कॉमन वेरिएबल इम्यून डेफिशिएंसी (इम्यून सिस्टम डिसऑर्डर) - Common Variable Immune Deficiency in Hindi

Dr. Anurag Shahi (AIIMS)MBBS,MD

March 15, 2022

March 15, 2022

कॉमन वेरिएबल इम्यून डेफिशिएंसी
कॉमन वेरिएबल इम्यून डेफिशिएंसी

कॉमन वेरिएबल इम्यून डेफिशिएंसी क्या है?

कॉमन वेरिएबल इम्यून डेफिशिएंसी (सीवीआईडी) इम्यून सिस्टम से संबंधित डिसऑर्डर (प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ा विकार) है, जिसमें शरीर में ऐसे प्रोटीन की कमी हो जाती है, जो संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। इस बीमारी से ग्रस्त होने पर कान, साइनस और श्वसन प्रणाली में बार-बार संक्रमण होने की संभावना रहती है। प्रभावित व्यक्ति में पाचन और खून से संबंधित विकार के अलावा कैंसर का भी खतरा हो सकता है। यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में संचारित हो सकती है या कुछ मामलों में पर्यावरणीय कारक भी इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं।

कॉमन वेरिएबल इम्युनोडेफिशिएंसी के लक्षण - Common Variable Immune Deficiency Symptoms in Hindi

इस तरह के रोग आनुवांशिक विकार होते हैं जिसमें व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली ठीक से काम नहीं कर पाती है। इस बीमारी के लक्षण बचपन या किशोरावस्था के दौरान दिखाई दे सकते हैं। हालांकि कई लोगों में वयस्क होने की शुरुआत में इस बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं। कॉमन वेरिएबल इम्यून डेफिशिएंसी में बार-बार कान, साइनस और श्वसन प्रणाली में संक्रमण होने की संभावना रहती है। सीवीआईडी के लक्षण हर व्यक्ति में भिन्न होते हैं। ये सामान्य से लेकर गंभीर हो सकते हैं। इस बीमारी के संकेत व लक्षणों में शामिल हैं:

कॉमन वेरिएबल इम्युनोडेफिशिएंसी के कारण - Common Variable Immune Deficiency Causes in Hindi

लगभग 90 प्रतिशत मामलों में इस बीमारी के सही कारण का पता नहीं चल पाया है। डॉक्टरों का कहना है कि यह स्थिति पर्यावरणीय और आनुवांशिक दोनों कारकों के संयोजन की वजह से हो सकती है। चूंकि इस बीमारी के पर्यावरणीय कारणों के बारे में पता नहीं है इसलिए ऐसा माना जाता है कि जीन में गड़बड़ी के कारण यह समस्या हो सकती है। इसमें बी कोशिका नामक प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाएं ठीक तरह से काम करने में असमर्थ हो जाती हैं। बी कोशिकाएं विशेष रूप से सफेद रक्त कोशिकाएं होती हैं, जो शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करती हैं। जब बी कोशिकाएं परिपक्व होती हैं, तो वे विशेष प्रोटीन का उत्पादन करती हैं जिन्हें एंटीबॉडी कहा जाता है।

ज्यादातर मामलों में यह जेनेटिक बदलाव और बीमारी के लक्षण बिना किसी कारण के विकसित होते हैं। ऐसा पाया गया है कि प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़े जीन में दोष उत्पन्न होने से ही ये बीमारी ट्रिगर होती है। इन दोषों के कारण ही शरीर में इम्युनोग्लोबुलिन नामक प्रोटीन के उत्पादन में कमी आ जाती है।

कॉमन वेरिएबल इम्युनोडेफिशिएंसी का इलाज - Common Variable Immune Deficiency Treatment in Hindi

इस बीमारी के इलाज के लिए निम्न थेरेपी और दवाइयों का प्रयोग किया जा सकता है। 

  • इम्युनोग्लोबुलिन रिप्लेसमेंट थेरेपी (आईआरटी) के जरिए सीवीआईडी का इलाज किया जाता है, जो अक्सर लक्षणों से राहत दिलाती है। आईआरटी की जरूरत नियमित रूप से पड़ती है और यह जीवनभर चलने वाला इलाज है।
  • सीवीआईडी से होने वाले अधिकतर संक्रमणों के इलाज के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया जाता है, हालांकि इस बीमारी से ग्रस्त रोगियों को स्वस्थ व्यक्ति की तुलना में लंबी अवधि के लिए उपचार की आवश्यकता हो सकती है।

इस खतरनाक बीमारी का निदान जरूरी है, इसके लिए डॉक्टर स्क्रीनिंग टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं। इस टेस्ट में इम्युनोग्लोबुलिन के स्तर या रक्त में बी कोशिकाओं की संख्या के बारे में जानकारी मिल सकती है। इसके अतिरिक्त, ऐसे लोग जो एक या अधिक गैर-संक्रामक जटिलताओं से ग्रसित हैं उनमें आम संक्रमण वाले लोगों की तुलना में 11 गुना अधिक मरने का जोखिम होता है।



कॉमन वेरिएबल इम्यून डेफिशिएंसी (इम्यून सिस्टम डिसऑर्डर) के डॉक्टर

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