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मानसून आते ही कई तरह की बीमारियों के फैलने का खतरा रहता है। इस मौसम में डेंगू सबसे ज्यादा लोगों को अपना शिकार बनाता है। इसमें सबसे पहले बुखार होता है और फिर सिरदर्द, जोड़ों में दर्द या चकत्ते पड़ने लगते हैं। इस बीमारी से ग्रस्त लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में सभी को सावधानी बरतने की जरूरत है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया की लगभग आधी आबादी डेंगू के खतरे में है। यह बीमारी मादा मच्छर (एडीज एजिप्टी) के काटने से फैलती है। इसके अलावा वर्षा, तापमान में उतार-चढ़ाव और भी डेंगू के मामलों में वृद्धि का कारण है। हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें पता चला है कि फिलीपींस में डेंगू महामारी की वजह से 188,000 लोग बीमार हैं जबकि इसकी वजह से 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

बांग्लादेश में, अगस्त माह में 40 लोगों की मौत हुई थी जबकि 50,000 लोगों के बीमार होने की बात सामने आई। भारत के बेंगलुरु में इस साल 3,300 से अधिक लोग प्रभावित हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त बरेली, दून और नागपुर से भी बड़ी संख्या में डेंगू के मामले सामने आए हैं। ऐसे में जरूरी है कि इस संक्रमण से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों को नजरअंदाज न करें, अगर आप भी इस संक्रमण से ग्रसित हैं, तो कुछ बातों पर ध्यान दें। 

वैसे तो डेंगू बुखार के अधिकांश मामले बारिश के मौसम में सामने आते हैं लेकिन यह संक्रमण वर्ष के अन्य समय में भी हो सकता है। डेंगू के संक्रमण के गंभीर होने पर उल्टी आने, आंतरिक रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) या शॉक लगने की स्थिति को डेंगू शॉक सिंड्रोम कहा जाता है। यह स्थिति काफी गंभीर होती है क्योंकि इसमें अत्यधिक रक्तस्राव और मरीज की मृत्यु भी हो सकती है।

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2011 में ‘जर्नल ऑफ एमर्जेंसीज, ट्रॉमा एंड शॉक’ में प्रकाशित एक रिसर्च लेख में, सेनका राजपक्षे ने लिखा है कि “डेंगू में अचानक से शॉक लगता है और ये बीमारी बड़ी तेजी से बढ़ती है। डेंगू में शॉक लगने के रोगजनक (बीमारी पैदा करने वाले कारक) काफी जटिल होते हैं। इसमें साइटोकिंस और केमिकल मेडिएटर्स की वजह से एंडोथेलियल डिसफंक्शन (छोटी धमनियों की एंडोथेलियल परत अपने सभी महत्वपूर्ण कार्य करने में विफल हो जाती है) हो जाता है। इस स्थिति को सहायक उपचार और साफ पानी का सेवन कर नियंत्रित किया जा सकता है।
 

उपचार के विकल्प

वैसे तो डेंगू के लिए कोई विशिष्ट इलाज नहीं है, लेकिन दवा बनाने वाली कई कंपनियों ने ऐसे टीके बनाए हैं जो अभी चिकित्सकीय ट्रायल में हैं। मई 2019 में, यूएस फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन ने ‘डेंगवेक्स’ नामक डेंगू वैक्सीन को कुछ प्रमुख प्रतिबंधों के साथ मंजूरी दी थी। 

इस साल फिलीपींस में डेंगू के प्रकोप के बाद, देश की सरकार ने भी पांच अन्य टीकों के उपयोग को मंजूरी दी, जिनका अभी क्लिनिकल ट्रायल ही चल रहा था। 1 अगस्त 2019 को ‘लैंसेट चाइल्ड एडोलसेंट हेल्थ’ में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि डेंगू की वैक्सीन ‘एनआईएच’ क्लिनिकल परीक्षण के बाद जल्द ही प्रयोग में लाई जा सकेगी। 

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बचाव के उपाय 

  • ऐसे कपड़े पहनें जो आपके शरीर को पूरी तरह से कवर करते हों, घर में कीटनाशक दवाई या स्प्रे का उपयोग करें और अपने आस-पास साफ-सफाई रखें ताकि इस बीमारी से बचा जा सके।
  • यदि आपको फ्लू जैसे लक्षण दिख रहे हैं, तो डॉक्टर आपको डेंगू के टेस्ट के लिए खून की जांच करवाने के लिए कह सकते हैं। ज्यादा घबराएं नहीं और जितना हो सके आराम करें।
  • यदि आपके घर में किसी सदस्य को डेंगू का बुखार हो जाता है, तो घर में रहने वाले अन्य लोगों और स्वयं को डेंगू के मच्छर से सुरक्षित रखें। यदि कोई मच्छर संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद किसी स्वस्थ व्यक्ति को काट ले तो उस व्यक्ति में भी डेंगू का संक्रमण फैल सकता है।

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