं होती हैं?

सीने में संक्रमण के ज्यादातर मामले लगभग एक हफ्ते के समय में अपने आप ठीक हो जाते हैं। बैक्टीरिया के कारण होने वाले चेस्ट इन्फेक्शन का इलाज करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का कोर्स चलाया जाता है।

(और पढ़ें - छाती में फ्रैक्चर का इलाज)

निमोनिया जैसे चेस्ट इन्फेक्शन से होने वाली कुछ संभावित जटिलताएं निम्नलिखित हैं:

यदि सीने में संक्रमण गंभीर या जटिल हो गया है, तो उसका इलाज करने के लिए मरीज को अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। 

(और पढ़ें - लंग कैंसर का इलाज)

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