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हाइपोपिट्यूटेरिज्म क्या है?

हाइपोपिट्यूटेरिज्म एक दुर्लभ विकार है, जिसमें पिट्यूटरी ग्लैंड एक या एक से अधिक या पर्याप्त मात्रा में हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाता है। यह स्थिति पिट्यूटरी ग्लैंड या हाइपोथैलेमस (मस्तिष्क का एक हिस्सा, जो हार्मोन रिलीज करने सहित कई महत्वपूर्ण कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है) में किसी बीमारी के कारण हो सकती है। जब पिट्यूटरी हार्मोन कम या न के बराबर बनाने लगता है, तो इस स्थिति को पैनहाइपोपिट्यूटेरिज्म कहा जाता है। यह विकार बच्चों या वयस्कों दोनों को प्रभावित कर सकता है।

हाइपोपिट्यूटेरिज्म के लक्षण

कुछ लोगों में हाइपोपिट्यूटेरिज्म के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं या हो सकता है कि उनमें धीरे-धीरे लक्षण सामने आएं। जबकि कुछ लोगों में, लक्षण अचानक से सामने आ सकते हैं। हालांकि, लक्षण हाइपोपिट्यूटेरिज्म के कारण पर निर्भर करते हैं जैसे कि:

हाइपोपिट्यूटेरिज्म के कारण

हाइपोपिट्यूटेरिज्म के कई कारण होते हैं। कई मामलों में हाइपोपिट्यूटेरिज्म, पिट्यूटरी ग्लैंड में हुए ट्यूमर के कारण होता है। पिट्यूटरी ट्यूमर का आकार बढ़ने पर यह हार्मोन के उत्पादन को प्रभावित करने के साथ पिट्यूटरी के ऊतक को नुकसान पहुंचा सकता है। 

पिट्यूटरी ग्लैंड को नुकसान पहुंचाने वाली कुछ बीमारियों या स्थितियों से भी हाइपोपिट्यूटेरिज्म ट्रिगर हो सकता है जैसे कि:

  • सिर की चोट
  • ब्रेन सर्जरी
  • सिर या गर्दन पर रेडिएशन थैरेपी
  • मस्तिष्क या पिट्यूटरी ग्लैंड (स्ट्रोक) में रक्तप्रवाह में कमी या फिर मस्तिष्क या पिट्यूटरी ग्लैंड से ब्लीडिंग होना
  • कुछ दवाएं जैसे नार्कोटिक्स, कॉर्टिकोस्टेरॉइड या कुछ प्रकार के कैंसर की दवाइयों का अधिक सेवन
  • असामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिक्रिया (हाइपोफाइटिस) के कारण पिट्यूटरी ग्लैंड में सूजन होना
  • मस्तिष्क संक्रमण जैसे कि मेनिनजाइटिस (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को कवर करने वाली सुरक्षात्मक झिल्लियों की सूजन)
  • कुछ मामलों में, हाइपोपिट्यूटेरिज्म आनुवांशिक यानी जेनेटिक गड़बड़ी के कारण होता है

हाइपोपिट्यूटेरिज्म की जांच

हाइपोपिट्यूटेरिज्म का इलाज

हाइपोपिट्यूटेरिज्म के उपचार में सबसे पहले हार्मोन के स्तर को सामान्य करने के लिए दवा दी जाती है। हाइपोपिट्यूटेरिज्म के लिए निम्न दवाएं दी जा सकती हैं:

  • लेवोथायरोक्सिन: लेवोथायरोक्सिन दवा थायराइड हार्मोन का लेवल कम (हाइपोथायरायडिज्म) होने का इलाज करती है, जो कि थायराइड-स्टिमुलेशन हार्मोन की कमी का कारण बन सकता है।
  • थायराइड हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी: इस थेरेपी का उपयोग हाइपोपिट्यूटेरिज्म (थायराइड का उत्पादन कम होने वाली स्थिति) के लिए किया जाता है। इसमें लेवोथायरोक्सिन (उदाहरण के लिए सिन्थ्रॉइड, लेवोक्सिल) का उपयोग किया जा सकता है।
  • एसीटीएच की कमी के कारण एड्रेनल हार्मोंस में आई कमी के इलाज के लिए ग्लूकोकॉर्टिकोस्टेरॉइड का इस्तेमाल किया जाता है।

हाइपोपिट्यूटेरिज्म के कारण होने वाले पिट्यूटरी ट्यूमर या अन्य बीमारियों की पहचान के लिए समय-समय पर सीटी स्कैन या एमआरआई स्कैन की आवश्यकता पड़ सकती है। यदि ट्यूमर है, तो उसके प्रकार और वह किस जगह पर है, इस आधार पर सर्जरी की जा सकती है।

  1. हाइपोपिट्यूटेरिज्म (पिट्यूटरी ग्लैंड का फेल होना) के डॉक्टर
Dr. Tanmay Bharani

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एंडोक्राइन ग्रंथियों और होर्मोनेस सम्बन्धी विज्ञान

Dr. Sunil Kumar Mishra

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Dr. Parjeet Kaur

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