ग्रे बेबी सिंड्रोम - Gray Baby Syndrome in Hindi

Dr. Pradeep JainMD,MBBS,MD - Pediatrics

June 06, 2022

June 06, 2022

ग्रे बेबी सिंड्रोम
ग्रे बेबी सिंड्रोम

हर मां की चाह होती है कि उसका बच्चा स्वस्थ हो. इसके लिए वह पूरी प्रेगनेंसी के दौरान पौष्टिक खाद्य पदार्थ लेती है. इसके साथ ही मां को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी दवा बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेनी चाहिए. इसके पीछे कारण यह है कि प्रेगनेंसी के समय बिना डॉक्टर की सलाह से कुछ दवाएं लेने से होने वाले शिशु को गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. ग्रे बेबी सिंड्रोम भी ऐसी ही स्थिति है.

आज इस लेख में आप जानेंगे कि ग्रे बेबी सिंड्रोम क्या है, इसके कारण, लक्षण व इलाज क्या हैं -

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क्या है ग्रे बेबी सिंड्रोम? - What is Gray Baby Syndrome in Hindi

ग्रे बेबी सिंड्रोम दुर्लभ व जानलेवा स्थिति है. यह नवजात व 2 वर्ष तक के बच्चे को हो सकती है. यह स्थिति एंटीबायोटिक क्लोरमफेनिकॉल की ओवरडोज से होने वाले साइड इफेक्ट के कारण हो सकती है. इस दवा का उपयोग विभिन्न प्रकार के संक्रमणों के इलाज में किया जाता है, जैसे कि बैक्टीरियल मैनिंजाइटिस.

कुछ बच्चों का शरीर इस दवा के प्रभाव को सहन नहीं कर पाता है, जिस वजह से यह दवा बच्चे के खून में जमा हो जाती है. ऐसे में ग्रे बेबी सिंड्रोम होने की अवस्था बनी रहती है. प्रसव के दौरान या गर्भावस्था के दौरान किसी भी समय गर्भवती महिला को एंटीबायोटिक देने से भी इस स्थिति का खतरा हो सकता है.

इस सिंड्रोम की वजह से बच्चे को हृदय से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा, बड़े बच्चों में इस दवा के निम्न प्रकार के दुष्प्रभाव नजर आ सकते हैं -

कुछ मामलों में इसके गंभीर दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, जो इस प्रकार हैं -

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ग्रे बेबी सिंड्रोम के लक्षण - Gray Baby Syndrome Symptoms in Hindi

जब किडनी और लिवर ठीक तरह से काम करते हैं, तो क्लोरमफेनिकॉल को पचाकर शरीर से बाहर निकाला जा सकता है. वहीं, छोटे शिशु में लिवर और किडनी के पूरी तरह से विकसित न होने की वजह से क्लोरमफेनिकॉल को शरीर पचा नहीं पाता है, जिस वजह से ये शरीर से निकाल नहीं पाता.

इसी वजह से प्रीमैच्योर शिशु सामान्य शिशुओं की तुलना में ग्रे बेबी सिंड्रोम के अधिक शिकार होते हैं. अगर बच्चे के खून में क्लोरमफेनिकॉल जम जाता है, तो 2-9 दिन के अंदर ग्रे बेबी सिंड्रोम के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं. ग्रे बेबी सिंड्रोम के लक्षण हर बच्‍चे में अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन इसके कुछ आम लक्षण नीचे दिए गए हैं -

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ग्रे बेबी सिंड्रोम के कारण - Gray Baby Syndrome Causes in Hindi

ग्रे बेबी सिंड्रोम का मुख्य कारण क्लोरमफेनिकॉल का इस्तेमाल है. एंटीबायोटिक क्लोरमफेनिकॉल का उपयोग कई बैक्‍टीरियल संक्रमण जैसे कि मेनिंजाइटिस और टाइफाइड आदि के इलाज के लिए किया होता है. अगर किसी नवजात शिशु के खून में क्लोरमफेनिकॉल का लेवल 50mcg/mL से अधिक हो जाए, तो ग्रे बेबी सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है.

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ग्रे बेबी सिंड्रोम का इलाज - Gray Baby Syndrome Treatment in Hindi

ग्रे बेबी सिंड्रोम बीमारी का पता चलने पर जल्‍द से जल्‍द इलाज करवाना चाहिए. बच्चे को क्लोरमफेनिकॉल दवा की खुराक देना तुरंत बंद कर देना चाहिए. अगर ब्रेस्टफीड करवाने वाली मां क्लोरमफेनिकॉल से बनी कोई दवा ले रही है, तो उसे ब्रेस्टफीडिंग बंद कर देनी चाहिए. ऑक्‍सीजन थेरेपी व एक्‍सचेंज ट्रांसफ्यूजन आदि मेडिकल तरीकों से ग्रे बेबी सिंड्रोम का इलाज किया जा सकता है. आइए, ग्रे बेबी सिंड्रोम के उपचार के बारे में विस्तार से जानते हैं -

एक्‍सचेंज ट्रांसफ्यूजन

इस इलाज के तरीके में बच्चे का ज्यादातर खून निकाल लिया जाता है और कैथेटर के इस्तेमाल से उसके ब्लड ग्रुप से मैच करता हुआ ताजा खून या प्लाज्मा उसके शरीर में डाला जाता है.

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हीमोडायलिसिस

इसमें बच्चे के खून से टॉक्सिन को निकाला जाता है और बच्चे के ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए पोटेशियम और सोडियम के लेवल के बीच संतुलन लाया जाता है.

इनके अलावा, ऑक्‍सीजन थेरेपी से भी शिशु को ठीक किया जाता है. इन इलाजों के अलावा, बच्चे को सांस लेने और शरीर में ऑक्सीजन सर्कुलेशन में सुधार करने के लिए ऑक्सीजन थेरेपी दी जा सकती है. हेमोपरफ्यूजन भी किया जा सकता है, ताकि बच्चे को रिकवर होने में मदद मिल सके. यह उपचार डायलिसिस के जैसा होता है और खून से टॉक्सिन को निकालने में मदद करता है.

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सारांश – Summary

बच्चे के शरीर में क्लोरमफेनिकॉल की मात्रा ज्यादा हो जाने पर ग्रे बेबी सिंड्रोम हो सकता है. इस सिंड्रोम के चलते बच्चों की स्किन भूरी या ग्रे रंग की होने लगती है. इसलिए, मां को डॉक्टर से सलाह करके और उनके अनुसार ही क्लोरमफेनिकॉल दवा लेनी चाहिए. क्लोरमफेनिकॉल की बताई गई डोज उसी मात्रा में लेने से ग्रे बेबी सिंड्रोम नहीं होता है. ग्रे बेबी सिंड्रोम न हो, इसलिए डॉक्टर खून में दवा की मात्रा को हमेशा चेक करते रहते हैं, ताकि क्लोरमफेनिकॉल की मात्रा सामान्य से ज्यादा न हो जाए. यदि नवजात में क्लोरमफेनिकॉल लेने के बाद ग्रे बेबी सिंड्रोम का कोई लक्षण दिखाई दे रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और जल्द इलाज करवाना चाहिए.

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