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अक्सर हृदय रोग होने से पहले किसी प्रकार की चेतावनी या संकेत नहीं देते हैं और यह भी जरूरी नहीं है कि हृदय रोग होने से पहले आपको दिल में घबराहट, सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें। इतना ही नहीं हृदय रोग के कुछ लक्षण छाती में विकसित ही नहीं होते हैं, ऐसी स्थिति में वास्तविक समस्या का पता लगाना और भी अधिक कठिन हो जाता है।

हृदय रोग से जुड़े लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:

छाती में दर्द - 

सीने में दर्द महसूस होना दिल संबंधी रोगों का सबसे विशिष्ट लक्षण होता है। यदि आपकी धमनी में कोई रुकावट हो गई है और आपको दिल का दौरा पड़ रहा है, तो इस दौरान आपको छाती में गंभीर दर्द या खिंचाव और दबाव महसूस होगा। हर व्यक्ति इस दर्द का वर्णन अलग तरीके से करता है जैसे कि छाती पर किसी भारी वस्तु का दबाव महसूस होना या छाती में जलन महसूस होना।

ये दर्द आपको कुछ मिनट तक रह सकता है और लेट जाने पर या कोई शारीरिक गतिविधि करते समय दोबारा उठ सकता है। अगर ये दर्द सिर्फ कुछ सेकंड तक रहता है और दबाव देने पर बढ़ जाता है, तो हो सकता है कि यह हृदय से संबंधित दर्द ना हो। लेकिन कई बार हृदय संबंधी समस्याओं में छाती में दर्द के लक्षण विकसित नहीं होते हैं, ऐसा खासतौर पर महिलाओं, बूढ़ों और डायबिटीज से ग्रस्त लोगों में देखा जाता है।

पेट संबंधी समस्याएं -

पेट संबंधी समस्याएं होना भी हृदय रोगों का एक लक्षण हो सकता है, लेकिन यह सीने में दर्द जितना आम नहीं होता है। दिल के रोगों में आमतौर पर विकसित होने वाले पेट संबंधित लक्षण जैसे पेट दर्द, उल्टी और एसिडिटी आदि। आमतौर पर ये लक्षण फ्लू या पेट में इन्फेक्शन से जुड़े होते हैं इसलिए लोग इन्हें नज़रदाज कर देते हैं और यह नहीं समझ पाते कि यह लक्षण हृदय रोग से भी जुड़े हो सकते हैं। 

अगर आपको पेट संबंधी समस्याएं हो रही हैं और आपको विश्वास है कि यह आपके द्वारा खाए गए भोजन के कारण नहीं है, तो आपको डॉक्टर से जांच करवा कर उसके कारण का पता लगा लेना चाहिए। यह याद रखना बहुत जरूरी होता है, कि महिलाओं में हृदय की स्थितियों से जुड़ी पेट संबंधी समस्याएं होने का खतरा, पुरुषों के मुकाबले अधिक होता है।

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बाज़ू, गर्दन, जबड़े या पीठ के ऊपरी हिस्से में अचानक दर्द उठना -

यह लक्षण अगर अचानक दिखें और इनके साथ बेचैनी, सांस फूलना, पसीना आना और घबराहट भी महसूस हो तो यह लक्षण अक्सर एनजाइना (सीने में दर्द) या हार्ट अटैक से जुड़े हो सकते हैं। अगर यह एनजाइना के लक्षण हो, तो यह कुछ देर शांत हो जाते हैं। अक्सर इन लक्षणों को सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस, दांत के दर्द या मांसपेशियों का दर्द  समझ कर छोड़ दिया जाता हैं। 

(और पढ़ें - मांसपेशियों में खिंचाव के लक्षण)

अस्थिर महसूस होना -

ऐसी बहुत सारी वजह हो सकती हैं, जिनके कारण आपको सिर घूमना या चक्कर आने जैसा महसूस हो सकता है। पर्याप्त भोजन या पानी ना मिल पाने के कारण भी कुछ क्षण के लिए शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है या फिर अचानक से कोई तीव्र गतिविधि होना भी चक्कर आने का कारण बन सकती है। लेकिन अगर अस्थिर महसूस होने के साथ-साथ आपको सीने में तकलीफ और सांस फूलने जैसे लक्षण भी महसूस हो रहे हैं तो यह हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में जितना जल्दी हो सके आपको डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए। 

श्वास नली और मुंह के आस-पास दर्द होना -

मुंह या गले में दर्द होना आमतौर पर किसी हृदय संबंधी रोग का संकेत नहीं देता। यह ज़्यादातर सर्दी-जुकाम या साइनस संबंधी समस्याओं के लक्षण होते हैं। हालांकि, यदि आपको सीने मे दर्द की पीड़ा गले या मुंह तक भी महसूस हो रही हैं, तो यह संभावित रूप से हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है। इस स्थिति को सुनिश्चित करने के लिए अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें या अस्पताल जाएं। 

कमज़ोरी महसूस होना -

अगर आपको टहलने या रोजाना के सामान्य काम करने थकान महसूस होने लगे, तो आपको जल्द से जल्द इस बारे में डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए। ऐसे बदलाव किसी बड़ी शारीरिक समस्या का संकेत दे सकते हैं। खासकर महिलाओं में लंबे समय तक थकान व कमजोरी महसूस होना हृदय संबंधी रोगों के लक्षण हो सकते हैं। 

पसीना आना -

अगर आपका शरीर अचानक ठंडा पड़ जाए और ज्यादा पसीना आने लगे, तो ये भी संभावित रूप से हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं। अगर इसके साथ आपको अन्य लक्षण भी महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। 

पैरों के निचले हिस्से में सूजन -

टांगों, टखनों और पैरों में सूजन आमतौर पर तब होती है, जब हृदय उन तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंचा पाता है। नसों में खून की मात्रा असामान्य होने के कारण आपको नसों की सूजन भी हो सकती है। इसके अतिरिक्त हृदय संबंधी समस्याएं किडनी को भी प्रभावित कर देती है, जिससे उसकी पानी व सोडियम निकालने की कार्य क्षमता बिगड़ जाती है और परिणामस्वरूप ब्लोटिंग (सूजन व फुलाव) हो जाती है। 

लगातार खांसी आना -

आमतौर पर लगातार खांसी आना हृदय संबंधी रोगों का संकेत नहीं देता है, लेकिन अगर आपको पहले से ही हृदय संबंधी कोई समस्या है, तो आपको सचेत हो जाना चाहिए। अगर लेटने या शारीरिक रूप से परिश्रम करने पर खांसी बढ़ जाती है और इसके साथ सांस लेने में दिक्कत भी हो रही है। इसका मतलब हो सकता है कि आपका हृदय ठीक से काम नहीं कर पा रहा है, जिससे आपके फेफड़ों में खून जमा हो रहा है। अगर आपको ऐसे कोई लक्षण दिखें, तो अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

दिल की धड़कन का अनियमित होना -

उत्साहित होने के दौरान दिल की धड़कनें बढ़ जाना एक सामान्य स्थिति है। 

जब आप उत्साहित होते हैं तो अक्सर आपके दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है। लेकिन अगर आपका हृदय लगातार कुछ सेकेंड के लिए धड़कना बंद कर देता है और यदि इसके साथ-साथ चक्कर आने जैसे लक्षण भी हो रहे हैं तो जल्द से जल्द डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए।

अगर आपको ऊपर दिए हुए लक्षणों में से कोई भी लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अपना चेकअप करवा लेना चाहिए। ऐसी स्थिति की तुरंत जांच करने और समय पर दवाएं दे देने से हृदय में रक्त संचरण (ब्लड सर्कुलेशन) को फिर से ठीक करके मरीज की जान बचाई जा सकती है। हृदय रोग के प्रभावों को नियंत्रित करने, रोकने और इलाज करने के तरीके के बारे में जानने के लिए मेदांता के हार्ट इंस्टीट्यूट से संपर्क करें।

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