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इन्ग्रोन टो-नेल्स उस समय होते हैं, जब पैर के अंगूठे के किनारे आसपास के टिशूज (ऊतक) कट जाते हैं। जिसका नतीजा यह होता है कि अंगूठे के नाखून के किनारे कटने और घाव होने लगते हैं। यह उस स्थिति में भी हो जाता है, जब अंगूठे के ऊपर स्किन जमने लगती है। कई बार अंगूठे के टूटने या फटने के कारण भी ऐसी समस्याएं आ सकती हैं। अंगूठे के टूटने या फटने से बैक्टेरिया फैलते हैं, जो फंगल संक्रमण का कारण बन सकते हैं। इससे अंगूठे में सूजन आ जाती है। इस सूजन के कारण केवल दर्द ही नहीं होता बल्कि अगर समय से इलाज नहीं करवाया जाता है तो आगे चलकर समस्याएं भी हो सकती हैं।

(और पढ़ें - फंगल इन्फेक्शन में क्या खाएं)

  1. इन्ग्रोन टो-नेल्स का उपाय है टी ट्री ऑयल - Ingrown Toenail ka desi nuskha hai Tea Tree Essential Oil in Hindi
  2. इन्ग्रोन टो-नेल्स से छुटकारा दिलाता है पुदीने का तेल - Ingrown Toenail se chutkara pane ka tarika hai pudine ka tel in Hindi
  3. इन्ग्रोन टो-नेल्स से बचने का उपाय है बेकिंग सोडा - Ingrown Toenail se bachne ka gharelu upay hai baking soda in Hindi
  4. इन्ग्रोन टो-नेल्स का घरेलू उपाय है सेंधा नमक - Ingrown Toenail ka gharelu nuskha hai sendha namak in Hindi
  5. इन्ग्रोन टो-नेल्स से छुटकारा पाने का तरीका है शुद्ध नारियल का तेल - Ingrown Toenail dur karne ka upay hai shuddh nariyal ka tel in Hindi
  6. इन्ग्रोन टो-नेल्स में फायदेमंद है सेब का सिरका - Ingrown Toenail me fayademand hai seb ka sirka in Hindi
  7. इन्ग्रोन टो-नेल्स का इलाज है लहसुन - Ingrown Toenail ka ilaj hai lahasun in Hindi
  8. इन्ग्रोन टो-नेल्स का इलाज है हल्दी - Ingrown Toenail ka ilaj hai haldi in Hindi
  9. इन्ग्रोन टो-नेल्स का इलाज है नींबू - Ingrown Toenail ka ilaj hai nimbu in Hindi
  10. इन्ग्रोन टो-नेल्स का इलाज है प्याज - Ingrown Toenail ka ilaj hai pyaj in Hindi

टी ट्री ऑयल 
पैर के नाखून के अंदर की ओर बढ़ने पर टी ट्री ऑयल काफी फायदेमंद होता है।

कैसे करें इस्तेमाल: 

  • टी ट्री ऑयल के 2-3 बूंद तेल और नारियल या जैतून का तेल लें। 
  • टी ट्री ऑयल के कुछ बूंद को उंगलियों पर लें और उसे अंदर की ओर बढ़े नाखून पर लगाएं। 

ऐसा क्यों करें:
दरअसल टी ऑयल एक बेहतरीन एंटीसेप्टिक है और इसके इस्तेमाल से अंदर की ओर बढ़े हुए नाखूनों के संक्रमण को रोका जा सकता है। इसमें एंटीबैक्टेरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं। इसके इस्तेमाल से नाखून के संक्रमण और बैक्टेरियल व फंगल ग्रोथ को रोका जा सकता है। इसका प्रयोग दिन में दो बार किया जाना चाहिए। 

(और पढ़ें - नाखूनों में कवक इलाज)

पुदीने का तेल:
इसके लिए सबसे पहले तो अपने पैर के अंगूठे और उसके आसपास की स्किन को अच्छे से धो लें। इसके बाद पैर के अंगूठे को कुछ देर तक के लिए पानी में डुबो दें। अब पैर व अंगूठे को अच्छे से पोछकर सूखा कर लें। इसके बाद पैर के अंगूठे में भीतर की ओर बढ़े हुए नाखून वाले अंगूठे और उसके आसपास की स्किन पर पुदीने के तेल के कुछ बूंद डालें।

ऐसा क्यों करें:
दरअसल पुदीने के तेल में मेथॉल पाया जाता है। यह दर्द को कम करता है और इसमें एंटीमाइक्रोबायल गुण पाया जाता है जो अंगूठे को आगे संक्रमण होने से रोकता है।

(और पढ़ें - पुदीने के फायदे और नुकसान)

बेकिंग सोडा

  • आधा चम्मच बेकिंग सोडा लें।
  • उसमें कुछ बूंद पानी डालें।
  • पट्टी या सैनेटरी रेशमी महीन कपड़ा रखें।


कैसे इस्तेमाल करें: 

  • इस बेकिंग सोड़ा को पानी के साथ मिलाकर पेस्ट बनाएं। यह पेस्ट बहुत पतला न हो। 
  • इस पेस्ट को उस अंगूठे और उसके आसपास की स्किन पर लगाएं। 
  • इसके बाद उस जगह को सैनेटरी बैंडेज या पट्टी से ढंक दें। 

ऐसा कब-कब करें: 

  • आप ऐसा प्रतिदिन 2 बार करें। 


ऐसा क्यों करें:
दरअसल बेकिंग सोड़ा प्राकृतिक रूप से एंटीसैप्टिक होता है। इसके इस्तेमाल से अंगूठे में संक्रमण नहीं फैलता है। इसमें एंटीबैक्टेरियल और एंटीफंगल गुण भी होते हैं। ये बैक्टेरिया और फंगी को पनपने से रोकते हैं। 

(और पढ़ें - अंगूठे में मोच के इलाज)

सेंधा नमक:
सेंधा नमक का रासायनिक नाम मैग्नीशियम सल्फेट है। घरों में हम इसे सेंधा नमक के नाम से जानते हैं।

इस्तेमाल की विधि:

  • 1-2 चम्मच सेंधा नमक और गर्म पानी लें।
  • एक बड़ी बाल्टी भरकर पानी लें।
  • इसमें 1 या 2 चम्मच सेंधा नमक मिला लें।
  • इसके बाद इसमें अपना पैर 15-20 मिनट के लिए डुबो दें।

ऐसा कब-कब करें:
इस प्रक्रिया को दिन में दो से तीन बार करें।

ऐसा क्यों करें:
दरअसल सेंधा नमक में मैग्नीशियम की पर्याप्त मात्रा होती है। यह प्रभावित एरिया में सूजन कम करने में मदद करता है और दर्द से राहत देता है। 

(और पढ़ें - घुटनों में दर्द के इलाज)

शुद्ध नारियल का तेल

आपको क्या करना है:

  • सबसे पहले तो आपके पास शुद्ध कोकोनट ऑयल होना चाहिए।
  • इस तेल को आप अपने अंदर की ओर बढ़े हुए नाखून और उसके आसपास की स्किन पर लगाएं। 

इसे कब-कब लगाएं:
नारियल के इस तेल को हर रोज दो बार लगाएं। 

ऐसा क्यों करें: 
नारियल तेल में लॉरिक और कैप्रिलिक एसिड की उपस्थिति के कारण यह कई तरह की दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है। इन फैटी एसिड्स में एंटीफंगल के साथ-साथ कई गुण होते हैं। जिसके कारण इसका कई तरह से दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। 

(और पढ़ें - नारियल के फायदे और नुकसान)

सेब का सिरका

क्या-क्या लें:
रूई का एक गोला और सेब का सिरका

क्या करें:

  • रुई को सेब के सिरके में डुबो लें।
  • संक्रमित जगह पर सिरके में डूबी उस रूई को लगाएं।

कब-कब लगाएं:
इस प्रक्रिया को रोज दो बार करें।

इसका सेवन क्यों करें:
भीतर की ओर बढ़े हुए नाखूनों के लिए सेब का सिरका सबसे बेहतर घरेलू दवाओं में से एक हो सकता है। इसमें एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाया जाता है। इसके अलावा यह दर्द को कम करने का काम भी करता है। भीतर की ओर बढ़े हुए नाखूनों को यह बैक्टीरियल और फंगल संक्रमण से सुरक्षाित करता है। 

लहसुन

क्या-क्या लें:

  • लहसुन की 2-3 कली लेकर उन्हें अच्छे से पीस लें। 
  • पट्टी या सैनिटरी पट्टी पास रखें। 

क्या करें: 

  • लहसुन को अच्छे से पीस लें। 
  • पीसे हुए लहलुन को संक्रमित एरिया पर लगाएं। 
  • इसके बाद उस एरिया को पट्टी या सैनिटरी पट्टी से ढक दें और रात भर के लिए छोड़ दें।
  • इस प्रक्रिया को शाम को करें ताकि यह रातभर दवा का काम करती रहे। 

कब-कब करें:
इस प्रक्रिया को प्रतिदिन सोने से पहले करें। 

यह कैसे काम करता है: 
लहसुन में एलैसिन नाम का कंपोनेंट पाया जाता है। इसमें एंटीमाइक्रोबियल गुण पाये जाते हैं जिसके कारण यह भीतर की ओर बढ़े हुए नाखून को आगे संक्रमित होने से रोकता है। लहसुन में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाया जाता है, जिसके कारण यह घाव को जल्दी ठीक करने में मदद करता है। 

(और पढ़ें - खाली पेट लहसुन खाने का तरीका)

हल्दी

क्या-क्या लें:
एक चम्मच हल्दी और पानी।

कैसे इस्तेमाल करें:

  • एक चम्मच हल्दी लें।
  • उसमें थोड़ा सा पानी मिलाकर उसे पेस्ट बना लें।
  • अब इस पेस्ट को उस प्रभावित अंगूठे पर लगा लें।

कब-कब लगाएं:
प्रतिदिन दो से तीन बार लगाएं।

यह कैसे काम करता है:
हल्दी में एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीमाइक्रोबियल गुण पाया जाता है। इसके सेवन से नाखून का भीतर की ओर बढ़ना रुकता है और दर्द से राहत मिलती है। 

नींबू 

क्या लें:

  • एक चम्मच ताजा नींबू का जूस लें।
  • एक पट्टी या सैनेटरी रेशमी महीन कपड़ा लें। 

क्या करें: 

  • नींबू के ताजे जूस को नाखून में लगाएं। 
  • इसके बाद उस हिस्से को सैनिटरी पट्टी से ढंक दें और रातभर उसी तरह से छोड़ दें। 

कब-कब ऐसा करें: 
ऐसा प्रतिदिन रात को सोने से पहले एक बार करें। 

यह कैसे काम करता है: 
नींबू एसिडिक होता है। एसिडिक होने के वजह से यह भीतर की ओर बढ़ते हुए नाखून में बैक्टेरिया की ग्रोथ को रोकने में फायदेमंद होता है। नींबू में एंटीफंगल गुण भी पाए जाते हैं जो फंगल संक्रमण से बचाते हैं। 

(और पढ़ें - नींबू के रस के फायदे)

प्याज:

क्या-क्या रखें साथ:

  • प्याज के टुकड़े।
  • पट्टी या सैनेटरी पट्टी

    क्या करें:
  • प्याज का छोटा सा टुकड़ा लें।
  • जिस जगह पर नाखून भीतर की ओर बढ़ा है, वहां प्याज के छोटे से टुकड़े को रखें।
  • इसके बाद उसे पट्टी या सैनेटरी पट्टी से ढक दें। इसे रात भर पड़ा रहने दें।

ऐसा कब-कब करें:
इस प्रक्रिया को प्रतिदिन रात को सोने से पहले करें।

यह कैसे काम करता है:
भीतर की ओर बढ़े नाखून को ठीक करने के लिए प्याज एक बेहतरीन उपाय है। यह बेहतरीन तरीके से काम करता है। इसमें एलाइसपिन जैसे कंपाउंड पाए जाते हैं जो एंटीफंगल होते हैं। इसके इस्तेमाल से उस संक्रमित जगह पर फंगल नहीं बढ़ने पाता है। प्याज में एंटीबैक्टेरियल और एंटी-इन्फ्लैमेटरी गुण पाए जाते हैं, जिसके कारण यह संक्रमण को आगे रोकने में मदद करता है। इसके इस्तेमाल से दर्द और संक्रमण से राहत मिलती है।

(और पढ़ें - फंगल इन्फेक्शन की दवा)

संदर्भ

  1. National Health Service [Internet]. UK; Ingrown toenail.
  2. Claire Georgiou. apple cider vinegar antifungal antibacterial anti-inflammatory. The Apple Cider Vinegar Cleanse [Internet]
  3. Foot Health Facts: American College of Foot and Ankle Surgeon [Internet]. Chicago; Ingrown Toenail.
  4. Am Fam Physician. 2009 Feb 15;79(4):303-308. Management of the Ingrown Toenail. American Academy of Family Physicians [Internet]
  5. Eckart Haneke. Controversies in the Treatment of Ingrown Nails. Volume 2012, Article ID 783924, 12 pages; Dermatology Research and Practice
  6. Carson CF, Hammer KA, Riley TV. Melaleuca alternifolia (Tea Tree) oil: a review of antimicrobial and other medicinal properties. Clin Microbiol Rev. 2006 Jan;19(1):50-62. PMID: 16418522
  7. Pattnaik S, Subramanyam VR, Kole C. Antibacterial and antifungal activity of ten essential oils in vitro.. Microbios. 1996;86(349):237-46. PMID: 8893526
  8. healthdirect Australia. Ingrown toenails. Australian government: Department of Health
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