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आपने सोते समय कई बार मुंह से लार टपकने जैसा एहसास किया होगा। हो सकता है आपने न तो इसपर ज्यादा ध्यान दिया हो, न ही इसे गंभीरता से लिया हो। पर क्या यह सामान्य है? विशेषज्ञों का मानना है कि सोते वक्त मुंह से लार टपकना संभव है किसी बीमारी का संकेत हो। सोते वक्त मुंह से लार गिरने के पीछे का कारण मुंह की कमजोर या अविकसित मांसपेशियां अथवा मुंह में बहुत अधिक लार बनना हो सकता है।

लार बनाने वाली ग्रंथियों को लार ग्रंथियां कहा जाता है। इनमें से छह ग्रंथियां आपके मुंह के निचले हिस्से, गालों और सामने के दांतों के पास स्थित होती हैं। ये ग्रंथियां आमतौर पर एक दिन में 2-4 पिंट्स लार बनाती हैं। जब ये ग्रंथियां बहुत अधिक लार बनाने लगती हैं, तो आपको ड्रूलिंग यानी सोते वक्त मुंह से लार गिरने का अनुभव हो सकता है।

मुंह से लार गिरने की समस्या आम तौर पर जन्म के दो वर्षों में देखने को मिलती हैं। बच्चे जब तक 18 से 24 महीने के नहीं हो जाते हैं, तब तक कुछ भी निगलने या फिर मुंह की मांसपेशियों पर उनका पूर्ण नियंत्रण नहीं होता है। बच्चों में दांत निकलते वक्त भी सोते समय मुंह से लार निकलता देखा जा सकता है।

ये तो बात रही बच्चों की। पर अगर ज्यादा उम्र के लोगों को भी यही समस्या हो रही है तो यह 'सेरिब्रल पाल्सी' यानी मस्तिष्क पक्षाघात जैसी तंत्रिका संबंधी या फिर अन्य प्रकार की चिकित्सा स्थितियां हो सकती है।

  1. सोते समय मुंह से बहुत अधिक मात्रा में लार गिरने के लक्षण - Sote Samay Drooling ke symptoms
  2. सोते समय लार टपकने का कारण?- Sote samay Drooling ka karan
  3. ड्रूूलिंग के रोकथाम के लिए क्या करें?- Drooling ki roktham
  4. सोते समय लार गिरने के कारण - Drooling Causes in Hindi
  5. सोते समय लार गिरना के डॉक्टर

सोते समय मुंह से बहुत अधिक मात्रा में लार गिरने के लक्षण - Sote Samay Drooling ke symptoms

खाने को निगलने के लिए मुंह में लार का पर्याप्त मात्रा में बनना बहुत जरूरी है। लेकिन जब यही लार बहुत अधिक मात्रा में बनकर अनियंत्रित रूप से मुंह से बाहर निकलने लगे तो यह समस्याओं का संकेत भी हो सकता है। ड्रूलिंग की समस्या मुख्यरूप से सोते समय होती है। इसके लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं, जिसपर आपको ध्यान रखने की आवश्यकता होती है।

  • किसी भी उम्र में अनियंत्रित ड्रूलिंग जो भोजन निगलने की क्रिया को प्रभावित करता हो।
  • चार साल तक की आयु के बच्चों में ड्रूलिंग एक सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि, अगर बड़े बच्चों और युवाओं को यह दिक्कत आती है तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  • जीभ पर नियंत्रण न होना।
  • अत्यधिक मात्रा में लार का निकलना, जिससे कपड़े खराब होते हों।

अगर आपमें उपरोक्त में से एक या उससे अधिक लक्षण देखने को मिलते हैं, तो यह गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

सोते समय लार टपकने का कारण?- Sote samay Drooling ka karan

हमारा शरीर अमूमन एक दिन में लगभग 1 लीटर से अधिक लार बनाता है। लार ग्रंथियां लार बनाती हैं, जिसे हम निगल लेते हैं और यह रक्त वाहिकाओं की मदद से फिर से संचारित होने लगती है। कुछ लोगों को मुंह खोलकर सोने की आदत होती है, जिस वजह से लार मुंह से बाहर निकल जाती है। दरअसल, नींद के समय शरीर आराम की स्थिति में होता है और ऐसे में कुछ व्यक्ति मुंह खोलकर सोते हैं, जिससे लार मुंह से बाहर गिरने लगती है। कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आपके सोने के तरीके की वजह से भी मुंह से लार टपक सकती है। यदि आप एक ओर करवट लेकर सोते हैं तो लार अंदर जाने की बजाय बाहर की ओर निकलती है। आगे जानते हैं कि सोते वक्‍त लार टपकने के क्‍या कारण हो सकते हैं, साथ ही यह किन बीमारियों की ओर संकेत करता है।

उम्र

मुंह से लार गिरने की समस्या मुख्यरूप से नवजातों में देखने को मिलती है। तीन से छह माह की आयु के दौरान यह आपको ज्यादा देखने को मिल सकती है। बच्चों में चूंकि इस दौरान दांत निकलने शुरू होते हैं ऐसे में इसे सामान्य माना जा सकता है। हां, जिन युवाओं और अधिक उम्र वाले लोगों को अक्सर इस तरह की दिक्कतें आ रही हों उन्हें डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

खानपान

खाने में अम्लीय सामग्री का सेवन करने से ज्यादा मात्रा में लार का उत्पादन होता है। इससे सोते वक्त मुंह से लार गिरने की समस्या आ सकती है।

दवाओं के साइड इफेक्ट

कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण भी आपको ड्रूलिंग की दिक्कत आ सकती है। अल्जाइमर का इलाज करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एंटीसाइकोटिक दवाओं के कारण भी आपको अत्यधिक ड्रूलिंग की समस्या आ सकती है। कुछ एंटीबायोटिक दवाओं के कारण भी मुंह से बहुत अधिक लार आ सकता है।

कुछ भी निगलने में रही समस्या

निगलने में आ रही कठिनाई को 'डिस्फेगिया' के नाम से जाना जाता है। यदि आपको ड्रूलिंग की बहुत ज्यादा शिकायत रहती है तो संभव है यह किसी बीमारी का संकेत हो। पार्किंसंस, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और यहां तक कि कई प्रकार के कैंसर के चलते भी डिस्फेगिया हो सकता है। इस दौरान आपको थूक तक को निगलने में कठिनाई हो सकती है।

स्लीप एपनिया

रात को सोते समय लार टपकना स्लीप एपनिया (इसमें सोते समय सांस रुकने और बार-बार करवटें बदलने जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं) की ओर इशारा कर सकता है। स्लीप एपनिया में लार टपकना जोखिम भरा होता है। यदि इसका समय पर इलाज नहीं किया गया तो यह एक गंभीर समस्या का रूप ले सकती है। स्लीप एपनीया होने पर लार टपकने के अलावा जोर से खर्राटे आना, गहरी नींद से अचानक उठ जाना, दिनभर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी आना, नींद से उठने पर सुस्ती महसूस करना, नींद से उठने पर गले में खराश या गले का सूखना जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं।

टॉन्सिलाइटिस

अगर गले में खराश या टॉन्सिल होने की वजह से आपको निगलने में दिक्कत आ रही है तो यह गले में सूजन का संकेत हो सकता है। गले में सूजन वायरल या बैक्टीरियल कारणों से हो सकती है। यह समस्या होने पर गले में लाल और सफेद दाग (पैच) पड़ने लगते हैं। इसके साथ ही व्यक्ति को बुखार भी आ सकता है। टॉन्सिल होने की वजह से निगलने में दिक्कत आती है। जब लार को निगला नहीं जाता है तो नींद के दौरान वह मुंह से निकलने लगती है। हालांकि, सिर्फ मुंह से लार निकलने की वजह से आप यह नहीं कह सकते हैं कि आपको टॉन्सिलाइटिस है। इसके अन्य लक्षणों पर भी गौर करें। जरूरत पड़ने पर डॉक्‍टर से संपर्क करें।

श्वसन संक्रमण

सर्दी-जुकाम, एलर्जी या नाक से संबंधित अन्‍य समस्‍याओं की वजह से साइनस (नाक के आसपास हवा से भरी छोटी-छोटी संरचनाएं) में सूजन हो सकती है। साइनस में सूजन या संक्रमण होने पर इसमें ब्‍लॉकेज और स्राव हो सकता है। ये स्राव लार के रूप में भी मुंह से बाहर आ सकता है।

ड्रूूलिंग के रोकथाम के लिए क्या करें?- Drooling ki roktham

जीवन में कुछ बदलाव लाकर ड्रूलिंग की इस समस्या की रोकथाम की जा सकती है। अगर आपको सोते वक्त मुंह से लार गिरने की दिक्कत हो रही है तो आप निम्न उपायों को प्रयोग में लाकर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

सोने के तरीके में बदलाव

सोते वक्त ड्रूलिंग की दिक्कत ज्यादा आती है। इस समस्या से निजात पाने के लिए आपको पीठ के बल सोना शुरू करना चाहिए, इससे काफी हद तक इस दिक्कत से छुटकारा पाया जा सकता है। अगर आप रात में कई बार सोने के तरीके में बदलाव करते रहते हैं और पीठ के बल लगातार सोने में दिक्कत हो रही है तो आप सिर के नीचे तकिया लगाएं, जिससे आपका मुंह थोड़ा ऊंचा रहे।

घरेलू उपचार

ड्रूलिंग से परेशान लोगों को डॉक्टर अक्सर लार को पतला बनाने वाले तरीकों के बारे में सलाह देते हैं। कई सारे घरेलू उपाय हैं जो इस दिशा में आपके लिए मददगार हो सकते हैं। उदाहरण के लिए ढेर सारा पानी पिएं। यदि आपका शरीर अच्छी तरह से हाइड्रेटेड है, तो आपके मुंह को तरलीय बनाए रखने के लिए शरीर को अधिक मात्रा में लार का उत्पादन करने की आवश्यकता नहीं होगी।

एलर्जी और साइनस की दिक्कतों का उपचार

अगर अत्यधिक मात्रा में लार आने की समस्या के पीछे एलर्जी और साइनस जैसे कारण हैं तो इसका इलाज करें। वैसे तो यह अपने आप ठीक हो जाने वाली समस्याएं हैं, लेकिन अगर आपको फिर भी लगता है तो इसके लिए डॉक्टर की सलाह पर कुछ दवाइयां भी ले सकते हैं।

सोते समय लार गिरने के कारण - Drooling Causes in Hindi

चार वर्ष से कम उम्र के किसी बच्चे को सोते वक्त लार गिरने की समस्या है तो डॉक्टर आमतौर पर इसके लिए किसी इलाज का सुझाव नहीं देते हैं। इलाज की आवश्यकता उन्हीं अवस्था में होती है जब यह गंभीर रूप ले ले। लार टपकने के गंभीर रूप से मतलब अगर होंठों से होकर लगातार लार टपकती रहे या फिर लार टपकने की इस समस्या के चलते आपको सामाजिक झेप का एहसास होने लगे। बहुत अधिक मात्रा में ड्रूलिंग के चलते फेफड़ों में लार जमा होने लगता है, जिससे निमोनिया हो सकता है।

इस बीमारी के इलाज के बारे में बात करें तो हर व्यक्ति की समस्या के हिसाब से इसका इलाज भी अलग होता है। आमतौर पर डॉक्टर समस्या का मूल्यांकन करते हैं, जिससे वह कारणों को जान सकें और उसी आधार पर आपको इलाज उपलब्ध करा सकें। सामान्यत: दवा और कुछ ओरल थेरपी से इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है। हालांकि, अधिक गंभीर मामलों में डॉक्टर सर्जरी और रेडियोथेरेपी जैसे उपचार के विकल्पों का सुझाव दे सकते हैं।

थेरेपी

लार टपकने की समस्या को कई बार थेरपी के माध्यम से सही किया जा सकता है। स्पीच एंड ऑक्यूपेशनल थेरपिस्ट आपको तकनीक बता सकते हैं, जिससे होंठों को बंद करने और कुछ भी निगलने में आ रही असुविधा को सही किया जा सकता है। मांसपेशियों को व्यवस्थित करने और लार को नियंत्रित करने में चिकित्सक आपकी मदद कर सकते हैं। आपकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टर आपको किसी डाइटीशियन से संपर्क करने की भी सलाह दे सकते हैं, जिससे आप अपने आहार में अम्लीय खाद्य पदार्थों की मात्रा को सही कर सकें।

उपकरण के माध्यम से इलाज

कुछ विशेष उपकरणों के माध्यम से भी लार टपकने की दिक्कत को सही किया जा सकता है। आपकी स्थिति और रोग के कारणों को देखने के बाद डॉक्टर एक डेंटल डिवाइस मुंह में सेट कर सकते हैं। यह डिवाइस निगलने के दौरान होंठ बंद रखने में मदद करता है।

मुंह में डिवाइस को लगा देने के बाद यह होंठ बंद करने के साथ-साथ जीभ की स्थिति और निगलने की प्रक्रिया को भी सुधारने में मदद करता है। अगर आपको निगलने में कुछ समस्या आ रही है तो यह डिवाइस काफी कारगर साबित हो सकता है।

दवाएं

कुई दवाइयां मुंह में लार के उत्पादन को कम करने में मदद करती हैं। यह कई प्रकार की हो सकती हैं। कुछ दवाएं पैच के रूप में आती हैं, जिन्हें मुंह के अंदर लगाना होता है। यह पैच दिनभर एक नियत मात्रा में मुंह में धीरे-धीरे दवा पहुंचाता रहता है। प्रत्येक पैच की अवधि तकरीबन 72 घंटे की होती है। ऐसे ही कुछ दवाओं को इंजेक्शन और पिल के रूप में भी दिया जाता है। इन दवाओं से लार का बनना तो कम हो जाता है, लेकिन इसके परिणामस्वरूप कई बार लोगों को मुंह सूखने की शिकायत रहती है। कुछ दवाओं को ड्रॉप के रूप में दिया जाता है।

ध्यान रखें, कौन सी दवा किसे और किस रूप में देनी है इसका निर्धारण डॉक्टर आपकी स्थिति को देखते हुए करते हैं। इसलिए अपने मन से या फिर इंटरनेट से देखकर कोई भी दवा न लें, इसके दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।

बोटोक्स इंजेक्शन

बोटोक्स इंजेक्शन चेहरे की मांसपेशियों को मजबूत करने और कसने के लिए दिया जाता है। इससे ड्रूलिंग की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

सर्जिकल उपचार

ड्रूलिंग के उपचार के लिए जरूरत के अनुसार कई बार डॉक्टर सर्जरी की भी सलाह दे सकते हैं। सर्जरी के माध्यम से लार नलिकाओं में आ रही दिक्कतों को ठीक करके, उन्हें फिर से जोड़ा जाता है। कई बार लार ग्रंथियों को पूरी तरह से हटाना भी पड़ जाता है।

निष्कर्ष

यदि आपको सोते वक्त मुंह से लार गिरने की समस्या आ रही है तो इसमें शर्मिंदा होने जैसा कुछ नहीं है। इस समस्या से निजात पाने के लिए आप सरल कदम उठा सकते हैं। यदि आप इस बारे में चिंतित हैं तो इसके परीक्षण और उपचार के लिए डॉक्टर से संपर्क करें। अगर सोते वक्त अक्सर आपकी नींद टूट जाती है, कभी आराम महसूस नहीं करते हैं और लगातार सिरदर्द व नींद की अन्य समस्याएं हो रही हैं तो यह सारी दिक्कतें डॉक्टर को जरूर बताएं। लापरवाही करने पर यह छोटी-छोटी परेशानियां बड़ी बीमारी का रूप ले सकती हैं।

Dr Narasimha Turlapati

Dr Narasimha Turlapati

सामान्य चिकित्सा

Dr. Nilesh Katkamwar

Dr. Nilesh Katkamwar

सामान्य चिकित्सा

Dr. Rubia Ahsan

Dr. Rubia Ahsan

सामान्य चिकित्सा

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