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कोविड-19 संकट के बीच दिल्ली में दूसरे सेरोलॉजिकल सर्वे की शुरुआत शनिवार से हो गई है। दिल्ली में रहने वाले कितने लोगों में कोरोना वायरस को खत्म करने वाले एंटीबॉडी विकसित हुए हैं, यह जानने के लिए आज से सात अगस्त तक करीब 15 हजार लोगों के ब्लड सैंपल लिए जाएंगे। इसके बाद जांच कर पता लगाया जाएगा कि इनमें से कितने प्रतिशत के शरीर में कोविड-19 बीमारी से लड़ने वाले रोग प्रतिरोधक पैदा हो गए हैं। इससे पहले जून के अंत और जुलाई की शुरुआती दिनों के दौरान हुए पहले सेरोलॉजिकल सर्वे से यह पता चला था कि दिल्ली की 23 प्रतिशत आबादी में कोरोना वायरस की चपेट में आने के बाद प्राकृतिक रूप से एंटीबॉडी विकसित हो गए हैं। इसके कुछ दिनों बाद दिल्ली सरकार ने घोषणा की थी कि अब वह हर महीने राजधानी में सेरो सर्वे कराएगी।

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खबरों के मुताबिक, दूसरे सेरो सर्वे के तहत दिल्ली के सभी जिलों के अधिकारियों को ब्लड सैंपलिंग से जुड़े अलग-अलग टार्गेट दिए गए हैं। मसलन, उत्तर-पश्चिम दिल्ली को सबसे ज्यादा 2,200 सैंपल इकट्ठा करने को कहा गया है। पिछले सर्वे के दौरान इस जिले में सबसे ज्यादा 3,548 सैंपल लिए गए थे। पश्चिम दिल्ली के जिले में पिछली बार 2,373 सैंपल लिए गए थे। इस बार यहां के अधिकारियों को 2,150 नमूने लेने को कहा गया है। वहीं, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में 1,548 ब्लड सैंपल लिए जाने की योजना है। पहले इस जिले से 2,702 सैंपल इकट्ठा किए गए थे। उधर, जिला अधिकारियों और मजिस्ट्रेटों ने भी अपनी तरफ से कई तरह की तैयारियां की हैं। उत्तर-पश्चिम जिले के मजिस्ट्रेट संदीप कुमार मिश्रा ने बताया है कि उन्होंने ब्लड सैंपल इकट्ठा करने के लिए 16 टीमों का गठन किया है। उन्हें सरकार की तरफ से कहा गया है कि दिशा-निर्देशों के अनुसार विभिन्न चरणों के तहत सिस्टमैटिक तरीके से रैंडम सैंपलिंग लेना सुनिश्चित करें ताकि उससे संबंधित इलाकों का प्रतिनिधित्व करने वाले नमूनों की जांच की जा सके।

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सेरोलॉजिकल सर्वे क्या है?
किसी रोगाणु या एंटीजन के खिलाफ मानव शरीर का इम्यून सिस्टम जब काम करना शुरू करता है तो इससे संबंधित रोगाणु के संक्रमण को खत्म करने वाले एंटीबॉडीज का निर्माण होता है। ये एंटीबॉडीज या रोग प्रतिरोधक स्वयं को रोगाणुओं से अटैच कर उन्हें निष्क्रिय कर देते हैं। सेरोलॉजिकल टेस्ट शरीर में इन्हीं एंटीबॉडी की मौजूदगी की पुष्टि के लिए किया जाने वाला परीक्षण है। यह टेस्टिंग जब बड़े पैमाने पर अंजाम की जाती है, यानी जब किसी अभियान के तहत सैकड़ों-हजारों लोगों के ब्लड टेस्ट लेकर उनमें किसी संक्रामक रोग के खिलाफ पैदा हुए एंटीबॉडी का पता लगाया जाता है तो उसे सेरोलॉजिकल या सेरो सर्वे कहते हैं। यह सर्वे एंटीबॉडी के अलावा एंटीजन की पहचान करने के लिए भी किए जाते हैं।

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