किसी बीमारी के खिलाफ तैयार की गई वैक्सीन को पूरी तरह कारगर और सुरक्षित करार देने के लिए उसे क्लिनिकल ट्रायल के तहत इन्सानों पर आजमाना महत्वपूर्ण माना जाता है। इन ट्रायलों में तीसरे चरण के ट्रायल सबसे जरूरी माने जाते हैं, जिनमें वैक्सीन को हजारों की संख्या में आए प्रतिभागियों को लगाया जाता है। अगर उनमें से अधिकतर या सभी में वैक्सीन बिना किसी गंभीर दुष्प्रभाव के बीमारी से सुरक्षा देती है तो उसे संबंधित रोग की वैक्सीन मान लिया जाता है। 

यही कारण है कि कोविड-19 महामारी की वैक्सीन बनाने में लगी दवा कंपनियां और मेडिकल इंस्टीट्यूट हजारों की संख्या में स्वस्थ प्रतिभागियों को अपने अंतिम ट्रायलों में शामिल करने की कोशिश कर रही हैं ताकि वैश्विक महामारी के खिलाफ वे अपनी वैक्सीन को कारगर और सुरक्षित साबित करने के लिए ज्यादा बड़ा और विस्तृत डेटा मुहैया करा सकें। इस सिलसिले में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका ने साझा प्रयास के तहत तैयार की कोवीशील्ड वैक्सीन के ट्रायल के लिए 10 हजार से ज्यादा लोगों का नामांकन किया है। कोरोना वायरस के खिलाफ दो और मजबूत वैक्सीन कैंडिडेट बनाने वाली कंपनियां मॉडेर्ना और फाइजर ने अपने-अपने अंतिम ट्रायलों में 25 से 30 हजार प्रतिभागियों को शामिल किया है।

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इन वैक्सीनों को चुनौती देने के लिए एक और मजबूत वैक्सीन कैंडिडेट हाल में सामने आई है, जिसे जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने तैयार किया है। खबर है कि इस वैक्सीन की क्षमता को साबित करने के लिए कंपनी ने करीब 60 हजार प्रतिभागियों को अपने अंतिम ट्रायल में शामिल करने की योजना बनाई है। यह कोविड-19 के खिलाफ तैयार की गई तमाम वैक्सीनों से जुड़ा अब तक का सबसे बड़ा ह्यूमन ट्रायल होगा। कंपनी का कहना है कि वह सितंबर में तीसरे ट्रायल के शुरू होने की उम्मीद लगा रही है और इसके लिए 60 हजार स्वस्थ वॉलन्टियर्स का नामांकन करने की कोशिश कर रही है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ये ट्रायल अमेरिका के अलावा मैक्सिको और ब्राजील में होंगे। बताया गया है कि इन तीनों देशों की 180 मेडिकल लोकेशंस पर जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन प्रतिभागियों पर आजमाई जाएगी।

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने जॉनसन एंड जॉनसन के प्रवक्ता के हवाले से बताया है, 'हम तीसरे चरण के ट्रायल प्रोग्राम के लिए योजना औ नामांकन प्रक्रिया के शुरू होने की पुष्टि कर सकते हैं, जिसे पहले और दूसरे चरण के ट्रायलों के पूरे होने और नियामकों की मंजूरी मिलने के बाद शुरू किया गया है। हम हमारे तीसरे चरण के कार्यक्रम को जितना संभव हो उतना मजबूत रखने की कोशिश करेंगे। इसीलिए इसमें 60 हजार प्रतिभागियों को शामिल किया जा सकता है और वैक्सीन को उन इलाकों में टेस्ट किया जाएगा जहां कोविड-19 के मामले ज्यादा संख्या में सामने आए हैं।'

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उधर, अपनी वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया को लेकर विवादों में रहे रूस ने भी घोषणा की है कि उसने स्पूतनिक-5 वैक्सीन के अंतिम चरण के ट्रायल के लिए 40 हजार लोगों को नामांकित किया है। गौरतलब है कि इस महत्वपूर्ण और निर्णायक ट्रायल के बिना ही रूस ने इस वैक्सीन को अप्रूव करते हुए रजिस्टर करा लिया था और इसे कोविड-19 के खिलाफ 'दुनिया की पहली वैक्सीन' घोषित कर दिया था। दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने उसकी वैक्सीन पर सवाल उठाए हैं, जिसके अभी तक केवल पहले चरण के ट्रायल के परिणाम उपलब्ध हो पाए हैं। 

रूस के वैक्सीन बनाने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कई यूरोपीय देशों और अमेरिका ने स्पूतनिक-5 वैक्सीन को स्वीकार करने और खरीदने से इनकार कर दिया है। ऐसे में अब रूसी सरकार वैक्सीन की क्षमता को साबित करने के लिए अंतिम चरण के ट्रायल करने जा रही है। हालांकि उसका दावा है कि योजना में यह पहले से शामिल था, जिसे अब अंजाम दिया जाएगा। लेकिन निर्णायक ट्रायल का दायरा कितना बड़ा होगा, यह अब अचानक सामने आया है। बहरहाल, बता दें कि रूस ने अपने मास्को स्थित गामालेया इंस्टीट्यूट और रक्षा मंत्रालय के सहयोग से स्पूतनिक-5 वैक्सीन को तैयार किया है।

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उत्पाद या दवाइयाँ जिनमें कोविड-19: जॉनसन एंड जॉनसन 60,000 लोगों पर वैक्सीन आजमाएगी, आलोचना के बाद रूस ने भी तीसरे ट्रायल के लिए 40,000 लोगों को शामिल किया है

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