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कूबड़ क्या है?

पीठ पर असामन्य रूप से बड़ा गोलाकार उभार, कूबड़ कहलाता है। यह किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन बुजुर्ग महिलाओं में यह समस्या आम है।

आयु से संबंधित कूबड़ आमतौर पर रीढ़ की हड्डियों में कमजोरी आने के कारण होता है जिससे वे दब या चटक जाती हैं। दूसरी तरह का कूबड़ शिशुओं या किशोरों में दिखता है जो रीढ़ की हड्डियों में विकृति या एक दुसरे में धंस जाने के कारण होता है । 

छोटे कूबड़ से कम परेशानी होती है। बड़े कूबड़ के दर्द हो सकता है और यह शरीर को विकृत कर देता है। कूबड़ का उपचार आपकी उम्र, इसकी वजह और असर पर निर्भर करता है।   

इसे अंग्रेजी में बोलचाल की भाषा में हंचबैक (hunchback) और चिकित्सकीय भाषा में कायफोसिस (kyphosis) कहते हैं।  

(और पढ़ें - पीठ दर्द के घरेलू उपाय क्या हैं)

  1. कूबड़ के लक्षण - Hunchback Symptoms in Hindi
  2. कूबड़ के कारण - Hunchback Causes in Hindi
  3. कूबड़ से बचाव - Prevention of Hunchback in Hindi
  4. कूबड़ का परीक्षण - Diagnosis of Hunchback in Hindi
  5. कूबड़ का इलाज - Kubad ka ilaj in Hindi
  6. कूबड़ की जटिलताएं - Hunchback Complications in Hindi
  7. कूबड़ के डॉक्टर

कूबड़ के लक्षण क्या हैं?

छोटे कूबड़ के कोई खास संकेत या लक्षण नहीं होते। लेकिन कुछ लोगों को पीठ में दर्द और अकड़न  होती है। साथ ही उनकी रीढ़ की हड्डी असामान्य रूप से टेढ़ी हो जाती है।

डॉक्टर को कब दिखाएँ?

अपनी या बच्चे की रीढ़ की हड्डी टेढ़ी होती दिखे तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

(और पढ़ें - पीठ दर्द के लिए योगासन)

कूबड़ क्यों निकलता है?

रीढ़ की हड्डी कशेरुकाओं से बनती है और ये एक खांचे में क्रमबद्ध सजी बेलनाकार वस्तुओं सी दिखती हैं। कूबड़ तब होता है जब कंधे के पीछे की कशेरुकाएं आगे से नुकीली हो जाती हैं।

(और पढ़ें- स्लिप डिस्क क्या होता है

कशेरुकाओं में विकृति के ये कारण हो सकते हैं:

  • फ्रैक्चर (Fracture) - 
    कशेरुका के टूटने या बुरी तरह दब जाने से रीढ़ की हड्डी झुक जाती है जिसे कम्प्रेशन फ्रैक्चर (Compression Fractures) कहते हैं। मामूली कम्प्रेशन फ्रैक्चर के कोई खास संकेत या लक्षण नहीं होते हैं। (और पढ़ें - रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर)
     
  • ऑस्टियोपोरोसिस​ (Osteoporosis) - 
    ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियाँ कमजोर और खोखली होती जाती हैं जिससे रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो सकती है। विशेष तौर पर तब जबकि कमजोर कशेरुकाओं में कम्प्रेशन फ्रैक्चर हो जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस सबसे अधिक बुजुर्ग महिलाओं और लम्बे समय तक कॉर्टिकॉस्टेरॉइड्स (corticosteroids) का सेवन करने वालों को होता है। (और पढ़ें - ऑस्टियोपोरोसिस के घरेलू उपाय)
     
  • डिस्क डिजनरेशन (Disk Degeneration) - 
    मुलायम और गोलाकार डिस्क रीढ़ की हड्डी की कशेरुकाओं के बीच ये गद्देदार वस्तु की तरह काम करती हैं। उम्र के साथ, ये डिस्क सूख और सिकुड़ जाती हैं जिससे कूबड़ और तकलीफदेह हो जाता है।  
     
  • श्यूर्मैन डिजीज (Scheuermann disease) - 
    इसे श्यूर्मैन कूबड़ भी कहते हैं। यह बीमारी किशोरावस्था से ठीक पहले शुरू होती है। लड़कियों की तुलना में यह लड़कों को अधिक होता है।
     
  • पैदाइशी दोष - 
    जन्म से पहले रीढ़ की हड्डियां ठीक से विकसित न हों तो इससे कूबड़ हो सकता है। (और पढ़ें- प्रेगनेंसी में देखभाल के तरीके)
     
  • सिंड्रोम - 
    बच्चों में एलर्स-डैनलस और मार्फन जैसे सिंड्रोम से भी कूबड़ हो सकता है।
     
  • कैंसर और कैंसर का उपचार - 
    रीढ़ की हड्डी का कैंसर से कशेरुकाएं कमजोर हो जाती हैं जिससे कम्प्रेशन फ्रैक्चर की आशंका बढ़ जाती हैं। कैंसर के उपचार जैसे कीमोथेरेपी और रेडिएशन, से भी कशेरुकाएं कमजोर होती हैं।  

(और पढ़ें- हड्डी टूटने का इलाज)

थोड़ी सजगता से कुछ किस्म के कूबड़ से बचा जा सकता है। उदाहरण के लिए पॉश्चरल कूबड़ (Postural kyphosis) पूरी तरह से मुद्रा पर निर्भर है। इसलिए, यदि बैठने,उठने, खड़े होने आदि की मुद्रा ठीक रखें तो इस प्रकार के कूबड़ से बचाव हो सकता है। सही मुद्रा की आदत डालने के लिए आपको अपने बैठने या खड़े होने के ढंग के प्रति सचेत होना होगा।

ऑस्टियोपोरोसिस और रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के कारण होने वाले कूबड़ को भी रोका जा सकता है। ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के लिए हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ रखने की आवश्यकता है। कैल्शियम और अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन कर अपनी हड्डियाँ मजबूत कर सकते हैं।  

(और पढ़ें - पोषक तत्वों के स्त्रोत क्या हैं)

श्यूर्मैन (Scheuermann's kyphosis) या पैदाइशी कूबड़ को नहीं रोक सकते हैं क्योंकि वे शारीरिक ढांचे में विकृति के कारण होता है। श्यूर्मैन के मामले में तो जितनी जल्दी पता चले उतना अच्छा है। यदि किसी बच्चे या किशोर की बैठने-उठने की मुद्रा ठीक न दिका तो तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाएँ। डॉक्टर यह तय करेंगे कि वह पॉश्च्यूरल कूबड़ है जिसे मुद्रा में सुधर कर ठीक किया जा सकता है या श्यूर्मैन कूबड़ है। 

यदि श्यूर्मैन कूबड़ का जल्दी पता लग जाए और डॉक्टर की सलाह पर अमल करें तो रीढ़ की हड्डी को कूबड़ के कारण होने वाले अत्यधिक नुकसान से बचा सकते हैं।   

(और पढ़ें - पीठ को सीधा रखने के उपाय)

कूबड़ का निदान कैसे होता है?

डॉक्टर अमूमन लम्बाई समेत शारीरिक परीक्षण करते हैं। आपको सामने झुकने के लिए कहा जा सकता है ताकि बगल से आपकी रीढ़ की स्थिति की देखी जा सके। डॉक्टर रिफ्लेक्स (अनैच्छिक क्रिया: किसी हिस्से पर हलकी चोट कर अन्य हिस्से में होनेवाली हरकत) और मांसपेशियों की मजबूती का पता लगाने के लिए स्नायविक परीक्षण भी कर सकते हैं।

संकेतों और लक्षणों की जांच करने के बाद, डॉक्टर आपको निम्न की सलाह दे सकते हैं - 

  • हड्डी में घनत्व (density; डेंसिटी) की जांच - 
    हड्डी में खनिज का घनत्व कम होने पर कूबड़ बढ़ सकता है। (और पढ़ें - बोन डेंसिटी स्कैन)
     
  • एक्स-रे या सीटी स्कैन - 
    एक्स रे से  कूबड़ की स्थिति और कशेरुकाओं के विकृतियों का पता चल सकता है। जरूरत पड़ने पर  सीटी स्कैन कराने की भी सलाह दी जा सकती है। 
     
  • एमआरआई - 
    एमआरआई से रीढ़ की हड्डी में संक्रमण या ट्यूमर का पता चल सकता है।
     
  • स्नायविक जांच (नर्व टेस्ट) - 
    यदि कहीं सुन्नता या मांसपेशी में कमजोरी महसूस हो रही हो तो डॉक्टर स्नायविक संवेग (Nerve Impulse) की जांच करने के लिए जांच की सलाह दे सकते हैं।

(और पढ़ें - रीढ़ की हड्डी में चोट)

कूबड़ का उपचार क्या है?

कूबड़ का उपचार इसके कारण और गंभीरता पर निर्भर करता है।

1. दवाएं:

आपके डॉक्टर कुछ दवाएं सुझा सकते हैं, जैसे:

  • दर्द निवारक दवाएं - कुछ सामान्य और विशिष्ट दर्द निवारक दवाएं दी जा सकती हैं।
  • ऑस्टियोपोरोसिस की दवा - हड्डी को मजबूत करने वाली कुछ दवाएं रीढ़ की हड्डी में अतिरिक्त फ्रैक्चर को रोकने में मदद कर सकती हैं। इन फ्रैक्चर से कूबड़ की परेशानी और बढ़ जाती है।

2. थेरेपी:

थेरेपी से कुछ प्रकार के कूबड़ को ठीक करने में मदद कर सकती है। आपके डॉक्टर आपसे निम्न करने को कह सकते है - 

  • व्यायाम - कुछ विशेष किस्म के व्यायाम (मसलन: स्ट्रेचिंग) से रीढ़ की हड्डी की अकड़न दूर हो सकती है और पीठ दर्द से छुटकारा मिल सकता है। (और पढ़ें - व्यायाम से जुड़ी कुछ जरूरी बातें)
  • ब्रेसिंग (Bracing) - श्यूर्मैन कूबड़ से ग्रस्त बच्चे को ब्रेस पहनाकर कूबड़ बढ़ने से रोका जा सकता है।  

3. ऑपरेशन:

कूबड़ बहुत बड़ा हो जिससे रीढ़ की हड्डी या नसों के मूल पर दवाब पड़ रहा हो तो इसके लिए ऑपरेशन की सलाह दी जा सकती है। रीढ़ की हड्डी का टेढ़ापन कम करने के लिए आम तौर पर स्पाइनल फ्यूज़न (Spinal fusion) की प्रक्रिया अपनाई जाती है। डॉक्टर कशेरुकों के बीच में हड्डी के टुकड़े को डालते हैं और फिर उन्हें धातु की छड़ और स्क्रू से कस देते हैं यह स्थिति तब तक रहती है जब तक रीढ़ की हड्डी सही स्थिति में न आ जाये।

4. सही जीवनशैली:

हड्डी में खनिज के उचित घनत्व बरकरार रखने के लिए डॉक्टर निम्न की सलाह दे सकते हैं - 

कूबड़ से क्या जटिलताएं पैदा हो सकती हैं?

कूबड़ के कारण पीठ दर्द के साथ-साथ निम्न परेशानियां हो सकती हैं - 

  • साँस की परेशानी -
    बड़ा कूबड़ फेफड़ों पर दबाव डाल सकता है। (और पढ़ें - सांस लेने में दिक्कत का इलाज)
     
  • शारारिक शक्ति क्षीण होना -
    कूबड़ से पीठ की मासपेशियाँ कमजोर हो जाती है जिसकी वजह से चलने और उठने-बैठने में दिक्कत होती है। रीढ़ की हड्डी टेढ़ी होने से ऊपर देखना या गाड़ी चलाना मुश्किल हो जाता है और लेटने पर दर्द होता है।(और पढ़ें - मांसपेशियों में दर्द का इलाज)
     
  • पाचन सम्बन्धी परेशानी -
    बड़ा कूबड़ पाचन तंत्र पर जोर डालता है जिससे भोजन निगलने में मुश्किल होती है और एसिड रिफ्लक्स होता है।
     
  • शरीर को लेकर हीन भावना होना -
    कूबड़ ग्रस्त लोगों विशेष तौर पर किशोरों में शारीरिक विकृति और ब्रेस पहनने के कारण हीन भावना आ जाती है। बुजुर्गों में यह भावना उन्हें आस-पास की दुनिया से अलग-थलग कर देती है।
Dr. Mohit Garg

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ओर्थोपेडिक्स

Dr. Aashish Shahare

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Dr. Saroj Kumar

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