इंडोनेशिया में डेंगू नियंत्रण के प्रयासों को बड़ी कामयाबी मिली है। यहां तीन सालों तक चले ट्रायल के बाद डेंगू के मामलों में उल्लेखनीय कमी देखी गई है। इस काम में वोलबेकिया नामक बैक्टीरिया की भूमिका अहम बताई गई है। खबर के मुताबिक, इसी बैक्टीरिया की मदद से डेंगू का कारण बनने वाले एडीज एजिप्टाई मच्छरों को संक्रमित किया गया था, जिसके चलते वे बीमारी को ज्यादा नहीं फैला पाए। इन मच्छरों को मुख्य रूप से इंडोनेशिया के योग्याकार्ता शहर और उसके आसपास के इलाके में छोड़ा गया था। तीन साल के प्रयास के बाद अब परिणामों में पता चला है कि इस इलाके में डेंगू के केसों में बड़ी कमी देखी गई है।

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इस प्रयोग के चलते योग्याकार्ता शहर में डेंगू के केसों में आई कमी और इंडोनेशिया के अन्य इलाकों में इसी बीमारी से जुड़े मामलों में काफी अंतर पाया गया है। इन इलाकों में बैक्टीरिया से संक्रमित मच्छरों को नहीं छोड़ा गया था या कहें इन इलाकों में डेंगू के मच्छरों की स्थिति सामान्य ही थी। इस प्रयोग को वर्ल्ड मॉस्किटो प्रोग्राम ने शुरू किया था, जिसे इंडोनेशिया की गदजाह मदा यूनिवर्सिटी और ताहिजा फाउंडेशन ने अपना सहयोग दिया है। इन संस्थानों ने डेंगू की वजह बनने वाले एडीज मच्छरों में वोलबेकिया बैक्टीरिया इनजेक्ट किया था ताकि उनके डेंगू को ट्रांसमिट करने की क्षमता को प्रभावित किया जा सके। इस पूरे काम में तीन साल का वक्त लगा, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ गए हैं।

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रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रायल के तहत मिले परिणामों को मूल्यांकन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के वेक्टर कंट्रोल एडवाइजरी ग्रुप के सामने सबमिट किया जाएगा। इस समूह की अगली बैठक दिसंबर में होनी है। वहां विशेषज्ञ औपचारिक रूप से ट्रायल के परिणामों के प्रभावों और संबंधित अध्ययनों का आंकलन करेंगे। जानकारों का कहना है कि हालांकि एडीज मच्छरों से होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए पहले से कई कारगर तरीके मौजदू हैं, लेकिन अगर नए और कारगर प्रयोग सामने आते हैं तो उनका भी स्वागत किया जाएगा।

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क्या है वोलबेकिया?
इंडोनेशिया में जिस वोलबेकिया बैक्टीरिया की मदद से डेंगू को नियंत्रित करने में कामयाबी हासिल की गई है, वह एक अंतर्कोशिकीय (कोशिकाओं के बीच में पैदा होने वाला) प्राकृतिक सहजीवी जीवाणु है। ये एडीज एजिप्टाई मच्छरों के डेंगू वायरस और इससे मिलते-जुलते वायरसों को फैलाने की क्षमता में कमी करने के लिए जाना जाता है। अभी तक ऐसे एपिडेमियोलॉजिकल एविडेंस नहीं मिले हैं, जिनमें दावा किया गया हो कि इस बैक्टीरिया से संक्रमित मच्छरों से किसी आबादी विशेष में डेंगू के मामलों में कमी आई। ऐसे में इंडोनेशिया में हुए अध्ययन में कई मेडिकल विशेषज्ञों की रुचि बनी हुई है।

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