myUpchar प्लस+ सदस्य बनें और करें पूरे परिवार के स्वास्थ्य खर्च पर भारी बचत,केवल Rs 99 में -

अवसाद (डिप्रेशन) और हृदय रोग ऐसी स्थिति होती है, जिसमें व्यक्ति कुछ नहीं कर पता है। यह दोनों रोग दुनियाभर के कई लोगों को प्रभावित कर चुके हैं और कुछ व्यक्तियों में तो इन दोनों के लक्षण एक साथ भी देखने को मिलते हैं। फिलाडेल्फिया में हुई अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन साइंटिफिक सेशन 2019 नवंबर 16-18 में बताया गया कि हृदय रोग और अवसाद के बीच एक गहरा सबंध है :

डिप्रेशन का इतिहास न होते हुए भी कई लोग हार्ट अटैक (दिल का दौरा पड़ना) या हार्ट फेलियर के बाद डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं, तो डिप्रेशन से ग्रस्त कई लोगों में सामान्य लोगों के मुकाबले हृदय रोग होने की अधिक आशंका देखी जाती है।

इस रिसर्च में 20 वर्ष और उससे बढ़ी उम्र के लोगों पर अवसाद और गैर-घातक हृदय रोग जैसे हार्ट फेलियर, एनजाइना, हार्ट अटैक और स्ट्रोक के बीच के संबंधों को लेकर शोध किया गया। डिप्रेशन से जुड़ी प्रश्नावली के साथ नेशनल हेल्थ और न्यूट्रिशन एग्जामिनेशन सर्वे में 11 हजार से अधिक वयस्कों में डिप्रेशन के लक्षण पाए गए। 1200 से अधिक लोगों ने बताया कि उन्हें हृदय रोग और स्ट्रोक है। 

डिप्रेशन के बढ़ते स्तर (माइल्ड, मोड्रेट, मोड्रेटली सीवियर, सीवियर) के कारण हृदय रोग और स्ट्रोक होने की आशंका हर स्तर के साथ 24 फीसदी तक बढ़ सकती है। 

 (आगे पढ़ें - डिप्रेशन (अवसाद) से उबरने के घरेलू उपाय)

इस स्टडी के विशेषज्ञ योसेफ एम. खान, एम.डी., पीएच.डी., एम.पीएच., नेशनल डायरेक्टर ऑफ हेल्थ इन्फार्मेटिक्स एंड एनालिटिक्स फॉर दी अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन डलास ने कहा, इस तरह के बढ़ते स्तर के निहितार्थ असंख्य हैं। उन्होंने कहा, इनके बीच के संबंध और प्रभाव के स्तर को समझकर हम इसे अच्छे से पहचान व रोक पाएंगे और इसका इलाज व नई तकनीक की मदद से हृदय और रक्त वाहिकाओं से संबंधित रोगों को कम कर सकेंगे। यही नहीं मानसिक रोग व हृदय रोग का इलाज  करके लोगों की जीवनशैली को बेहतर बना पाएंगे।

हार्ट अटैक के 15 फीसदी मरीज और कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट (CABG) सर्जरी करवा चुके 20 फीसदी मरीज गंभीर डिप्रेशन से ग्रस्त होते हैं।

(आगे पढ़ें - दिल का दौरा पड़ने पर क्या करें )

डिप्रेशन और हृदय रोग व स्ट्रोक के बीच संबंध
शोध में पाया गया कि डिप्रेशन व्यक्ति के स्वास्थ्य पर काफी बुरा प्रभाव डालता है, जिसके कारण कई हृदय संबंधी व मानसिक रोग विकसित हो सकते हैं, जैसे :

  • असामान्य तनाव के कारण हाई ब्लड प्रेशर, आर्टेरिअल डैमेज, अनियमित दिल की धड़कन और कमजोर इम्यून सिस्टम हो सकते हैं। 
  • हृदय रोग से ग्रस्त व्यक्तियों में डिप्रेशन के कारण हार्ट अटैक या खून के थक्के जमने का जोखिम बढ़ सकता है। जो लोग हृदय रोग से ग्रस्त नहीं होते हैं उनमें डिप्रेशन हार्ट अटैक और कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएबीजी) का खतरा बढ़ा सकता है। 
  • हार्ट फेलियर और डिप्रेशन दोनों से एक साथ ग्रस्त व्यक्ति को अस्पताल में फिर से भर्ती करना पड़ सकता है और इसके कारण मरीज की मृत्यु की आशंका बढ़ सकती है।
  • हृदय रोग के इलाज के दौरान डिप्रेशन दर्द, थकावट और सुस्ती को बढ़ा सकता है या व्यक्ति को मानसिक रूप से समाज से दूर कर सकता है। सीएबीजी से ग्रस्त मरीज यदि सर्जरी के बाद अपने डिप्रेशन का इलाज न करवाएं तो उनको रोग होने और मृत्यु का जोखिम बढ़ सकता है। 

हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार डिप्रेशन के कारण हृदय रोग होता या हृदय रोग के कारण डिप्रेशन होता है, इसको अच्छे से समझने के लिए अभी कई शोध करने की जरूरत है।

(आगे पढ़ें - मानसिक रोग दूर करने के उपाय)

कैसे करें बचाव
नकारात्मक जीवनशैली डिप्रेशन का मुख्य कारण माना जाता है, जैसे धूम्रपान का सेवन, शराब की लत, व्यायाम की कमी, खाने की गलत आदते और दोस्तों या सामाजिक सहयोग की कमी। यह सभी हृदय रोग के इलाज में भी बाधा डालते हैं।

डिप्रेशन, हृदय रोग या स्ट्रोक से छुटकारा पाने के लिए न्यूयॉर्क स्थित द जोआन एच. टीस्च सेंटर फॉर वीमेन हेल्थ की मेडिकल डायरेक्टर, निसा गोल्डबर्ग ने तीन स्टेप्स फॉलो करने की सलाह दी है...

  • स्ट्रेस या एंग्जाइटी के कारण को पहचाने और उसके इलाज की कोशिश करें
  • स्वस्थ आदतों को अपनाएं
  • सभी बुरी आदतों को एक साथ ठीक करने की बजाय उन्हें एक-एक करके छोड़ने की कोशिश करें

(आगे पढ़ें - स्वस्थ रहने के नियम)

और पढ़ें ...
ऐप पर पढ़ें