डाउन सिंड्रोम के साथ पैदा होने वाले बच्चे में बुद्धि (मानसिक) विकास की सबसे ज्यादा कमी होती है। मसलन ऐसे बच्चे में शारीरिक विकास तो होता है मगर मानसिक विकास में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। जिससे बच्चे को लगभग ताउम्र एक अलग तरह की समस्या से गुजरना पड़ता है। एक ताजा अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि ऐसे बच्चों में मानसिक रोग के साथ-साथ गठिया (जोड़ों में दर्द) जैसी गंभीर बीमारी की ज्यादा आशंका है।

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क्या कहती है रिसर्च ?
एसीआर/एआरपीट की वार्षिक बैठक दौरान डाउन सिड्रोन वाले बच्चों पर किए गए अध्ययन से जुड़े आंकड़ों को रखा गया। जिसके मुताबिक 1,000 बच्चों में से एक बच्चे में किसी न किसी प्रकार का क्रॉनिक आर्थराइटिस (हाथ में दर्द या पैर के छोटे ज्वाइंट में दर्द) पाया गया। ये बीमारी किसी भी उम्र में बच्चों को प्रभावित कर सकती है। इतना ही नहीं जन्म के पहले 6 महीनों में ही इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

डाउन सिंड्रोम में गठिया क्यों?
डाउन सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है, जिसमें एक व्यक्ति के पास एक अतिरिक्त गुणसूत्र (क्रोमोसोम) नंबर 21 होता है, जो शरीर और मस्तिष्क के विकास को प्रभावित करती है। रिपोर्ट के मुताबिक जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस (किशोरों के जोड़ों में दर्द और सूजन) की तुलना में डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों में गठिया (आर्थोपैथी) के मामले बढ़े हैं।

डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों में गठिया की पहचान कैसे?
डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों में आर्थोपैथी (गठिया) के बढ़ते मामलों की पहचान करने के लिए आयरलैंड के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन किया। इस दौरान रिसर्च टीम ने रोगियों में निर्धारित समय पर रेडियोलॉजिकल विशेषताओं का वर्णन किया। इस रिसर्च के दौरान नेशनल सेंटर फॉर पीडियाट्रिक रूमेटोलॉजी आयरलैंड के डॉक्टर और रिसर्च के लेखक चार्लिन एम. फोले ने बताया कि डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों में गठिया की बीमारी बढ़ने का कारण, उसकी पहचान का ना होना हो सकता है। इसलिए ​डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों में गठिया की व्यापकता का अनुमान या पहचान करना सबसे जरूरी है

डॉक्टर फोले के मुताबिक अगर डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों में गठिया के बढ़ने के कारणों का समय पर पता चल जाए, तो इस बीमारी का इलाज भी जल्द और बेहतर तरीके से हो सकेगा।

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जांच से गठिया की हुई पहचान
बीएमजे जरनल में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों (शून्य से 21 वर्ष) को एक मस्कुलोस्केलेटल स्क्रीनिंग क्लीनिक में शामिल किया। जहां बाल रोग विशेषज्ञ ने उनकी गहनता से जांच की। जब उन्हें दूसरे डॉक्टरों के पास ले जाया गया तो उन्होंने भी डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों में गठिया के संदिग्ध मामलों की पुष्टि की। जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस (जेएआई) के लिए साधारण तरीके से जांच और इलाज शुरू किया गया। इतना ही नहीं, डॉक्टरों ने कई प्रकार का डाटा इकट्ठा किया। जैसे-

  • शोधकर्ताओं ने हाल में ही सामने आए जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस (जेआईए) के 21 बच्चों के सैंपल इकट्ठा किए और एक कंपैरिजन ग्रुप बनाया।
  • 18 महीने की अवधि में, कुल 503 बच्चों पर गठिया की पहचान के लिए जांच की गई।
  • जांच के अंदर डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों में गठिया के 18 नए मामले सामने आए।
  • पूरी रिसर्च के दौरान डाउन सिंड्रोम वाले 33 बच्चों में गठिया (आर्थोपैथी) की पहचान की गई।
  • इस रिसर्च से पता चलता है कि डाउन सिंड्रोम वाले 1000 बच्चों में से 20 बच्चे गठिया की बीमारी से ग्रस्त थे।

डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों में गठिया का रिस्क ज्यादा
बच्चों में गठिया की एक वजह बीमारी की पहचान में सबसे बड़ी कमी का होना था, जो कि रिसर्च में भी सामने आया। अध्ययकर्ताओं ने अपने शोध में बताया कि ज्यादातर बच्चों के हाथ और कलाई के छोटे जोड़ों में गठिया पाई गई। एक्स-रे की मदद से पता चला कि 14 प्रतिशत जेआईए (जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस) की तुलना में 42 प्रतिशत से ज्यादा डाउन सिंड्रोम वाले बच्चे गठिया से पीड़ित थे।

रिपोर्ट ये बताने के लिए काफी है कि डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों में गठिया का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। हालांकि, इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि वक्त के साथ बीमारी की सही से पहचान नहीं हो पाई। मगर इस शोध के बाद इस बीमारी से लड़ने और डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों में गठिया की जांच करना थोड़ा आसान जरूर हो जाएगा।

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