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हृदय रोग से निपटना उतना मुश्किल भी नहीं

भारत में हृदय रोग से जुड़े आंकड़ें ज़्यादा अच्छे नही हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित ‘कार्डियोवस्कुलर डिजीज इन इंडिया’ नामक अध्‍ययन में ये बताया गया है कि अंग्रेजों के मुकाबले भारतीयों को दिल की बीमारियां कम से कम 10 साल पहले ही प्रभावित कर देती हैं, वो भी उनके जीवन के सबसे कार्यशील वर्षों में। 

इस शोध में ये भी पाया गया कि पश्चिमी देशों में 70 वर्ष से अधिक उम्र के केवल 23 प्रतिशत लोगों की मौत दिल की बीमारियों के कारण होती है। हालांकि, भारत में ये आंकड़ा 52 प्रतिशत है।

हृदय और रक्त वाहिकाओं के विकारों के समूह को कार्डियोवस्‍कुलर रोगों में गिना जाता है। इसमें कोरोनरी हार्ट डिजीज/हार्ट अटैक, सेरेब्रोवस्कुलर डिजीज/स्ट्रोक, हार्ट फेलियर, हाई ब्लड प्रेशर, पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (धमनियों में प्लाक जमना), रुमेटिक हार्ट डिजीज (हार्ट वाल्व और मासंपेशियों की क्षति) और जन्मजात हृदय रोग (दिल की संरचना में खराबी) जैसे विकार शामिल हैं।

हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि दिल की बीमारियों को होने से काफी हद तक रोका जा सकता है और कई लोगों में इसे पूरी तरह से ठीक भी किया जा सकता है।

हृदय रोगों के प्रमुख कारणों में अस्वस्थ जीवनशैली और आहार, शारीरिक असक्रियता, धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन, मानसिक तनाव, मोटापा, हाई बीपी, डायबिटीज और खून में बैड कोलेस्ट्रॉल ज्‍यादा होना शामिल हैं। हृदय से संबंधित समस्याओं से बचने के लिए कार्डियोलॉजिस्ट निम्‍न महत्‍वपूर्ण बातों का ध्‍यान रखने की सलाह दे सकते हैं।

तम्बाकू का सेवन न करें

सिगरेट, गुटका, सिगार या किसी भी तरह के तम्बाकू का सेवन खतरनाक है। धूम्रपान करने से हृदय रोगों का खतरा 6 गुना बढ़ जाता है। तम्बाकू का सेवन बंद करते ही तुरंत हार्ट स्ट्रोक या हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है।

शारीरिक रूप से सक्रिय रहना 

रोजाना केवल आधा घंटा शारीरिक व्यायाम करने से स्वास्थ्य में काफी हद तक सुधार आ सकता है। जॉगिंग, तेज चलने, स्वीमिंग, डांस, स्ट्रेचिंग और मांसपेशियां मजबूत करने वाले व्यायाम करना बहुत फायदेमंद रहता है। ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं को पूरी तरह से ठीक करने में योग बहुत लाभदायक है। तनाव कम करने के लिए आसान, प्राणायाम और मेडिटेशन बहुत अच्छे विकल्प हैं।

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स्वस्थ आहार

स्वस्थ आहार की मदद से हार्ट अटैक व स्ट्रोक का खतरा कम होता है। संतुलित आहार में उचित मात्रा में फल और सब्जियों का होना जरूरी है। मछली, बादाम, लीन मीट, साबुत अनाज, दालों और अखरोट में ओमेगा-3 फैट पाया जाता है जो ब्लड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। अधिक मात्रा में नमक, चीनी, प्रोसेस्ड फूड (ट्रांस फैट), बेकरी प्रोडक्ट और हाई सैचुरेटेड फूड्स जैसे कि ऑर्गन मीट, मक्‍खन, फुल फैट मिल्‍क और चीज़ का सेवन नहीं करना चाहिए। शराब पीने से भी बचना चाहिए।

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हार्ट डिजीज रिवर्सल प्रोग्राम क्‍या हैं और ये कैसे काम करते हैं?

वर्तमान समय में, ज्यादा से ज्यादा अस्पताल हार्ट डिजीज रिवर्सल प्रोग्राम की शुरुआत और इसमें निवेश कर रहे हैं ताकि हृदय की बीमारियों का खतरा कम किया जा सके और हार्ट अटैक व स्ट्रोक से बचा जा सके। जिन लोगों को पहले से ही हृदय रोग है या जिनमें इसका आनुवांशिक खतरा है, उनमें हृदय की समस्‍याओं को नियंत्रित करने के लिए हार्ट क्लीनिक मौजूद हैं।

मेदांता के चेयरमैन और कार्डियोवस्कुलर सर्जन डॉ. नरेश त्रेहान का कहना है कि “एक राष्ट्र होने के नाते, हम हृदय रोग से ग्रस्त इतने सारे लोगों से जूझने के लिए तैयार नहीं हैं। अगर हम इस समस्या की जड़ को खत्‍म नहीं करेंगे तो इससे हमारे देश को बहुत आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। इसी वजह से हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोग हृदय रोग के आखिरी स्‍टेज पर ही अस्पताल में दिखाने ना आएं बल्कि उन्‍हें इस रोग की शुरुआत में ही इसका पता चल सके ताकि इसे समय रहते ही कंट्रोल किया जा सके।”

मेदांता के हार्ट इंस्टीट्यूट के क्लीनिकल एंड प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी डॉ. संजय मित्तल का कहना है कि “मेदांता में, मरीज़ में हृदय संबंधी समस्या होने की संभावना के आधार पर उसके लिए विशेष चिकित्स्कीय प्लान बनाया जाता है। यहां पर जोखिम कारकों का पता लगाने के लिए कई टेस्‍ट करवाए जाते हैं और फिर फोन, ई-मेल, वीडियो कॉल के ज़रिए उचित सलाह दी जाती है। मरीज़ों को क्लीनिक आकर डॉक्‍टरी सलाह लेने की सुविधा भी उपलब्‍ध है। वह कहते हैं कि “हृदय रोग से ग्रस्‍त मरीज़ का इलाज करने के लिए हमारे पास अनुभवी डॉक्‍टरों एवं विशेषज्ञों की टीम मौजूद है।”

आमतौर पर, हार्ट डिजीज रिवर्सल टीम में कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट, एंडोक्रिनोलोजिस्ट, साइकोलोजिस्ट, एक्सरसाइज थेरेपिस्ट, स्मोकिंग सेसेशन एक्सपर्ट, योग और मेडिटेशन एक्सपर्ट, ओबेसिटी मैनेजमेंट एक्सपर्ट और पुलमोनोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट एवं स्लीप मेडिसिन स्पेशलिस्ट जैसे विशेषज्ञ शामिल होते हैं, जो मरीज़ को पूरी तरह से ठीक करने के लिए एक साथ काम करते हैं।

डॉक्टरों का ऐसा मानना है कि हृदय रोग से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ने के साथ इसके बारे में जागरूकता भी बढ़नी चाहिए। उम्‍मीद है कि जागरूकता बढ़ने से मरीज़ों की संख्या में कम आएगी।

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