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मास्क पहनने को कोविड-19 को फैलने से रोकने का सबसे कारगर तरीका बताया जाता रहा है। अभी तक शायद ही कोई ऐसा अध्ययन आया हो, जिसमें कोरोना वायरस के ट्रांसमिशन को नियंत्रित करने के इस तरीके पर सवाल उठाए गए हों। लेकिन अब अध्ययनकर्ताओं ने एक विशेष केस के आधार पर कहा है कि कोविड-19 को रोकने के लिए पहने जा रहे मास्क सेंसिटिव स्किन और (अलग-अलग) एलर्जी से प्रभावित लोगों में अलग-अलग प्रकार के एक्जिमा का कारण बन सकते हैं। बता दें कि एक्जिमा त्वचा से जुड़ी एक समस्या है, जिसमें स्किन पर सूजन और खुजली होने लगती है, उसमें दरारें पड़ जाती हैं और वह सूख जाती है। एटोपिक डर्मटाइटिस को एक्जिमा का सबसे कॉमन प्रकार माना जाता है।

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खबर के मुताबिक, इस साल वर्चुअल तरीके से आयोजित हुए अमेरिकन कॉलेज ऑफ एलर्जी, अस्थमा एंड इम्यूनोलॉजी की वार्षिक वैज्ञानिक बैठक में शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि कई प्रकार की स्किन एलर्जी से ग्रस्त एक व्यक्ति में मास्क पहनने के कारण कॉन्टैक्ट डर्मटाइटिस की समस्या पैदा हो गई थी। इस बारे में बैठक के सामने प्रेजेंटेशन देते हुए एसीएएआई के सदस्य याशू धमिजा ने बताया, 'हमने हमारे क्लिनिक में एक 60 साल के अश्वेत व्यक्ति के कॉन्टैक्ट डर्मटाइटिस का इलाज किया है, जो पहले से वयस्कों को होने वाले एक्जिमा से पीड़ित था। उसे चेहरे पर कष्टदायक चकत्ते होने के चलते तीन बार अस्पताल के इमरजेंसी रूम में एडमिट किया गया था।' धमिजा ने आगे बताया, 'इस साल अप्रैल तक उसकी स्किन से जुड़ी समस्याएं नियंत्रण में थीं। लेकिन मास्क पहनने के चलते ये लक्षण फिर सामने आने लगे।'

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बैठक में बताया गया कि इमरजेंसी रूम के डॉक्टरों ने इस मरीज को चकत्तों से राहत देने के लिए प्रेडनिसोन ड्रग प्रेस्क्राइब किया। लेकिन जब उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो उसे अस्पताल के एलर्जी क्लिनिक भेज दिया गया। वहीं, आगे की जांच में पता चला कि अप्रैल 2020 में इस पीड़ित की स्किन एलर्जी की समस्याओं का फिर सामने आना कोविड-19 महामारी और उसके कारण मास्क पहनने की मजबूरी से जुड़ा था। जांच से जुड़े एक अन्य शोधकर्ता और एसीएएआई के एक और सदस्य तथा इस मामले से जुड़े अध्ययन के सह-लेखक क्रिस्टिन ने बताया, 'हमे पता चला कि पीड़ित के चेहरे पर चकत्ते उसी जगह हुए थे, जहां मास्क के इलास्टिक पार्ट लगे होते हैं।'

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क्रिस्टिन ने आगे कहा, 'हमने उसकी प्रेडनिसोन की डोज कम कर दी और सलाह दी कि चकत्ते खत्म होने तक वह टॉपिकल स्टेरॉयड और टॉपिकल इम्यूनोसप्रेसेंट ले। साथ ही हमने उसे कॉटन वाले डाई-फ्री वाले मास्क पहनने को कहा, जिनमें इलास्टिक नहीं होती है। एक हफ्ते के टेलीफॉनिक फॉलोअप के बाद मरीज ने बताया कि उसके रैशेज तब भी बढ़ रहे थे।' इसके बाद उसकी फिर जांच की गई और इस बार शोधकर्ताओं ने नोट किया कॉन्टैक्ट डर्मटाइटिस को सक्रिय करने वाले कॉमन एलर्जन्स (एलर्जी करने वाले तत्व) मास्कों, इलास्टिक बैंड्स और फेस मास्क के अन्य हिस्सों में पाए जाते हैं और यही इस व्यक्ति के चेहरे पर हुई एलर्जी का कारण बने थे। इस आधार पर वैज्ञानिकों ने कहा है कि पहले से एलर्जी के प्रति संवेदनशील लोग मास्क पहनते या खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें।

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