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गर्भाशय के अंदर का हिस्सा किसी गुब्बारे जैसा होता है, जिसके सामने और पीछे की दीवारें एक-दूसरे के सम्मुख बिलकुल सपाट होती हैं। गर्भाशय के पॉकेट में ऊत्तकों की एक परत होती है जिसे इंडोमेट्रियम कहा जाता है। मासिक धर्म के दौरान इंडोमेट्रियम की जो ऊपरी या सतही (शीर्ष) परत होती है वह बिखरने लगती है और शरीर के बाहर निकल जाती है। लेकिन जब एक महिला गर्भवती हो जाती है तो भ्रूण इसी, इंडोमेट्रियम में इम्प्लांट होता है। इंडोमेट्रियम में लगने वाली किसी तरह की चोट या संक्रमण की वजह से गर्भाशय की आंतरिक दीवारें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और गर्भाशय की अंदरूनी दीवारों के बीच में आसंजन (स्कार टीशू) बनने लगते हैं। ऐसा होने पर गर्भाशय की दीवारें असामान्य रूप से एक-दूसरे से चिपकने लगती हैं। इस समस्या को अंतर्गर्भाशय आसंजन या ऐशरमैन सिंड्रोम भी कहा जाता है।

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  1. अंतर्गर्भाशय आसंजन क्या है - What is Intrauterine adhesion in Hindi
  2. अंतर्गर्भाशय आसंजन के लक्षण - Intrauterine adhesion Symptoms in Hindi
  3. अंतर्गर्भाशय आसंजन के कारण - Intrauterine adhesion Causes in Hindi
  4. अंतर्गर्भाशय आसंजन का निदान - Diagnosis of Intrauterine adhesion in Hindi
  5. अंतर्गर्भाशय आसंजन का उपचार - Intrauterine adhesion Treatment in Hindi
  6. अंतर्गर्भाशय आसंजन के डॉक्टर

अंतर्गर्भाशय आसंजन क्या है - What is Intrauterine adhesion in Hindi

अंतर्गर्भाशयी आसंजन या ऐशरमैन सिंड्रोम, एक दुर्लभ और अधिग्रहित (यह समस्या जन्मजात नहीं है) स्थिति है। इसमें क्षतिग्रस्त ऊत्तकों (स्कार टीशूज) या आसंजन का निर्माण होता है गर्भाशय की भीतरी दीवारों के बीच, जिस कारण गर्भाशय की दीवारें एक साथ बंध जाती हैं या चिपक जाती हैं और गर्भाशय का साइज घट जाता है। कई बार ये स्कार टीशूज सर्विक्स (गर्भाशय की ओपनिंग) में भी बन सकते हैं। इस समस्या को इंट्रायूट्राइन अधेशन या आईयूए भी कहा जाता है।

इसमें गंभीर मामलों में, गर्भाशय की सामने और पीछे की सारी दीवारें एक साथ मिल जाती हैं। तो वहीं, कम गंभीर और हल्के मामलों में, आसंजन गर्भाशय के छोटे हिस्से में दिखाई दे सकता है। ये आसंजन मोटे या पतले हो सकते हैं, गर्भाशय में इधर-उधर छितरे हुए हो सकते हैं या फिर एक साथ एक ही जगह पर मिले हुए भी हो सकते हैं।

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अंतर्गर्भाशयी आसंजन अक्सर तब होता है जब गर्भाशय गुहा में किसी तरह की चोट या आघात होता है, जैसे- डाइलेशन एंड क्यूरेटेज (डीएंडसी) जिसे आम बोलचाल की भाषा में गर्भाशय की सफाई कहा जाता है के कारण, डिलिवरी के बाद ज्यादा रक्तस्राव के कारण या अन्य स्त्रीरोग संबंधी स्थितियों के कारण। इसके अलावा अन्य आउट पेशेंट सर्जरी जैसे- पॉलिप्स या फाइब्रॉएड्स या एंडोमेट्रिटिस जैसे ऊत्तकों को हटाने के दौरान गर्भाशय में लगने वाली चोट के कारण भी आसंजन या स्कार टीशूज बन सकते हैं।

ऐशरमैन सिंड्रोम को एक दुर्लभ बीमारी माना जाता है और यह कहना मुश्किल है कि यह वास्तव में कितनी बार होता है क्योंकि यह हमेशा ही डायग्नोज नहीं हो पाता। इस बारे में हुई कुछ रिसर्च का अनुमान है कि प्रेगनेंसी से जुड़ी किसी जटिलता के कारण डी एंड सी (गर्भाशय की सफाई) की प्रक्रिया से गुजरने वाली करीब 20 प्रतिशत महिलाओं में अंतर्गर्भाशय आसंजन (आईयूए) की समस्या देखने को मिलती है। 

गर्भाशय आसंजन का महिला की सेहत पर क्या प्रभाव होता है, इसकी बात करें तो आईयूए की समस्या से पीड़ित महिला के लिए गर्भवती होना मुश्किल हो जाता है या फिर बार-बार मिसकैरेज हो जाता है। कुछ दुर्लभ मामलों में, मासिक धर्म का प्रवाह, आसंजन की वजह से अवरुद्ध हो सकता है और इस कारण श्रोणि (पेल्विक) में तेज दर्द या डिस्मेनोरिया (मासिक धर्म के दौरान बहुत ज्यादा दर्द) जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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अंतर्गर्भाशय आसंजन के लक्षण - Intrauterine adhesion Symptoms in Hindi

जिन महिलाओं में ऐशरमैन सिंड्रोम होता है उनमें से अधिकांश में बेहद कम या बिलकुल भी मासिक धर्म नहीं होता। कुछ महिलाओं को उस समय तेज दर्द होता है जब उनका पीरियड्स आने वाला होता है लेकिन ब्लीडिंग नहीं होती। यह संकेत दे सकता है कि आपका मासिक धर्म जारी तो है लेकिन खून, गर्भाशय से बाहर आने में असमर्थ है क्योंकि खून के बाहर आने का रास्ता, स्कार टीशूज की वजह से अवरुद्ध है। लक्षणों की बात करें तो,

  • बहुत हल्का पीरियड्स आना (हाइपोमेनोरिया)
  • बिलकुल पीरियड्स न आना (ऐमेनोरिया)
  • पेट में गंभीर ऐंठन या तेज दर्द होना
  • गर्भवती होने में दिक्कत होना या गर्भवती हो जाने के बाद गर्भावस्था को बनाए रखने में असमर्थ होना

अंतर्गर्भाशय आसंजन की समस्या से पीड़ित कुछ महिलाओं में कोई लक्षण नहीं दिखते हैं तो वहीं कुछ महिलाओं में पीरियड्स भी सामान्य रहता है।

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अंतर्गर्भाशय आसंजन के कारण - Intrauterine adhesion Causes in Hindi

अंतर्राष्ट्रीय ऐशरमैन एसोसिएशन के अनुसार, ऐशरमन सिंड्रोम या अंतर्गर्भाशयी आसंजन (आईयूए) के सभी मामलों में से लगभग 90 प्रतिशत मामले में डिलेशन एंड क्यूरेटेज (डी एंड सी) की प्रक्रिया के बाद गर्भाशय में स्कार टीशूज बनते हैं। डी एंड सी की प्रक्रिया आमतौर पर एक अपूर्ण गर्भस्त्राव (मिसकैरेज) के बाद, डिलिवरी के बाद भी अगर प्लेसेंटा बाहर न आए तो उसके बाद या वैकल्पिक गर्भपात (अबॉर्शन) के रूप में किया जाता है। 

अगर डिलिवरी के बाद भी प्लेसेंटा बाहर न निकले और गर्भाशय में ही रह जाए तो डिलिवरी के 2 से 4 सप्ताह के भीतर डी एंड सी की जाती है और ऐसे मामले में गर्भाशय में स्कार टीशूज बनने और ऐशरमैन सिंड्रोम विकसित होने का खतरा 25 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। अगर कोई महिला डी एंड सी प्रक्रिया से एक से ज्यादा बार गुजरे तब भी उसमें अंतर्गर्भाशय आसंजन की समस्या विकसित होने का जोखिम बढ़ जाता है। 

इसके अलावा कभी-कभी अन्य पेल्विक सर्जरी के जैसे- सिजेरियन डिलिवरी, फाइब्रॉयड्स या पॉलिप्स को हटाने के लिए की गई सर्जरी के परिणामस्वरूप भी स्कार टीशूज या आसंजन बन सकते हैं। एंडोमेट्रिओसिस, प्रजनन अंगों में होने वाला इंफेक्शन या रेडिएशन ट्रीटमेंट के बाद भी आईयूए की समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है।

अंतर्गर्भाशय आसंजन का निदान - Diagnosis of Intrauterine adhesion in Hindi

अगर डॉक्टर को संदेह होता है कि महिला अंतर्गर्भाशय आसंजन या ऐशरमैन सिंड्रोम से पीड़ित हो सकती है तो आमतौर पर डॉक्टर पहले अन्य स्थितियों या बीमारियों का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। इसके अलावा वे गर्भाशय की परत (लाइनिंग) और फॉलिकल्स की मोटाई का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड का सहारा भी ले सकते हैं। इसके अलावा डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पूछते हैं और शारीरिक परीक्षण भी करते हैं। शारीरिक परीक्षण से आसंजन का पता नहीं चलता लेकिन सर्वाइकल ब्लॉकेज का पता चल सकता है अगर, कोई उपकरण गर्भाशय ग्रीवा में प्रवेश करने में सक्षम न हो तो। मरीज को इंडोक्राइन समस्या तो नहीं है, इसका पता लगाने के लिए डॉक्टर हार्मोन टेस्ट भी करवा सकते हैं।

हालांकि हिस्टेरोस्कोपी को अंतर्गर्भाशय आसंजन या ऐशरमैन सिंड्रोम के डायग्नोसिस में उपयोग होने वाला सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान, डॉक्टर मरीज के गर्भाशय ग्रीवा को फैलाते हैं और फिर एक हिस्टेरोस्कोप को ग्रीवा के अंदर डालते हैं। हिस्टेरोस्कोप एक छोटे दूरबीन की तरह होता है जिसके जरिए डॉक्टर आपके गर्भ के अंदर यह देखने की कोशिश करते हैं कि वहां पर स्कार टीशू मौजूद हैं या नहीं। 

इसके अलावा कई इस स्थिति को डायग्नोज करने के लिए डॉक्टर हिस्टेरोसैल्पिन्गोग्राम (एचएसजी) करवाने की भी सलाह देते हैं। एचएसजी के जरिए डॉक्टर को गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब की स्थिति को देखने में मदद मिलती है। इस प्रक्रिया के दौरान, एक विशेष तरह की डाई को गर्भाशय में इंजेक्ट किया जाता है, जिससे एक्स-रे पर गर्भाशय या फैलोपियन ट्यूब में हो रही किसी तरह की वृद्धि या रुकावट को पहचानने में डॉक्टर को आसानी होती है।

अंतर्गर्भाशय आसंजन का उपचार - Intrauterine adhesion Treatment in Hindi

अंतर्गर्भाशय आसंजन के दौरान चूंकि गर्भाशय की दीवारें एक दूसरे से चिपक जाती हैं और गर्भाशय का साइज छोटा हो जाता है इसलिए इलाज का लक्ष्य गर्भाशय को उसके सामान्य साइज और आकार में फिर से वापस लाना होता है। इसके लिए ऑपरेटिव हिस्टेरोस्कोपी नाम की सर्जिकल प्रक्रिया की जाती है जिसमें हिस्टेरोस्कोप के आखिर में छोटे सर्जिकल उपकरण लगे होते हैं जो आसंजन को हटाने का काम करते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान जनरल एनेस्थीसिया का इस्तेमाल किया जाता है। प्रक्रिया के बाद मरीज को इंफेक्शन से बचाने के लिए एंटीबायोटिक्स दी जाती है और गर्भाशय की परत (लाइनिंग) में सुधार करने के लिए एस्ट्रोजेन टैबलेट्स भी। 

यह देखने के लिए ऑपरेशन सफल हुआ या नहीं और गर्भाशय के साथ आसंजन (अधेशन्स) खत्म हुए या नहीं, डॉक्टर कुछ दिनों बाद फिर से हिस्टेरोस्कोपी करते हैं।

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