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कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सरकार से लेकर आम लोग तक कई तरह की एहतियात बरत रहे हैं। दूसरी तरफ, डॉक्टर और मेडिकल विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि लोग हाथों को साफ रखें। उनका कहना है कि कोरोना वायरस के चलते लोगों को बीच-बीच में साबुन से हाथ धोते रहने धोए। इसके लिए वे सैनिटाइजर (जीवाणु रोधक) का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, कुछ लोग सवाल पूछ रहे हैं कि कोरोना वायरस से बचने के इन उपायों में से बेहतर कौन सा है।

अमेरिकी अखबार 'न्यूयॉर्क पोस्ट' ने एक मेडिकल एक्सपर्ट के हवाले से इस बारे में रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट में बॉस्टन मेडिकल सेंटर में स्पेशल पैथोजिन्स यूनिट की मेडिकल निदेशक डॉक्टर नाहिद भदेलिया का कहना है कि सीओवीआईडी-19 काफी हद तक सार्स (सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम) और मार्स (मीडिल ईस्ट रेस्पिटरी सिंड्रोम) जैसा ही कोरोना वायरस है, इसलिए साबुन से हाथ धोने या सैनिटाइजर से इसे मारना मुश्किल नहीं होना चाहिए। भदेलिया का कहना है कि साबुन और एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर से हथेली पर फैले कोरोना वायरस को मारा जा सकता है। 

दरअसल, सार्स और मार्स के समय भी मेडिकल विशेषज्ञों ने हाथों की सफाई को जरूरी बचाव बताया था। उनके मुताबिक, साबुन और सैनिटाइजर दोनों के इस्तेमाल से कोरोना वायरस से बचाव किया जा सकता है।

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हाथ धोना सबसे जरूरी
गंदगी के जरिये बहुत से कीटाणु हमारे हाथ पर चिपक जाते हैं। हाथों के माध्यम से यह हमारे पेट में जाते हैं और हमें बीमार बनाते है। लेकिन हाथ अच्छे से धोने से काफी संख्या में कीटाणुओं को मारा जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि हेल्दी लाइफ के लिए हाथ धोना सबसे बेहतर विकल्पों में से एक है। वे कहते हैं कि सैनिटाइजर या साबुन से हाथ धोने से आप कोरोना वायरस से बचाव कर सकते हैं। वहीं, भदेलिया कहती हैं कि इससे आप दूसरे तरह के वायरसों और उनसे होने वाली बीमारियों से भी बचाव कर सकते हैं।

हाथ धोने के लिए किस साबुन का इस्तेमाल करें?
अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (यूएस एफडीए) का कहना है कि विज्ञान में इसके कोई प्रमाण नहीं है कि किसी साबुन के इस्तेमाल से बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है और किससे साबुन से नहीं। यूएस एफडीए की मानें तो हाथ धोने के लिए किसी भी प्रकार के साबुन का इस्तेमाल किया जा सकता है। केवल पानी से हाथ धोने की तुलना में साबुन के साथ हाथ धोना ज्यादा असरदार साबित होगा।

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साबुन या सैनिटाइजर?
लेकिन अगर आपके पास हाथ धोने का भी पर्याप्त समय नहीं है तो सैनिटाइजर और वाइप्स (साबुन का कागजी रूप) का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे कीटाणुओं को मारने में मदद मिलेगी। हालांकि सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन विभाग का कहना है कि सैनिटाइजर में कम से कम 60 प्रतिशत अल्कोहल होना जरूरी है, तभी वह वायरस को मारने में ज्यादा प्रभावी होंगे। साथ ही यह भी ध्यान रखना है कि साबुन या सैनिटाइजर का इस्तेमाल सही और ठीक प्रकार से करना है। डॉक्टर भदेलिया का कहना है कि अगर आपके पास सभी प्रकार के सैनिटाइजर और साबुन हैं, लेकिन आप सही प्रकार से उनका इस्तेमाल नहीं करते तो समझ लीजिए कि तब भी आपके हाथ में कीटाणु मौजूद हो सकते हैं। अखबार की इस रिपोर्ट के बाद निष्कर्ष यही निकलता है कि साबुन और सैनिटाइजर दोनों से हाथ धोकर कोरोना वायरस से बचने में मदद मिल सकती है।

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कितनी देर तक हाथ धोना सही?
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन विभाग (सीडीसी) के मुताबिक, साबुन और हल्के गुनगुने पानी के साथ करीब 20 सेकंड तक रगड़-रगड़ (हाथ के चारों तरफ) के हाथ धोने हाथों के अधिकतर कीटाणु चले जाते हैं। हाथ धोने के बाद उन्हें तौलिए से तब तक साफ करना चाहिए जब तक कि वे अच्छे से सूख न जाएं।

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