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आप सोच रहे होंगे कि यह तो अजीब बात है कि 2 अलग-अलग बीमारियां मायल्जिक इंसेफैलोमाईलिटिस/क्रोनिक फटीग सिंड्रोम (एमई/सीएफएस) और फाइब्रोमायल्जिया (एफएम) दोनों का अंतरराष्ट्रीय जागरुकता दिवस एकसाथ एक ही दिन 12 मई को हर साल कैसे आता है। तो इसका जवाब ये है कि एमई/सीएफएस और एफएम दोनों बीमारियों में कई समानताएं हैं और आमतौर पर ये दोनों बीमारियां किसी व्यक्ति को एक साथ ही होती हैं। 

आखिर इन दोनों बीमारियों में क्या समानता है?
क्यूजेएम नाम की मेडिसिन की अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में साल 2013 में प्रकाशित एक स्टडी की मानें तो एमई/सीएफएस और एफएम दोनों ही ऐसी बीमारियां हैं जो चिकित्साशास्त्र के अनुसार अस्पष्ट या रहस्यमय हैं, प्रधान रूप से महिलाओं में अभिलक्षित होती हैं जिसमें हद से ज्यादा थकान, विस्तृत दर्द और पीड़ा महसूस होती है। चूंकि ये दोनों बीमारियां अक्सर एक साथ होती हैं और इनकी मनोवैज्ञानिक उत्पत्ति से जुड़े लक्षणों के विस्तार की प्रक्रिया भी एक जैसी ही है। (दर्द और थकान जैसी सामान्य शारीरिक अनुभूति के अर्थ को मनोवैज्ञानिक रूप से गलत समझने की आदत) यही वजह है कि बहुत से अनुसंधानकर्ता और मेडिकल प्रफेशनल्स इन्हें दो अलग-अलग परिलक्षण (सिंड्रोम) मानने की बजाए एक सिंगल सिंड्रोम ही मानते हैं।

यहां तक कि इन दोनों बीमारियों से जुड़े जोखिम कारक जिनकी वजह से ये बीमारियां होती हैं, वे भी एक ही हैं- तनाव, चोट, गंभीर बीमारी, नींद का बार-बार टूटना, परिश्रम और खिंचाव। इसके अलावा एमई/सीएफएस और एफएम दोनों बीमारियों के मुख्य लक्षण भी एक जैसे ही हैं:

  • हद से ज्यादा थकान
  • लंबे समय तक रहने वाले विस्तृत दर्द
  • नींद लेने के बाद भी ताजगी महसूस न होना
  • चक्कर आना
  • संज्ञानात्मक मुश्किलें

हकीकत तो ये है कि दोनों बीमारियों के लक्षणों में अंतर मात्र कुछ डिग्री का ही है। उदाहरण के लिए- एमई/सीएफएस का प्राथमिक लक्षण थकान है जबकि एफएम का प्राथमिक लक्षण दर्द है। लेकिन दर्द और थकान- दोनों ही बीमारियों में होते हैं। यहां तक की एमई/सीएफएस और एफएम का डायग्नोसिस भी अपवाद के बाद किया जाता है यानी जब बीमारी के सभी संभावित कारण खारिज कर दिए जाते हैं तो इन दोनों में से कोई एक बीमारी पर आकर सीमित किया जाता है।

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एमई/सीएफएस और फाइब्रोमायल्जिया का इलाज
एमई/सीएफएस और एफएम इन दोनों बीमारियों के स्वभाव और समानता को देखते हुए यह पता लगा पाना लगभग नामुमकिन सा है कि किसी व्यक्ति को स्पष्ट रूप से इन दोनों में से कौन सी बीमारी है। इन दोनों बीमारियों की जानकारी हासिल करने और खासकर इनके बीच क्या अंतर है इस बारे में जानने के लिए और ज्यादा रिसर्च करने की जरूरत है। इस बीच एमई/सीएफएस और एफएम दोनों ही बीमारियों का इलाज भी एक ही तरीके से किया जाता है।

एमई/सीएफएस के इलाज में मुख्य रूप से थकान का प्रबंधन करने पर फोकस किया जाता है और ठीक उसी तरह एफएम के इलाज में दर्द निवारण और प्रबंधन को हाइलाइट किया जाता है। एमई/सीएफएस कई बार वायरल इंफेक्शन के बाद हो जाता है जिसमें उस खास मामले में जरूरत पड़ने पर एंटीवायरल दवाइयां प्रिस्क्राइब की जाती हैं। इसके अलावा दोनों ही बीमारियों के इलाज में निम्नलिखित चीजें भी शामिल होती हैं:

  • संज्ञानात्मक स्वभावजन्य थेरेपी (कॉगनिटिव बिहेवियरल थेरेपी सीबीटी)
  • एक्यूपंक्चर और डीप टीशू मसाज
  • सेलेक्टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इन्हिबिटर्स (एसएसआरआई) और ट्राइसिसलिक एंटीडिप्रेसेंट्स
  • नॉन-स्टेरॉयड एंटी-इन्फ्लेमेट्री ड्रग और ओपिऑयड
  • प्रिस्क्रिप्शन के साथ दी जाने वाली नींद की दवा

एमई/सीएफएस और एफएम जैसी लंबे समय तक जारी रहने वाली बीमारियों के साथ रहना सीखना काफी मुश्किल हो सकता है। अगर आपको खुद में इन दोनों मिलती जुलती बीमारियों या सिंड्रोम के कोई भी लक्षण नजर आते हैं तो आपको अपना चेकअप और डायग्नोसिस करवाना चाहिए ताकि आप दर्द और थकान से छुटकारा पाने के सफर की जल्द से जल्द शुरुआत कर पाएं।

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