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कोविड-19 के कुछ मरीजों में तंत्रिकाविकृति से जुड़े मामले सामने आए हैं। यूनाइटेड किंगडम स्थित कैंब्रिज यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट (सीयूएच एनएचएसएफटी) में कोविड-19 के मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। उनकी मानें तो कोरोना वायरस की चपेट में आने वाले कुछ गंभीर मरीजों में मोनोन्यूराइटिस मल्टीप्लेक्स से जुड़े कुछ ऐसी न्यूरोलॉजिकल कमियां देखने को मिली हैं, जिनकी डॉक्टरों को कोई उम्मीद नहीं थी। खबरों के मुताबिक, रिपोर्ट में उन्होंने कहा है कि कोरोना वायरस से गंभीर रूप से संक्रमित होने के चलते आईसीयू में भर्ती कुछ कोविड-19 मरीजों में तंत्रिका तंत्र से जुड़ी ऐसी समस्याएं देखने को मिली हैं, जो पीड़ित को तंत्रिकाविकृति से ग्रस्त कर सकती हैं।

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रिपोर्ट के मुताबिक, यह न्यूरॉलॉजिकल समस्या मोनोन्यूराइटिस मल्टीप्लेक्स या मल्टीफोकल न्यूरोपैथी से जुड़ी है, जोकि पेरिफेरल न्यूरोपैथी का एक प्रकार है। इस कंडीशन में मरीज के दो या उससे ज्यादा तंत्रिका एरिया में सूजन होने लगती है। इससे शरीर के कई हिस्सों में संवेदना की क्षमता में विषमता आ सकती है और मोटर नर्व क्षतिग्रस्त हो सकती है। इस संभावना के चलते सीयूएच एनएचएसएफटी के डॉक्टर स्टीफन सॉसर और उनके सहयोगियों को अंदेशा है कि कोविड-19 से बचने वाले गंभीर मरीजों को लंबे वक्त तक विशेष आईसीयू-एक्वायर्ड (आईसीयूएडब्ल्यू) वीकनेस सिस्टम के सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है।

खबर के मुताबिक, अपनी रिपोर्ट में इन हेल्थ एक्सपर्ट ने लिखा है, 'कोविड-19 के आने के बाद के हमारे क्लिनिक अनुभव में हमने देखा है कि इस बीमारी के कुछ मरीजों के तंत्रिका तंत्र के केंद्र में अपंगता पैदा करने वाली कमियां देखी गई हैं, जिनका संबंध एग्जोनल (तंत्रिकाक्षीय) मोनोन्यूराइटिस मल्टीप्लेक्स से है।' टीम के सदस्यों की मानें तो कोविड-19 से जुड़ी इस अप्रत्याशित जटिलता के मरीजों पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकते हैं, जिससे उनके सामान्य स्वास्थ्य की बहाली में दिक्कतें आ सकती हैं। ऐसे में डॉ. स्टीफन और उनके साथियों ने जोर देकर यह सलाह दी है कि कोरोना वायरस से गंभीर रूप से संक्रमित होने के चलते जो लोग आईसीयूएडब्ल्यू पर है, उन्हें अपने तंत्रिका तंत्र की विस्तृत जांच करा लेनी चाहिए, क्योंकि उनमें से कइयों में केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

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डॉक्टरों ने बताया कि कोविड-19 से ग्रस्त 69 मरीजों को लंबे वक्त (औसतन 31 दिन) तक अस्पताल के आईसीयू में मकैनिकल वेंटिलेशन पर रखना पड़ा था। इन सबकी जान बच गई थी। लेकिन आईसीयू से डिस्चार्ज होने के बाद उनमें से 16 प्रतिशत यानी 11 मरीजों में इस प्रकार की तंत्रिकाविकृति देखने को मिली थी। टीम का कहना है कि ऐसा कई केसों में हो सकता है, क्योंकि दुनियाभर में कोरोना वायरस के संक्रमण से गंभीर रूप से बीमार हुए कई लोगों में इसी तरह की कमजोरी देखने को मिली है, जिसका संबंध न्यूरोपैथी से है। हालांकि न्यूरोफिजियोलॉजिकल आंकलन के बाद एग्जोनल सेंसरीमोटर मोनोन्यूरोपैथी और गंभीर तंत्रिकाविकृति की समस्या केवल एक मरीज में दिखाई दी है।

जांच के आधार पर डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों में तंत्रिका संबंधी यह समस्या अक्सर नर्व फेसिकल (तंत्रिका गुच्छों) के साथ देखने को मिली और जिसका प्रभाव कोविड-19 के अन्य लक्षणों से ज्यादा था। डॉक्टरों के मुताबिक, उन्होंने तीन मरीजों की अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग कराई थी, जिसमें उनके शरीर की कई तंत्रिकाओं में एक तरह का गाढ़ापन देखने को मिला। वहीं, एक अन्य मरीज के एमआरआई स्कैन में दोनों जांघों में तंत्रिकाविकृति का पता चला। इस स्कैन में मरीज के कूल्हों की मांसपेशियों में हीमेटोमा की मौजूदगी का भी पता चला, जोकि एक्मो (एक्स्ट्राकोर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन) रेस्पिरेटरी सपोर्ट से जुड़ी एक जटिलता है। कोविड-19 के कई गंभीर मरीजों को बचाने में इस टेक्निक का इस्तेमाल किया जाता रहा है। बहरहाल, इन तथ्यों के आधार पर सीयूएच एनएचएसएफटी के डॉक्टरों का अंदेशा है कि हाल में डिस्चार्ज किए गए अन्य मरीजों में भी न्यूरोपैथी के मामले सामने आ सकते हैं।

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नोट: कोविड-19 और तंत्रिकाविकृति के संबंध का दावा करता यह शोध अभी तक किसी मेडिकल जर्नल में प्रकाशित नहीं हुआ है। इसकी समीक्षा होना बाकी है। फिलहाल इसे मेडआरकाइव पर पढ़ा जा सकता है। हम इसके तथ्यों की जानकारी देने के अलावा इस शोध का न तो समर्थन करते हैं और न ही विरोध। रिपोर्ट को पढ़ते हुए पाठक अपने विवेक का इस्तेमाल करें।

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