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प्रतिरक्षा में अक्षम (इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड) होने का मतलब क्या है? - What does to be immunocompromised mean in Hindi

Dr. Anurag Shahi (AIIMS)MBBS,MD

September 26, 2020

April 13, 2021

प्रतिरक्षा में अक्षम होने का मतलब क्या है?
प्रतिरक्षा में अक्षम होने का मतलब क्या है?

इम्यूनोडेफिशिएंसी (इम्यून प्रतिक्रिया उत्पन्न करने में अक्षम), इम्यूनोसप्रेशन (शरीर के इम्यून सिस्टम में अवरोध उत्पन्न होना) और इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड (प्रतिरक्षा में अक्षम) इन शब्दों का इस्तेमाल बीते कुछ दिनों में पहले से कहीं अधिक किया जा रहा है, विशेष रूप से दुनिया भर में कोविड-19 संक्रमण के मामले लगातार बढ़ने के कारण। 

इम्यूनोडेफिशिएंसी, प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया हो सकती है या एक प्रतिरक्षा प्रणाली हो सकती है जिसमें कमी या कमजोरी आ गई हो। जैसा कि हमने पहले ही बताया इम्यूनोसप्रेशन एक अर्थ है प्रतिरक्षा प्रणाली का दमन या शरीर के इम्यून सिस्टम में अवरोध उत्पन्न होना। कई बार दवाइयों का इस्तेमाल कर जानबूझकर भी किसी व्यक्ति में इम्यूनोसप्रेशन किया जाता है। उदाहरण के लिए- यह तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति की अंग प्रत्यारोपण की सर्जरी होती है ताकि इम्यून सिस्टम प्रत्योरोपित किए गए इस अंग को शरीर के बाहर का हिस्सा या फॉरेन ऑब्जेक्ट समझकर उस पर हमला करना न शुरू कर दे। कैंसर थेरेपी या कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट के कारण भी इम्यूनोसप्रेशन की समस्या हो सकती है।

(और पढ़ें- इम्यूनिटी कमजोर होना कारण, लक्षण, इलाज)

साधारण शब्दों में समझने की कोशिश करें तो बीमारियों और संक्रमणों से लड़ने के लिए शरीर की कम क्षमता को ही इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड कहते हैं। ज्यादातर मामलों में, इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड होने की स्थिति किसी बीमारी या शरीर में पहले से मौजूद किसी स्थिति के कारण होती है जैसे- एचआईवी संक्रमण, विभिन्न प्रकार के कैंसर, डायबिटीज, मोटापा, हृदय रोग, ऑटोइम्यून बीमारियों और कुछ आनुवंशिक विकार। इसके अलावा बुजुर्ग और धूम्रपान करने वाले लोग भी आमतौर पर इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड होते हैं। किसी व्यक्ति में इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड होने की स्थिति स्थायी भी हो सकती है या फिर समय के साथ व्यक्ति की स्थिति में सुधार भी हो सकता है।

ऊपर बताए गए तीनों शब्दों में से प्रत्येक में बीमारियों से लड़ने की शरीर की क्षमता में कमी को व्यक्त करने का संकेत मिलता है।

(और पढ़ें- प्राइमरी इम्यूनोडेफिशिएंसी क्या है)

हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम विभिन्न कोशिकाओं से बना है जो विभिन्न प्रकार के रोगजनकों, जैसे बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने के लिए शरीर को तैयार करने में मदद करते हैं। लेकिन जब यह सिस्टम शरीर में ठीक से काम नहीं करता तो व्यक्ति के संक्रमित होने और बीमार पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। जो लोग इम्यूनोसप्रेस्ड या इम्यूनोडेफिशिएंट होते हैं, उन लोगों के संक्रमित होने और बीमार पड़ने की आशंका अधिक होती है। लेकिन इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड होना इन दोनों से थोड़ा अलग है, क्योंकि हमारे शरीर के सिस्टम में इस असंतुलन की डिग्री अलग-अलग होती है।

प्रतिरक्षा में अक्षम (इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड) के प्रकार - Types of What does it mean to be immunocompromised in Hindi

अलग-अलग व्यक्ति के इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड होने का अलग-अलग तरीका नहीं है लेकिन इस स्थिति की अवस्था या डिग्री जरूर अलग-अलग होती है- इसका असर इस बात पर पड़ता है कि कोई व्यक्ति संक्रमण के प्रति कितना संवेदनशील है और आखिरकार इसके कारण वह व्यक्ति कितना अधिक बीमार हो सकता है। किसी मरीज के मामले में, जो हल्के ढंग से इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड हो, उनके द्वारा संक्रमित होने और बीमार पड़ने का जोखिम अधिक हो सकता है, जैसे कि सर्दी-जुकाम या फ्लू होना। हालांकि, जो लोग इस स्थिति की विस्तृत श्रेणी में होते हैं वे अंततः ठीक हो जाते हैं।

लेकिन जब किसी ऐसे व्यक्ति की बात आती है जो गंभीर रूप से इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड हो तो ऐसे लोगों में बेहद हल्का या हानि न पहुंचाने वाला संक्रमण भी जानलेवा साबित हो सकता है, क्योंकि न केवल व्यक्ति के संक्रमित होने का जोखिम अधिक होता है, बल्कि उसमें गंभीर जटिलताएं विकसित होने का खतरा भी अधिक होता है। इसका एक उदाहरण है- एचआईवी के वे मरीज जिन्हें एआरटी थेरेपी न दी जा रही हो।

कई बार कोई व्यक्ति थोड़े समय के लिए भी इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड हो सकता है, खासकर तब जब किसी बीमारी के लिए उसका इलाज चल रहा हो। दूसरों को इस स्थिति का अधिक स्थायी अनुभव हो सकता है- जिन लोगों को कोई पुरानी बीमारी या आनुवांशिक विकार होता है उन्हें अक्सर यह समस्या होती है। उदाहरण के लिए, डायबिटीज के मरीजों में कोई संक्रमण होने पर गंभीर लक्षण विकसित होने की आशंका अधिक होती है और उन्हें बीमारी से उबरने में स्वस्थ लोगों की तुलना में अधिक समय भी लगता है।

हमारा इम्यून सिस्टम विभिन्न कोशिकाओं से मिलकर बना है जिसमें- टी सेल्स, बी सेल्स, मैक्रोफेजेस और कई और कोशिकाएं शामिल हैं जो शरीर को प्रभावित करने वाली विभिन्न स्थितियों के कारण प्रभावित या बाधित होती हैं।

प्रतिरक्षा में अक्षम (इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड) होने के लक्षण - What does it mean to be immunocompromised Symptoms in Hindi

अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार, डायबिटीज से पीड़ित मरीज जिन्हें कोविड-19 का संक्रमण हुआ उनमें से आधे से ज्यादा मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ी, जबकि आईसीयू में भर्ती करीब 78% मरीज ऐसे थे जिन्हें  पहसे से कम से कम एक बीमारी जरूर थी। हालांकि, कुछ मामलों में, अतिसक्रिय या ओवरऐक्टिव इम्यून सिस्टम के कारण भी कोविड-19 के मरीजों में गंभीर जटिलताएं देखने को मिलती हैं। कुछ सामान्य संकेत हैं जिसके जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि कोई व्यक्ति इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड है या नहीं:

(और पढ़ें- रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के आसान उपाय)

प्रतिरक्षा में अक्षम (इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड) होने का कारण - What does it mean to be immunocompromised Causes in Hindi

जो लोग पहले से ही इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड हैं उन्हें ऐहतियाती कदमों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी जाती है जैसे- शारीरिक दूरी का पालन करना, भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना और स्वस्थ भोजन करना- इसका एक सबसे बड़ा कारण ये है कि जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर है उन्हें कोविड-19 बीमारी की गंभीर जटिलताएं होने का खतरा अधिक है। ऐसे कई कारक हैं जो कमजोर इम्यून सिस्टम या इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड होने के लिए जिम्मेदार होते हैं, जैसे:

ऊपर बताई गई विभिन्न स्थितियों में से अगर कोई भी किसी व्यक्ति को हो या इन स्थितियों का कॉम्बिनेशन हो तो यह किसी व्यक्ति के इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड होने का प्रमुख कारण हो सकता है।

कैसे जानें कि कोई व्यक्ति इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड है? - Diagnosis of What does it mean to be immunocompromised in Hindi

फिर चाहे वह प्राथमिक इम्यूनोडिफ़िशिएंसी की समस्या हो जैसे टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित मरीज या फिर किसी बीमारी या इलाज के कारण मरीज का इम्यून सिस्टम कमजोर हो गया हो, अपने लक्षणों के मूल कारण का पता लगाने के लिए डॉक्टर के पास जाना जरूरी है। मरीज का शारीरिक परीक्षण करने से पहले डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री के बारे में कुछ सवाल पूछते हैं और उन लक्षणों के बारे में भी जिसका अनुभव मरीज कर रहा हो।

इम्यून संबंधी बीमारियों को डायग्नोज करने के लिए कुछ कॉमन टेस्ट्स किए जाते हैं जैसे- ब्लड टेस्ट जो खून में आईजीएल (इम्यूनोग्लोबुलिन) के लेवल की जांच करता है। आईजीएल वो प्रोटीन है जो संक्रमण और बीमारियों से लड़कर उन्हें दूर रखता है। अगर इस प्रोटीन की संख्या खून में असामान्य हो तो यह कमजोर इम्यून सिस्टम का एक संकेत हो सकता है। एंटीबॉडी टेस्ट जो कोविड-19 महामारी के दौरान काफी फेमस हो गया है, यह भी इस बात को जानने का एक अच्छा तरीका है कि व्यक्ति का शरीर संक्रमण पैदा करने वाले किसी रोगाणु के खिलाफ एंटीबॉडीज बना रहा है या नहीं।

प्रतिरक्षा में अक्षम (इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड) मरीजों का इलाज - What does it mean to be immunocompromised Treatment in Hindi

जो लोग इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड हैं, उन्हें न केवल संक्रमण के गंभीर लक्षण से पीड़ित होने का जोखिम अधिक होता है बल्कि कई बार तो टीकाकरण के प्रति भी उनका शरीर सही तरीके से प्रतिक्रिया नहीं दे पाता जिस कारण उन्हें भविष्य में होने वाली बीमारियों से बचाना भी मुश्किल हो जाता है। ज्यादातर मामलों में, वे लोग जो इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड हैं उनमें बीमारी को होने से रोकना या बीमारी को शुरुआत में ही रोक देना सबसे बेस्ट विकल्प है। इसके अलावा, यह सुनिश्चित करना कि शरीर और इम्यून सिस्टम को पर्याप्त पोषण मिल रहा है, भविष्य में होने वाले नुकसान को रोकने की दिशा में एक और प्रभावी रणनीति है।

जो लोग इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड होते हैं उनमें एंटीबायोटिक्स या एंटीवायरल दवाइयों का उचित इस्तेमाल कर किसी भी संक्रमण का इलाज तुरंत किया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसे लोगों के इलाज में ज्यादा वक्त लगता है, किसी ऐसे व्यक्ति की तुलना में जिसका इम्यून सिस्टम अपेक्षाकृत मजबूत हो। जिन लोगों में प्राथमिक इम्यूनोडेफिशिएंसी की समस्या होती है उन्हें एंटीबायोटिक का सेवन लंबे समय तक करना पड़ता है। वैसे मरीज जिनमें बार-बार दर्द, बुखार, खांसी और सर्दी के लक्षण दिखते हैं, उनमें लक्षणों से राहत पाने के लिए ओटीसी दवाइयों का इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि लक्षणों को बदतर होने से रोका जा सके।  

इम्यून सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए और अधिक जटिल इलाज के तहत मरीज के शरीर में एंटीबॉडी को इंजेक्ट करना, या फिर ग्रोथ फैक्टर थेरेपी का भी इस्तेमाल किया जाता है। यह एक ऐसी उपचार व्यवस्था है जिसमें विशिष्ट सफेद रक्त कोशिकाओं के स्तर को बढ़ाने में मदद मिलती है जो शरीर में इम्यूनिटी के निर्माण के लिए आवश्यक हैं। स्वस्थ आहार का सेवन करना और नियमित रूप से व्यायाम करना यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि शरीर न केवल बाहर से मजबूत बने बल्कि अंदर से इम्यून सिस्टम भी मजबूत हो जो भविष्य में किसी भी तरह के संक्रमण और बीमारियों से लड़ने में सक्षम हो।

प्रतिरक्षा में अक्षम (इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड) से जुड़ी जटिलताएं - What does it mean to be immunocompromised Risks & Complications in Hindi

जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है या फिर जो लोग इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड होते हैं उनमें किसी बीमारी के अधिक गंभीर लक्षण विकसित होने का खतरा अधिक होता है, अगर वे किसी इंफेक्शन से संक्रमित हो जाएं। कोविड-19 के मामले में, विभिन्न अध्ययनों ने संकेत दिया है कि जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी है उन्हें कोविड-19 बीमारी की गंभीर जटिलताओं से पीड़ित होने का जोखिम अधिक होता है।



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