ग्लाइकोजन स्टोरेज डिजीज टाइप 7 - Glycogen Storage Disease Type 7 in Hindi

Dr. Rajalakshmi VK (AIIMS)MBBS

May 06, 2021

May 06, 2021

ग्लाइकोजन स्टोरेज डिजीज टाइप 7
ग्लाइकोजन स्टोरेज डिजीज टाइप 7
कई बार आवाज़ आने में कुछ क्षण का विलम्ब हो सकता है!

ग्लाइकोजन स्टोरेज डिजीज टाइप 7 को जीएसडी7 नाम से भी जाना जाता है। यह भी बाकी जीएसडी की तरह एक आनुवंशिक डिसऑर्डर है। इस विकार में शरीर मांसपेशियों की कोशिकाओं में मौजूद ग्लाइकोजन नामक शुगर को सही से तोड़ नहीं पाता है, जिस कारण मांसपेशियों की कोशिकाओं के कार्य में बाधा आ सकती है।

जीएसडी7 चार प्रकार का होता है और इन सभी में लक्षण व संकेत अलग-अलग होते हैं। यहां तक कि लक्षण दिखने की शुरुआत भी अलग-अलग उम्र पर होती है।

जीएसडी7 का क्लासिकल रूप सबसे आम है। आमतौर पर इसके लक्षण बचपन में दिखाई देने लगते हैं। इसमें अक्सर मध्यम स्तर के व्यायाम के बाद मांसपेशियों में दर्दऐंठन की शिकायत होती है, जबकि उच्च तीव्रता के साथ व्यायाम करने से मतली और उल्टी हो सकती है। इसके अलावा व्यायाम के दौरान मांसपेशियों के ऊतक असामान्य रूप से टूट सकते हैं और मायोग्लोबिन नामक प्रोटीन जारी होता है। यह प्रोटीन किडनी द्वारा फिल्टर होता है और फिर पेशाब के माध्यम से बाहर निकल (myoglobinuria) जाता है। इस स्थिति का यदि इलाज नहीं किया गया, तो इससे किडनी को नुकसान हो सकता है और किडनी फेलियर का जोखिम भी बन सकता है।

चूंकि किडनी को नुकसान हो चुका होता है ऐसे में वह यूरिक एसिड को प्रभावी ढंग से निकालने में असमर्थ हो जाता है और जीएसडी7 के क्लासिकल रूप से ग्रस्त कुछ लोगों के खून में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने लगती है। प्रभावित व्यक्तियों के खून में बिलीरुबिन नामक अणु का स्तर बढ़ सकता है, जिससे त्वचा का पीलापन और आंखों का सफेद होना (पीलिया) जैसी शिकायतें हो सकती हैं। इसके अलावा जीएसडी7 के क्लासिकल रूप में अक्सर लोगों के खून में क्रिएटिन किनेज नामक एंजाइम का स्तर बढ़ जाता है। यह मांसपेशियों की बीमारी का एक सामान्य संकेत है।

(और पढ़ें - बिलीरुबिन टेस्ट क्या है)

जीएसडी7 के गंभीर मामलों में शिशुओं में जन्म के समय से मांसपेशियों से जुड़ी दिक्कतें (हाइपोटोनिया) होती हैं, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी (मायोपैथी) हो जाती है और यह स्थिति समय के साथ बिगड़ जाती है। प्रभावित शिशुओं में हृदय का कमजोर और बढ़ा हुआ (cardiomyopathy) होने जैसी समस्या भी होती है। इसके अलावा सामाान्य रूप से सांस लेने में कठिनाई भी होती है। जीएसडी के इस रूप से ग्रस्त लोग आमतौर पर जन्म के बाद एक साल के अंदर जिंदा नहीं बचते हैं।

जीएसडी का एक ऐसा भी रूप है जो कि देर से शुरू होता है, आमतौर पर इसकी एकमात्र पहचान मायोपैथी है। वयस्कता में मांसपेशियों की कमजोरी देखी जा सकती है। कमजोरी आमतौर पर शरीर के उस हिस्से को प्रभावित करती है जो शरीर के केंद्र के पास होती है।

जीएसडी के हेमोलिटिक रूप की पहचान ‘हेमोलिटिक एनीमिया‘ है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं की कमी (एनीमिया) की वजह से यह समय से पहले टूट जाती हैं, लेकिन इसमें हेमोलिटिक रूप से ग्रस्त लोग मांसपेशियों में दर्द या कमजोरी जैसे लक्षणों का अनुभव नहीं करते हैं।

(और पढ़ें - कमजोरी दूर करने के उपाय)

जीएसडी7 के लक्षण क्या हैं? - GSD type 7 symptoms in Hindi

जीएसडी के लक्षण एक व्यक्ति से दूसरे में भिन्न हो सकते हैं।

जीएसडी7 के 80 से 99 फीसद लोगों में निम्नलिखित लक्षण होते हैं :

  • एनीमिया
  • इंक्रीज्ड मसल ग्लाइकोजन कंटेंट
  • म्योटोनिया (यह एक मेडिकल टर्म है, जो न्यूरोमस्कुलर स्थिति को संदर्भित करता है)

जीएसडी7 के 30 से 79 फीसद लोगों में निम्नलिखित लक्षण होते हैं :

(और पढ़ें - मांसपेशियों की कमजोरी दूर करने के उपाय)

जीएसडी7 का कारण क्या है? - GSD type 7 causes in Hindi

जीएसडी7 का कारण जीन में गड़बड़ी है, यह पीएफकेएम नामक जीन में उत्परिवर्तन की वजह से होता है। यह जीन फॉस्फोफ्रक्टोकिनेज नामक एंजाइम का एक टुकड़ा (पीएफकेएम सबयूनिट) बनाने का निर्देश देता है, यह एंजाइम ग्लाइकोजन के टूटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फॉस्फोफ्रक्टोकिनेज एंजाइम चार सबयूनिट से बना होता है और यह विभिन्न प्रकार के ऊतकों में पाया जाता है। सबयूनिट्स के अलग-अलग तरह के संयोजन अलग-अलग ऊतकों में पाए जाते हैं।

पीएफकेएम जीन में गड़बड़ी होने से पीएफकेएम सबयूनिट्स कार्य करना बंद कर देता है या बहुत कम कार्य करता है। इस स्थिति में मांसपेशियों में फॉस्फोफ्रक्टोकिनेज एंजाइम नहीं बन पाता है और ग्लाइकोजन पूरी तरह से टूट नहीं पाता है। हालांकि, आंशिक रूप से ग्लाइकोजन टूट जाता है और मांसपेशियों की कोशिकाओं में बनने लगता है। इसके बाद में, मांसपेशियां जो कि ग्लाइकोजन को एनर्जी सोर्स के रूप में नहीं बदल पाती हैं, वे कमजोर और टूटने लगती हैं।

यह स्थिति ऑटोसोमल रिसेसिव तरीके से पारित होती है। ऑटोसोमल रिसेसिव का मतलब है कि आपको अपने माता-पिता दोनों से जीन की खराब प्रति मिली है।

(और पढ़ें - एनर्जी बढ़ाने के उपाय)

जीएसडी7 का निदान कैसे होता है? - GSD type 7 diagnosis in Hindi

वैसे तो प्रत्येक जेनेटिक और दुर्लभ मामलों का निदान करना कठिन होता है, लेकिन डॉक्टर ऐसे में निम्न टेस्ट कराने का सुझाव दे सकते हैं

  • मरीज की मेडिकल हिस्ट्री (चिकित्सक द्वारा पिछली बीमारियों व उनके इलाज से जुड़े प्रश्न पूछना)
  • शारीरिक लक्षण
  • शारीरिक परीक्षण (फिजिकल एग्जाम)
  • लेबोरेटरी टेस्ट

ग्लाइकोजन स्टोरेज डिजीज टाइप 7 के अन्य नाम - GSD type 7 synonyms in Hindi

ग्लाइकोजन स्टोरेज डिजीज टाइप 7 को निम्नलिखित नामों से भी जाना जाता है :

  • ग्लाइकोजिनोसिस7
  • जीएसडी VII
  • जीएसडी 7
  • मसल फॉस्फोफ्रक्टोकिनेज डिफिशिएंसी
  • पीएफकेएम डिफिशिएंसी
  • फॉस्फोफ्रक्टोकिनेज डिफिशिएंसी

जीएसडी7 का इलाज कैसे होता है? - GSD type 7 treatment in Hindi

जीएसडी7 के लिए कोई विशिष्ट उपचार नहीं है। हालांकि, प्रभावित लोगों को आमतौर पर उच्च तीव्रता वाले व्यायाम और ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन से बचने की सलाह दी जाती है। उच्च तीव्रता वाले व्यायाम में तेज दौड़ना, तेज साइकिलिंग करना, रस्सी कूदना आदि शामिल हैं।

(और पढ़ें - संतुलित आहार चार्ट)



ग्लाइकोजन स्टोरेज डिजीज टाइप 7 के डॉक्टर

Dr. Abhay Singh Dr. Abhay Singh गैस्ट्रोएंटरोलॉजी
1 वर्षों का अनुभव
Dr. Suraj Bhagat Dr. Suraj Bhagat गैस्ट्रोएंटरोलॉजी
23 वर्षों का अनुभव
Dr. Smruti Ranjan Mishra Dr. Smruti Ranjan Mishra गैस्ट्रोएंटरोलॉजी
23 वर्षों का अनुभव
Dr. Sankar Narayanan Dr. Sankar Narayanan गैस्ट्रोएंटरोलॉजी
10 वर्षों का अनुभव
डॉक्टर से सलाह लें
cross
डॉक्टर से अपना सवाल पूछें और 10 मिनट में जवाब पाएँ