टाइप 1 डायबिटीज एक क्रॉनिक कंडीशन है. इसमें इम्यून सिस्टम व्यक्ति के शरीर पर अटैक करके बीटा सेल्स को नष्ट कर देता है, जो इंसुलिन के निर्माण के लिए जिम्मेदार होते हैं. टाइप 1 डायबिटीज में पैंक्रियाज इंसुलिन का निर्माण बहुत कम या न के बराबर करता है. इंसुलिन एक हार्मोन है, जिसका इस्तेमाल शरीर द्वारा एनर्जी के निर्माण के लिए किया जाता है. टाइप 1 डायबिटीज के कुल चार चरण माने गए हैं.

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आज इस लेख में आप टाइप 1 डायबिटीज के इन विभिन्न चरणों के बारे में विस्तार से जानेंगे -

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  1. ये हैं टाइप 1 डायबिटीज के 4 चरण
  2. सारांश
टाइप 1 डायबिटीज के चरण के डॉक्टर

वैश्विक स्तर पर, टाइप 1 डायबिटीज तेजी से बढ़ रहा है और यह बढ़ोत्तरी प्रति साल लगभग 2 से 3 प्रतिशत है. टाइप 1 डायबिटीज के  इलाज के बारे में अब तक पता नहीं चल पाया है. इसके इलाज के तौर पर इंसुलिन, डाइट और लाइफस्टाइल के जरिए खून में शक्कर की मात्रा को मैनेज किया जाता है. 2015 में अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन ने टाइप 1 डायबिटीज के विभिन्न चरणों के बारे में बताया था. इन चरणों को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर शुरुआती स्टेज में ही टाइप 1 डायबिटीज का पता लगाने में सक्षम हो सकते हैं. प्री स्टेज 1, स्टेज 1, स्टेज 2 और स्टेज 3, ये टाइप 1 डायबिटीज के चार चरण हैं. आइए, टाइप 1 डायबिटीज के इन चार चरणों के बारे में विस्तार से जानते हैं -

प्री स्टेज 1 डायबिटीज

इस चरण में जेनेटिक एनालिसिस की मदद से जिनोटाइप्स का पता लगा पाने में मदद मिलती है, जो अमूमन टाइप 1 डायबिटीज से जुड़े होते हैं. शोध के अनुसार, क्रोमोजोम 6 टाइप 1 डायबिटीज के जेनेटिक जोखिम के लगभग 30 से 50 प्रतिशत तक जुड़ा हुआ है. अगर किसी के भाई या बहन या किसी अन्य करीबी रिश्तेदार को टाइप 1 डायबिटीज है, तो उसे भी यह क्रोनिक बीमारी होने का खतरा रहता है.

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स्टेज 1 डायबिटीज

स्टेज 1 में व्यक्ति के शरीर में टाइप 1 डायबिटीज संबंधी कम से कम एक एंटीबॉडी खून में उपस्थित रहती है. इस चरण में एंटीबॉडीज पैंक्रियाज में बीटा सेल्स पर अटैक करना शुरू कर देते हैं, लेकिन ब्लड शुगर स्तर सामान्य ही रहता है. साथ ही टाइप 1 डायबिटीज का कोई भी लक्षण उपस्थित नहीं रहता है.

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स्टेज 2 डायबिटीज

टाइप 1 डायबिटीज के इस चरण में खून में दो या इससे ज्यादा डायबिटीज संबंधी एंटीबॉडीज उपस्थित रहती हैं. इस समय इम्यून सिस्टम द्वारा बीटा सेल्स नष्ट होते रहते हैं, जिससे शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है. ग्लूकोज को बर्दाश्त न करने के कारण इंसुलिन की कमी से ब्लड शुगर स्तर बढ़ जाता है. इस चरण में बीटा सेल्स डिसफंक्शन ज्यादा गंभीर रहता है, लेकिन टाइप 1 डायबिटीज का कोई लक्षण उपस्थित नहीं रहता है.

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स्टेज 3 डायबिटीज

टाइप 1 डायबिटीज के इस चरण में ऑटोइम्यूनिटी और लक्षणों के उपस्थित होने की वजह से बीटा सेल्स का काफी नुकसान हो चुका होता है, जिसके परिणाम स्वरूप टाइप 1 डायबिटीज सामने आता है. टाइप 1 डायबिटीज के इस चरण में डायबिटीज के लगभग सभी लक्षण नजर आने शुरू हो जाते हैं. इन लक्षणों में बहुत ज्यादा भूख या प्यास लगना, आंखों से धुंधला दिखाई देना, बहुत ज्यादा थकान महसूस होना, बार-बार पेशाब जाना, अचानक से बिना किसी कारण के वजन का कम हो जाना शामिल हो सकते हैं.

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टाइप 1 डायबिटीज की समस्या किसी को भी हो सकती है. इस अवस्था में इंसुलिन का निर्माण कम होने लगता है. टाइप 1 डायबिटीज के कुल चार चरण माने गए हैं. इसमें प्री स्टेज 1, स्टेज 1, स्टेज 2 और स्टेज 3 शामिल है. इनकी मदद से डॉक्टर शुरुआत में ही टाइप 1 डायबिटीज का पता लगा पाने में सक्षम हो सकते हैं और इससे इलाज व इसको मैनेज करने में मदद मिल पाती है.

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