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भारत में कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन के मामले बढ़ते दिख रहे हैं। मंगलवार को पहले छह मामलों की पुष्टि के बाद बुधवार सुबह आई मीडिया रिपोर्टों में 14 और नए मामलों सामने आने की जानकारी दी गई है। इससे नए म्यूटेशन वाले कोरोना वायरस से संक्रमित हुए लोगों की संख्या 20 हो गई है। गौरतलब है कि सितंबर में पहली बार यूनाइटेड किंगडम (यूके) में सामने आया नया वायरस म्यूटेशन सार्स-सीओवी-2 के पिछले स्ट्रेन्स से काफी ज्यादा संक्रामक बताया जाता है। इसके चलते यूके में रिकॉर्ड स्तर पर मरीजों की संख्या बढ़ रही है। दुनिया के कई देशों में यह स्ट्रेन पहुंच चुका है, जिनमें अब भारत भी शामिल हो गया है। यहां इसे रोकने के तमाम प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन वे सभी ऐसा कर पाने में विफल साबित हुए हैं और अब वायरस के आम लोगों के बीच फैलने का खतरा खड़ा हो चुका है। यह खतरा इस जानकारी के साथ और बड़ा हो जाता है कि हाल में यूके से लौटे कई लोग एयरपोर्ट अथॉरिटी और स्वास्थ्यकर्मियों को जानकारी दिए बिना ही वहां से गायब हो गए। उनमें से कइयों की ट्रेसिंग नहीं हो पाई है। देखना होगा कि यह भारत के लिए कोई नया संकट खड़ा कर पाता है या नहीं।

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एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, नए स्ट्रेन से जुड़े 20 मामलों में से आठ की दिल्ली और सात की बेंगलुरु स्थित प्रयोगशाला में पुष्टि की गई है। जानकारों का कहना है कि यह संख्या अभी और बढ़ सकती है। हालांकि डॉक्टरों और मेडिकल विशेषज्ञों की राय रही है कि नए वायरस म्यूटेशन के पहले के स्ट्रेन्स से ज्यादा जानलेवा होने के सबूत नहीं हैं और न ही यह इतना घातक है कि इसे कंट्रोल नहीं किया जा सकता। यह वैक्सीन निर्माता कंपनियों का भी कहना है कि उनके द्वारा तैयार किए गए कोरोना वायरस टीके नए म्यूटेशन की रोकथाम के लिए पर्याप्त हैं। इनमें चर्चित कोरोना वैक्सीन बीएनटी162बी2 बनाने वाली फाइजर कंपनी के सीईओ का कहना है कि महज छह हफ्तों में वैक्सीन को नए वायरस के खिलाफ सक्षम बनाया जा सकता है।

वहीं, मंगलवार को नए स्ट्रेन के पहले मामले सामने आने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा था कि मौजूदा कोरोना वायरस वैक्सीन नए म्यूटेशन के खिलाफ भी काम करेंगी। खबर के मुताबिक, बयान में सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर के विजयराघवन ने कहा, 'ऐसा कोई सबूत नहीं है कि मौजूदा टीके यूके और दक्षिण अफ्रीका से आए कोविड-19 वैरिएंट्स के खिलाफ सुरक्षा देने में विफल रहेंगे।'

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लोग ही बढ़ा रहे सरकार की मुश्किलें
इस नए संकट को बढ़ने से पहले ही नियंत्रित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें तेजी से काम कर रही हैं। इसके तहत सबसे पहले यूके से आने वाली उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। पहले यह रोक 31 दिसंबर तक के लिए थी। लेकिन नए मामलों की पुष्टि के बाद इसे कम से कम सात जनवरी तक के लिए बढ़ा दिया गया है। हालांकि इस रोक से पहले ही (23 दिसंबर तक) भारत में करीब 33 हजार लोग यूके से लौट चुके थे। सरकार इन सभी को ट्रेस करने की कोशिश कर रही है। अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक, अभी तक 114 से 233 लोगों के टेस्ट पॉजिटिव आ चुके हैं। इन सभी के ब्लड सैंपल देश की दस बड़ी प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं ताकि पता चल सके कि कौन-कौन से संक्रमित नए वायरस स्ट्रेन की चपेट में आए हैं।

इसके अलावा उन सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की जीनोम सीक्वेंसिंग की जाएगी, जो टेस्ट में पॉजिटिव निकले हैं और कोविड लक्षण दिखाई दिए हैं। इस बारे में नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल का कहना है, 'शुरू में ही वायरस को कंट्रोल करना आसान होता है। एक बार ट्रांसमिशन बहुत ज्यादा फैल गया तो फिर उसे कंट्रोल करना बहुत मुश्किल होता है।'

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हालांकि यूके से लौट रहे लोग ही सरकार की कोशिशों के आगे रोड़ा बनते दिख रहे हैं। खबर हैं कि ऐसे कई लोग प्रशासन या स्वास्थ्यकर्मियों को जानकारी दिए बिना ही एयरपोर्ट्स या क्वारंटीन सेंटरों से जा रहे हैं। छह दिन पहले ऐसा एक मामला काफी चर्चा में रहा था। खबरों के मुताबिक, यूके से दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरी आंध्र प्रदेश की एक महिला कोरोना वायरस टेस्ट में पॉजिटिव आने के बाद भी वहां से बिना जानकारी दिए निकल गई थी। अब खबर है कि यह संक्रमित महिला सार्स-सीओवी-2 के नए स्ट्रेन की ही चपेट में आई है। इस खबर ने स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों के बीच हलचल मचा दी है। हालांकि खबर लिखे जाने तक महिला से किसी अन्य व्यक्ति में वायरस ट्रांसमिट होने की बात सामने नहीं आई है। इस बीच, अन्य मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि पुणे में कम से कम 109 लोग, जो यूके से लौटे हैं, ट्रेस नहीं हो पाए हैं। ओडिशा में भी 70 से ज्यादा लोगों का पता लगाने की कोशिश की रही है।

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